क्या ज्यादा सोना भी है बीमारी का संकेत? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ
कम और ज्यादा दोनों तरह की नींद बढ़ा सकती है स्वास्थ्य जोखिम
कितनी नींद है सही? कम और ज्यादा सोने के नुकसान समझिए
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी सेहत के लिए केवल पर्याप्त ही नहीं, बल्कि संतुलित नींद भी जरूरी है। लगातार कम या बहुत अधिक सोना कई स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम से जुड़ा हो सकता है। हालांकि अधिक सोना कई बार किसी अंतर्निहित बीमारी का संकेत भी हो सकता है, इसलिए लंबे समय तक ऐसी स्थिति बनी रहे तो चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
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📍 Location: India
📰 Date: 11 July 2026
✍️ Neelam Saini
कम नींद ही नहीं, ज्यादा सोना भी सेहत पर डाल सकता है असर
नींद शरीर की जरूरत है, लेकिन संतुलन भी उतना ही जरूरी
नींद शरीर और मस्तिष्क को आराम देने की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसी दौरान शरीर कोशिकाओं की मरम्मत करता है, याददाश्त को व्यवस्थित करता है और हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वयस्कों के लिए सामान्यतः प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की नींद उपयुक्त मानी जाती है। इससे कम या लगातार इससे अधिक नींद कई स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ी हो सकती है।
हालांकि यह समझना जरूरी है कि किसी व्यक्ति की नींद की आवश्यकता उम्र, स्वास्थ्य, गर्भावस्था, शारीरिक गतिविधि और अन्य परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
कम नींद के क्या हो सकते हैं नुकसान?
यदि कोई व्यक्ति लगातार कम सोता है, तो दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और कार्यक्षमता में कमी महसूस हो सकती है। लंबे समय तक नींद की कमी उच्च रक्तचाप, मोटापा, टाइप-2 मधुमेह और हृदय रोग के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ी पाई गई है। नींद की कमी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी प्रभावित कर सकती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
क्या ज्यादा सोना भी नुकसान पहुंचा सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार नियमित रूप से 9–10 घंटे या उससे अधिक सोना कुछ मामलों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जुड़ा पाया गया है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि अधिक नींद स्वयं बीमारी का कारण बनती है या पहले से मौजूद किसी बीमारी का परिणाम होती है। कई अध्ययनों में अधिक सोने और हृदय रोग, अवसाद, मधुमेह तथा कम शारीरिक सक्रियता के बीच संबंध देखा गया है, लेकिन इसका सीधा कारण-परिणाम संबंध अभी पूरी तरह स्थापित नहीं हुआ है।
ज्यादा नींद किन समस्याओं का संकेत हो सकती है?
यदि कोई व्यक्ति पर्याप्त नींद लेने के बावजूद हमेशा थका हुआ महसूस करता है या बहुत अधिक सोता है, तो इसके पीछे स्लीप एपनिया, अवसाद, थायरॉयड की समस्या, कुछ दवाओं का प्रभाव या अन्य स्वास्थ्य स्थितियां हो सकती हैं। इसलिए लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है असर
अच्छी गुणवत्ता वाली नींद मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। कम नींद तनाव और चिंता को बढ़ा सकती है, जबकि अत्यधिक नींद भी कुछ लोगों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के साथ जुड़ी हो सकती है। इसलिए केवल घंटों की संख्या नहीं, बल्कि नींद की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है।
दिल और मेटाबॉलिज्म पर प्रभाव
पर्याप्त और नियमित नींद शरीर के मेटाबॉलिज्म तथा हृदय स्वास्थ्य को संतुलित रखने में मदद करती है। लगातार कम या अत्यधिक नींद लेने वाले लोगों में कुछ शोधों ने हृदय संबंधी जोखिम अधिक होने की संभावना जताई है। हालांकि प्रत्येक व्यक्ति में जोखिम समान नहीं होता।
अच्छी नींद के लिए क्या करें?
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोज एक ही समय पर सोने और जागने की आदत बनाएं। सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और अन्य स्क्रीन का उपयोग कम करें। शाम के समय कैफीन और निकोटीन का सेवन सीमित रखें तथा नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। यदि खर्राटे, बार-बार नींद टूटना या दिनभर अत्यधिक नींद आना जैसी समस्याएं लगातार बनी रहें, तो स्लीप विशेषज्ञ या चिकित्सक से सलाह लेना उचित होगा।
कितनी नींद है सही?
अमेरिकन एकेडमी ऑफ स्लीप मेडिसिन और नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की नींद उपयुक्त मानी जाती है। बच्चों, किशोरों और बुजुर्गों के लिए यह अवधि अलग हो सकती है।
निष्कर्ष
कम नींद लेना जितना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है, उतना ही जरूरत से अधिक सोना भी कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत या जोखिम कारक हो सकता है। इसलिए केवल अधिक या कम सोने के बजाय नियमित, संतुलित और गुणवत्तापूर्ण नींद पर ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है। यदि आपकी नींद की आदतों में लंबे समय तक असामान्य बदलाव बना रहे या दिनभर अत्यधिक थकान महसूस हो, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर होगा।