ऑनलाइन बिक रहा था जहरीला धतूरा, तीन बड़ी कंपनियों पर कार्रवाई
अमेज़न, स्विगी और बिगबास्केट पर क्यों हुआ बड़ा एक्शन?
धतूरा बिक्री पर कर्नाटक सख्त, खाद्य लाइसेंस निलंबित
कर्नाटक में ऑनलाइन मंचों पर धतूरे के फल और बीज मानव सेवन के लिए खाद्य वस्तु के रूप में सूचीबद्ध मिले। खाद्य सुरक्षा विभाग ने अमेज़न, स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिए। कंपनियों से अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई है और संबंधित विक्रेताओं पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
बेंगलुरु, कर्नाटक |25 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
कर्नाटक में ऑनलाइन मंचों के जरिए धतूरे के फल और बीजों की बिक्री का मामला सामने आने के बाद राज्य के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने अमेज़न, स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के खाद्य लाइसेंस अगले आदेश तक निलंबित करने का निर्देश दिया है।
जांच में धतूरे के फल और बीज कुछ ऑनलाइन मंचों पर मानव सेवन के लिए खाद्य वस्तु के तौर पर उपलब्ध पाए गए। विभाग ने संबंधित मंचों को ऐसी सभी सूचियां, विज्ञापन और प्रचार सामग्री तत्काल हटाने तथा धतूरे को खाद्य वस्तु के रूप में बेचने या वितरित करने पर रोक लगाने का आदेश दिया है।
यह कार्रवाई केवल तीन कंपनियों तक सीमित नहीं है। अधिकारियों को उन प्रतिष्ठानों और विक्रेताओं के लाइसेंस या पंजीकरण पर भी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है, जो इन ऑनलाइन मंचों को धतूरे से जुड़े उत्पाद उपलब्ध करा रहे थे।
धतूरा एक विषैला पौधा है। इसके फल और बीजों में ऐसे विषैले तत्व पाए जाते हैं, जिनका सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा विभाग ने भी इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर मामला माना है। मामले की गंभीरता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि इन उत्पादों को कुछ ऑनलाइन सूचियों में खाद्य वस्तु के रूप में पेश किया गया था। विभाग के मुताबिक धतूरे का फल या बीज मानव सेवन के लिए बेचना, वितरित करना, बिक्री के लिए प्रदर्शित करना या उसका प्रचार करना स्वीकार्य नहीं है। यही वह बिंदु है जहां खाद्य सुरक्षा और ऑनलाइन व्यापार की जवाबदेही का सवाल सामने आता है। किसी वस्तु की ऑनलाइन उपलब्धता अपने आप उसकी खाद्य सुरक्षा या वैधता की पुष्टि नहीं करती।
कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने धतूरे से जुड़े उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री को लेकर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान विभाग को कुछ मंचों पर धतूरे के फल और बीज बिक्री के लिए प्रदर्शित मिले। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ पैकेटों पर भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के लाइसेंस या पंजीकरण नंबर भी दिखाई दिए। यही वजह है कि मामला और गंभीर हो गया, क्योंकि उपभोक्ता ऐसे नंबर देखकर उत्पाद को खाद्य सुरक्षा के लिहाज से स्वीकृत समझ सकता है। विभाग ने इसके बाद संबंधित कंपनियों को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा। सुनवाई के दौरान कंपनियों से यह भी पूछा गया कि धतूरे से जुड़ी बिक्री और सूचियों को रोकने के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए।
मामले में तीनों कंपनियों का जवाब एक जैसा नहीं रहा। रिपोर्ट के मुताबिक सुनवाई के दौरान अमेज़न ने जवाब दाखिल नहीं किया। स्विगी इंस्टामार्ट ने धतूरे से जुड़ी बिक्री पर उठाए गए कदमों के दस्तावेज देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। बिगबास्केट ने विभाग को बताया कि उसने धतूरे के फल और बीजों की बिक्री रोक दी है। कंपनी ने आगे ऐसी सूचियों में यह स्पष्ट करने की बात कही कि उत्पाद मानव सेवन के लिए नहीं है। हालांकि, कर्नाटक के खाद्य सुरक्षा विभाग ने इन जवाबों को संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद तीनों मंचों के खाद्य लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई सामने आई।
इस मामले में शब्दों का सही इस्तेमाल बेहद जरूरी है। कर्नाटक सरकार ने इन कंपनियों के पूरे कारोबार को बंद करने का आदेश नहीं दिया है।
मौजूदा कार्रवाई उनके खाद्य लाइसेंस और खाद्य कारोबार से जुड़ी है। आदेश अगले निर्देश तक प्रभावी रहेगा। अनुपालन रिपोर्ट मिलने और संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के बाद निलंबन हटाने पर अलग से फैसला किया जा सकता है। इसलिए इसे “अमेज़न पर कर्नाटक में पूरी तरह प्रतिबंध” या “स्विगी और बिगबास्केट बंद” कहना सही नहीं होगा। सही तथ्य यह है कि इन कंपनियों से जुड़े खाद्य लाइसेंस निलंबित किए गए हैं।
धतूरे को आम तौर पर एक विषैला पौधा माना जाता है। इसके फल और बीजों का सेवन गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। कर्नाटक के विभाग ने इसी स्वास्थ्य जोखिम को कार्रवाई का प्रमुख आधार बनाया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार बिना उचित शोधन के धतूरे का सेवन गंभीर विषाक्तता पैदा कर सकता है। गंभीर मामलों में बेहोशी और जान का खतरा भी सामने आ सकता है। इसलिए धतूरे से जुड़ी किसी भी वस्तु को घरेलू नुस्खे या खाद्य सामग्री समझकर खाना जोखिम भरा हो सकता है। खास तौर पर बच्चों और ऐसे लोगों के मामले में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है, जो इसके विषैले प्रभाव से अनजान हों।
खाद्य लाइसेंस का मकसद खाद्य कारोबार में सुरक्षा और नियामकीय जवाबदेही सुनिश्चित करना है। जब किसी विषैले पौधे के फल या बीज खाद्य वस्तु के तौर पर ऑनलाइन दिखाई देते हैं, तो यह सवाल उठता है कि उत्पाद की श्रेणी, विक्रेता और उसकी बिक्री की निगरानी किस स्तर पर हुई।
मामले में कुछ उत्पादों पर खाद्य सुरक्षा से जुड़े लाइसेंस या पंजीकरण नंबर पाए जाने की बात सामने आई है। लेकिन किसी उत्पाद की सूची पर लाइसेंस नंबर दिखाई देना अपने आप यह साबित नहीं करता कि वह उत्पाद हर परिस्थिति में मानव सेवन के लिए सुरक्षित है। यहीं से नियामकीय जांच का दायरा बढ़ता है। केवल विक्रेता की गलती देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह भी देखना होगा कि ऑनलाइन मंच पर उत्पाद की श्रेणी और बिक्री किस प्रक्रिया से मंजूर हुई।
कर्नाटक सरकार ने संबंधित ऑनलाइन मंचों को कार्रवाई के दायरे में लिया है, लेकिन साथ ही उन प्रतिष्ठानों और विक्रेताओं पर भी कदम उठाने का निर्देश दिया है जो इन कंपनियों को ऐसे उत्पाद उपलब्ध करा रहे थे। राज्य और केंद्रीय स्तर के संबंधित अधिकारियों तथा खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को ऐसे प्रतिष्ठानों और विक्रेताओं के लाइसेंस या पंजीकरण निलंबित करने के लिए तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। इससे साफ है कि सरकार मामले को केवल ऑनलाइन सूची हटाने तक सीमित नहीं रख रही। आपूर्ति की पूरी कड़ी की जांच भी कार्रवाई का हिस्सा है।
इस घटना ने ऑनलाइन किराना और त्वरित सामान पहुंचाने वाले मंचों की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इन मंचों पर बड़ी संख्या में विक्रेता और उत्पाद मौजूद होते हैं। ऐसे में किसी प्रतिबंधित या स्वास्थ्य के लिए खतरनाक वस्तु की सूची सामने आने से पहले उसकी जांच किस स्तर पर होती है, यह अहम सवाल है। खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल पारंपरिक दुकानों तक सीमित नहीं रह सकती। जैसे-जैसे ऑनलाइन खाद्य कारोबार बढ़ रहा है, वैसे-वैसे उत्पाद की पहचान, विक्रेता का सत्यापन, खाद्य श्रेणी और लाइसेंस की जांच भी मजबूत करनी होगी। कर्नाटक की कार्रवाई इसी नियामकीय चुनौती को सामने लाती है। अगर कोई विषैला पदार्थ खाद्य वस्तु के रूप में दिखाई देता है, तो उपभोक्ता सुरक्षा के लिए त्वरित कार्रवाई जरूरी है।
यहां भी सावधानी जरूरी है। मौजूदा कार्रवाई उन सूचियों से जुड़ी है जिनमें धतूरे के फल और बीजों को मानव सेवन या खाद्य उपयोग के संदर्भ में पेश किया गया था। उपलब्ध सरकारी कार्रवाई का केंद्र खाद्य उपयोग है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि धतूरे से जुड़ी हर वस्तु या हर प्रकार की सूची अपने आप प्रतिबंधित है। विभाग ने विशेष तौर पर मानव सेवन के लिए बिक्री, वितरण, प्रदर्शन और प्रचार पर रोक की बात कही है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी कर्नाटक की नियामकीय कार्रवाई से जुड़ी है। अभी इसे पूरे देश में अमेज़न, स्विगी इंस्टामार्ट या बिगबास्केट के खिलाफ समान कार्रवाई के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। लेकिन मामला राष्ट्रीय स्तर पर ऑनलाइन खाद्य सुरक्षा को लेकर बहस जरूर बढ़ा सकता है। ई-कॉमर्स के बढ़ते विस्तार के साथ खाद्य उत्पादों की निगरानी और उपभोक्ता सुरक्षा की जिम्मेदारी भी अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।
अब संबंधित कंपनियों और अन्य खाद्य कारोबारियों को अनुपालन रिपोर्ट जमा करनी है। इसके बाद विभाग संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देगा और फिर निलंबन जारी रखने या उसे हटाने पर अलग फैसला लिया जाएगा। दूसरी तरफ धतूरे की बिक्री से जुड़े विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं के खिलाफ भी कार्रवाई आगे बढ़ सकती है। अगर जांच में खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित कानूनों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कर्नाटक की कार्रवाई का सबसे अहम पहलू यह है कि एक विषैला पौधा खाद्य वस्तु के रूप में ऑनलाइन बिक्री तक पहुंचा कैसे। जांच को यह भी स्पष्ट करना होगा कि उत्पाद की सूची किसने बनाई, विक्रेता का सत्यापन कैसे हुआ और खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों की निगरानी किस स्तर पर कमजोर पड़ी। सिर्फ सूची हटाने से मामला खत्म नहीं होगा। उपभोक्ता सुरक्षा के लिए यह समझना जरूरी है कि ऐसी वस्तु ऑनलाइन मंच तक पहुंची कैसे और भविष्य में उसे रोकने के लिए कौन-से निगरानी तंत्र मजबूत किए जाएंगे।
कर्नाटक में धतूरे की ऑनलाइन बिक्री ने खाद्य सुरक्षा और डिजिटल व्यापार की निगरानी से जुड़े गंभीर सवाल सामने रखे हैं। अमेज़न, स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के खाद्य लाइसेंस अगले आदेश तक निलंबित किए गए हैं और उन्हें धतूरे से जुड़ी खाद्य सूचियां, विज्ञापन तथा प्रचार सामग्री हटाने के निर्देश दिए गए हैं। मामले में यह भी स्पष्ट है कि कार्रवाई केवल ऑनलाइन मंचों तक सीमित नहीं है। संबंधित विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं के लाइसेंस या पंजीकरण पर भी कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। अब आगे की निगाह अनुपालन रिपोर्ट, सुनवाई और नियामकीय फैसले पर रहेगी। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मानव सेवन के लिए खतरनाक धतूरा खाद्य वस्तु के रूप में ऑनलाइन बाजार तक पहुंचा कैसे और ऐसी चूक दोबारा न हो, इसके लिए व्यवस्था में क्या बदलाव किए जाएंगे।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।