एफएसएसएआई ने नारायणी फूड्स, ज़ाइकाआ ऑर्गेनिक्स और एबी एंटरप्राइज के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किए। निरीक्षण में हाइजीन, सैनिटेशन और लेबलिंग से जुड़ी गंभीर खामियां मिलीं। ज़ाइकाआ का कंप्लायंस स्कोर 12 प्रतिशत और नारायणी का 25 प्रतिशत रहा। एबी एंटरप्राइज पर भ्रामक हेल्थ क्लेम का आरोप है।
भारत | 13 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण, एफएसएसएआई, ने तीन फूड बिजनेस ऑपरेटर्स के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिए हैं। कार्रवाई नारायणी फूड्स एंड बेवरेजेज, ज़ाइकाआ ऑर्गेनिक्स और एबी एंटरप्राइज के खिलाफ की गई है। एफएसएसएआई के मुताबिक निरीक्षण के दौरान गंभीर हाइजीन, सैनिटेशन, फूड सेफ्टी और लेबलिंग से जुड़ी खामियां सामने आईं।
यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा और मानकों के अनुपालन को लेकर रेगुलेटर की सख्ती का संकेत देती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन कंपनियों के उत्पादों से किसी उपभोक्ता को नुकसान पहुंचने की पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए कार्रवाई को नियामकीय उल्लंघनों के संदर्भ में देखना जरूरी है।
नारायणी फूड्स एंड बेवरेजेज के परिसर के निरीक्षण में सफाई और सैनिटेशन की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली। एफएसएसएआई के अनुसार परिसर और उपकरणों का रखरखाव भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं था।
निरीक्षण में पानी के नल के आसपास हरी शैवाल, प्रोसेसिंग और स्टोरेज एरिया में मक्खियां तथा जाले पाए गए। कुछ उपकरणों पर जंग और करप्शन के निशान भी मिले।
रेगुलेटर के मुताबिक तैयार उत्पाद सीधे फर्श पर और दीवारों के पास रखे गए थे। उन्हें पैलेट के इस्तेमाल के बिना स्टोर किया गया था, जिससे संभावित कंटैमिनेशन का जोखिम पैदा हो सकता है।
कंप्लायंस असेसमेंट में यूनिट को 80 में से 20 अंक मिले। यानी उसका ओवरऑल कंप्लायंस स्कोर 25 प्रतिशत रहा और इसे “नॉन-कंप्लायंस” कैटेगरी में रखा गया। इसके बाद लाइसेंस तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया।
ज़ाइकाआ ऑर्गेनिक्स के मामले में भी एफएसएसएआई ने गंभीर गैर-अनुपालन दर्ज किया। रेगुलेटर के मुताबिक फूड का मैन्युफैक्चरिंग, पैकिंग और स्टोरेज अस्वच्छ परिस्थितियों में हो रहा था।
प्रोसेसिंग हॉल, स्टोरेज एरिया और कच्चे माल के स्टोरेज क्षेत्र में धूल और बड़ी संख्या में जाले पाए गए। पेस्ट कंट्रोल को लेकर भी पर्याप्त इंतजाम नहीं मिले।
कच्चे माल और तैयार उत्पादों को उचित सेग्रिगेशन के बिना रखा गया था। उपकरणों पर जंग और करप्शन की शिकायत भी सामने आई।
एफएसएसएआई के आकलन में यूनिट को 90 में से केवल 10 अंक मिले। इसका कंप्लायंस स्कोर 12 प्रतिशत रहा और इसे भी “नॉन-कंप्लायंस” कैटेगरी में रखा गया। लाइसेंस सभी संबंधित फूड बिजनेस एक्टिविटीज के लिए अगले आदेश तक सस्पेंड किया गया।
तीसरी कार्रवाई एबी एंटरप्राइज के खिलाफ हुई। यहां मामला मुख्य रूप से हेल्थ बेनिफिट क्लेम और लाइसेंस से जुड़ा रहा।
एफएसएसएआई के मुताबिक कंपनी के प्रोडक्ट लेबल और प्रमोशनल कंटेंट में ऐसे हेल्थ बेनिफिट क्लेम किए गए, जो फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स, एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स रेगुलेशंस, 2018 के अनुरूप नहीं थे।
निरीक्षण में यह भी पाया गया कि कंपनी ऐसी मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी कर रही थी, जो उसके एफएसएसएआई लाइसेंस में एंडोर्स नहीं थी।
एफएसएसएआई के अनुसार कंपनी को पर्सनल हियरिंग का अवसर दिया गया था, लेकिन उसे कोई जवाब या आगे का कम्युनिकेशन प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद लाइसेंस तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया और फूड से जुड़ी गतिविधियां रोकने का निर्देश दिया गया।
तीनों लाइसेंस फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किए गए हैं। यह एक नियामकीय कार्रवाई है और इसे किसी आपराधिक दोषसिद्धि के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
इस मामले में उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर एफएसएसएआई ने निरीक्षण निष्कर्षों और लाइसेंस शर्तों के उल्लंघन को आधार बनाया है। आगे की स्थिति संबंधित कंपनियों के अनुपालन और रेगुलेटरी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
इस कार्रवाई का सबसे अहम पहलू यह है कि फूड सेफ्टी अब केवल उत्पाद की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है। मैन्युफैक्चरिंग परिसर की सफाई, उपकरणों का रखरखाव, स्टोरेज, पेस्ट कंट्रोल, लेबलिंग और विज्ञापन में किए गए दावे भी रेगुलेटरी कंप्लायंस का हिस्सा हैं।
नारायणी और ज़ाइकाआ के मामलों में सामने आई हाइजीन संबंधी खामियां इसी व्यापक फूड सेफ्टी फ्रेमवर्क को दिखाती हैं। वहीं एबी एंटरप्राइज का मामला बताता है कि किसी उत्पाद को बेचने के लिए किए गए हेल्थ क्लेम भी नियामकीय जांच के दायरे में आते हैं।
एफएसएसएआई ने हाल के महीनों में ऑनलाइन और ऑफलाइन फूड मार्केटिंग में भ्रामक दावों और गैर-अनुपालन पर निगरानी बढ़ाई है। जुलाई 2026 में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को भी गैर-अनुपालन वाले फूड प्रोडक्ट्स की लिस्टिंग हटाने और ऑनलाइन लेबल जानकारी को वास्तविक पैकेजिंग से मिलाने के निर्देश दिए गए थे।
इन लाइसेंस सस्पेंशन का मतलब यह नहीं है कि इन कंपनियों के हर उत्पाद को स्वतः असुरक्षित घोषित कर दिया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों में ऐसी कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं है।
मामले का केंद्र रेगुलेटरी कंप्लायंस है। उपभोक्ताओं के लिए यह घटना एक अहम संदेश देती है कि पैकेज्ड फूड खरीदते समय लेबल, एफएसएसएआई लाइसेंस विवरण, मैन्युफैक्चरिंग जानकारी और हेल्थ क्लेम को ध्यान से देखना जरूरी है।
विशेष रूप से “हेल्दी”, “नेचुरल”, “प्योर” या किसी बीमारी अथवा स्वास्थ्य लाभ से जुड़े दावों को केवल विज्ञापन के आधार पर सच मानना उचित नहीं है।
एफएसएसएआई की हालिया कार्रवाई को अलग-अलग घटनाओं के बजाय व्यापक एनफोर्समेंट ड्राइव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। अगस्त की शुरुआत में भी दूसरे फूड बिजनेस ऑपरेटर्स के खिलाफ निरीक्षण आधारित कार्रवाई की रिपोर्ट सामने आई थी।
इससे संकेत मिलता है कि रेगुलेटर केवल लाइसेंस जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहता। लाइसेंस मिलने के बाद भी लगातार कंप्लायंस बनाए रखना फूड बिजनेस ऑपरेटर्स की जिम्मेदारी है।
फूड इंडस्ट्री के लिए इसका सीधा असर यह है कि मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, स्टोरेज व्यवस्था, सैनिटेशन रिकॉर्ड, लेबलिंग और प्रमोशनल कंटेंट की नियमित समीक्षा जरूरी हो जाती है।
तीनों कंपनियों के लिए अगला चरण रेगुलेटरी प्रक्रिया और अनुपालन सुधार से जुड़ा होगा। उपलब्ध रिपोर्टों में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि तीनों लाइसेंस कब तक बहाल होंगे।
यह भी महत्वपूर्ण है कि लाइसेंस सस्पेंशन और प्रोडक्ट रिकॉल अलग-अलग नियामकीय कार्रवाई हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन तीन कंपनियों के सभी उत्पादों के व्यापक रिकॉल की घोषणा नहीं की गई है।
इसलिए फिलहाल सबसे सटीक निष्कर्ष यही है कि एफएसएसएआई ने निरीक्षण में दर्ज गंभीर गैर-अनुपालन के आधार पर तीन फूड बिजनेस ऑपरेटर्स के लाइसेंस सस्पेंड किए हैं। आगे की कार्रवाई अनुपालन और संबंधित रेगुलेटरी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।