प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशियाई संसद को संबोधित करते हुए भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई दिशा देने के लिए ‘गंगा-महाकम विजन’ प्रस्तुत किया। उन्होंने व्यापार, ऊर्जा, डिजिटल सहयोग, समुद्री सुरक्षा और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने पर जोर दिया। यह यात्रा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
📍 Location: जकार्ता, इंडोनेशिया
📰 Date: 7 जुलाई 2026
✍️ Byline: Apurva Choudhary
भारत-इंडोनेशिया संबंधों में नई शुरुआत का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को भविष्य की रणनीतिक साझेदारी से जोड़ने का आह्वान किया। वह इंडोनेशियाई संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने 'विकसित भारत 2047' और 'गोल्डन इंडोनेशिया 2045' को साझा विकास दृष्टि बताते हुए कहा कि दोनों देशों को आर्थिक, सामरिक और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहिए।
‘गंगा-महाकम विजन’ से संबंधों को नई दिशा
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय सहयोग के लिए ‘गंगा-महाकम विजन’ प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंध आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और इन्हें भविष्य की साझेदारी का आधार बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों को विकास, समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक विश्वास, सांस्कृतिक जुड़ाव और ग्लोबल साउथ के साझा हितों पर मिलकर आगे बढ़ना चाहिए।
समुद्र दूरी नहीं, साझेदारी का सेतु
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच समुद्र दूरी का प्रतीक नहीं बल्कि साझा भविष्य का सेतु है। हिंद महासागर ने हजारों वर्षों से दोनों देशों को व्यापार, संस्कृति, धर्म और विचारों के माध्यम से जोड़े रखा है।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास और सद्भाव को नागरिकों के लिए नए अवसरों में बदलना समय की आवश्यकता है।
व्यापार, निवेश और डिजिटल सहयोग पर जोर
प्रधानमंत्री ने व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया की विकास यात्राएं एक-दूसरे की पूरक हैं और दोनों देश मिलकर क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति दे सकते हैं।
इंडो-पैसिफिक और वैश्विक संस्थाओं पर भारत का रुख
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्र, खुले और नियम आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का समर्थन दोहराया। उन्होंने कहा कि भारत की एक्ट ईस्ट नीति ASEAN केंद्रित है और भारत नौवहन की स्वतंत्रता तथा क्षेत्रीय स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर देते हुए कहा कि वैश्विक संस्थाओं में बदलाव अब और टाला नहीं जा सकता।
विकासवाद पर दिया जोर
बिना किसी देश का नाम लिए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत विस्तारवाद नहीं बल्कि विकासवाद की नीति पर चलता है। उन्होंने लोकतंत्र को अवसर, विश्वास और भविष्य का आधार बताते हुए कहा कि भारत और इंडोनेशिया लोकतांत्रिक मूल्यों के माध्यम से वैश्विक स्थिरता में योगदान दे सकते हैं।
सभ्यताओं की साझेदारी से भविष्य की रणनीति
प्रधानमंत्री ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और इंडोनेशिया के राष्ट्रीय आदर्श ‘भिन्नेका तुंग्गल इका’ (विविधता में एकता) का उल्लेख करते हुए कहा कि साझा सांस्कृतिक विरासत दोनों देशों के रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने कहा कि साझा इतिहास, साझा चुनौतियां और साझा आकांक्षाएं भारत और इंडोनेशिया को स्वाभाविक रणनीतिक साझेदार बनाती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंडोनेशियाई संसद में संबोधन केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं बल्कि भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई रणनीतिक दिशा देने का प्रयास माना जा रहा है। ‘गंगा-महाकम विजन’ के माध्यम से व्यापार, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल सहयोग और ग्लोबल साउथ के साझा हितों पर आधारित नई साझेदारी का रोडमैप सामने आया है।