एमपी एथनॉल घोटाला, सरकारी चावल की री-साइक्लिंग का बड़ा खुलासा
242 क्विंटल
चावल वाला
लापता ट्रक
मिला, एथनॉल
घोटाले की
जांच तेज
Location:- Madhya Pradesh, India
Date:- 11 July 2026
Byline:- Shahana
सरकारी चावल
से करोड़ों
का खेल,
SIT जांच में
सामने आया
नया नेटवर्क
मध्य प्रदेश
में सरकारी
सब्सिडी वाले
चावल को
कथित तौर
पर एथनॉल
उत्पादन के
लिए भेजने
के बजाय
निजी राइस
मिलों में
डायवर्ट करने
का मामला
सामने आया
है। जांच
एजेंसियों का
आरोप है
कि इसी
चावल को
दोबारा सरकारी
खरीद प्रणाली
में शामिल
कर ऊंची
कीमत पर
बेचा जाता
था। मामले
की SIT जांच
जारी है
और कई
गिरफ्तारियां हो
चुकी हैं.
एमपी एथनॉल
घोटाले ने
सरकारी खरीद
व्यवस्था पर
खड़े किए
गंभीर सवाल
मध्य प्रदेश में सामने आया कथित एथनॉल घोटाला केवल चावल की अवैध सप्लाई का मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली, सरकारी खरीद व्यवस्था और एथनॉल नीति के क्रियान्वयन पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रारंभिक जांच के अनुसार सब्सिडी वाले सरकारी चावल को निर्धारित एथनॉल यूनिट तक पहुंचाने के बजाय निजी राइस मिलों में भेजा गया। इसके बाद उसी स्टॉक को दोबारा सरकारी खरीद प्रणाली में शामिल करने का आरोप है। जांच एजेंसियों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो सरकार को एक ही स्टॉक पर कई गुना अधिक भुगतान करना पड़ा होगा। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के बाद ही सामने आएंगे।
जांच कैसे
शुरू हुई
पूरे मामले
की शुरुआत
तब हुई
जब फूड
कॉर्पोरेशन ऑफ
इंडिया को
भेजी गई
खेप अपने
निर्धारित एथनॉल
प्लांट तक
नहीं पहुंची।
रिकॉर्ड और
परिवहन दस्तावेजों
का मिलान
करने पर
अधिकारियों को
गड़बड़ी का
संदेह हुआ।
इसके बाद
पुलिस और
संबंधित एजेंसियों
ने जांच
शुरू की।
जांच के
दौरान तीन
ट्रकों की
मूवमेंट की
पड़ताल की
गई। इनमें
से एक
ट्रक 242 क्विंटल
सरकारी चावल
के साथ
बालाघाट जिले
के वारासिवनी
स्थित एक
राइस मिल
में मिला।
बाकी वाहनों
की तलाश
जारी है।
SIT की
जांच में
क्या सामने
आया
स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम शुरुआती जांच में यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सरकारी चावल किस प्रक्रिया से निजी मिलों तक पहुंचा और वहां उसके साथ क्या किया गया। जांचकर्ताओं का दावा है कि चावल को कथित रूप से कस्टम मिलिंग चक्र में दोबारा शामिल कर सरकारी एजेंसियों को ऊंचे दाम पर बेचा जाता था। यदि यह आरोप प्रमाणित होता है तो यह सरकारी खरीद प्रणाली के दुरुपयोग का बड़ा मामला माना जाएगा। फिलहाल जांच एजेंसियों ने इस दावे की पुष्टि अंतिम रूप से नहीं की है और विस्तृत फोरेंसिक, दस्तावेजी तथा वित्तीय जांच जारी है।
गिरफ्तारियां और
दर्ज मामला
पुलिस ने इस मामले में एवीजे एग्रिको प्राइवेट लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि राहुल प्रताप, ट्रक चालक दुर्गेश शेंडे, राइस मिल संचालक सौरभ सांचेती सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है। एफआईआर में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या इस नेटवर्क में अन्य कंपनियां, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर या बिचौलिए भी शामिल थे।
एथनॉल नीति
क्यों चर्चा
में है
भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण बढ़ाने की नीति पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों को नया बाजार उपलब्ध कराना और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देना है। इसी नीति के तहत कुछ परिस्थितियों में खाद्यान्न आधारित एथनॉल उत्पादन की अनुमति भी दी गई। लेकिन इस तरह की व्यवस्था में पारदर्शिता और निगरानी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है ताकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली का अनाज गलत हाथों में न पहुंचे।
क्या पूरे
सिस्टम में
निगरानी कमजोर
रही
यह मामला कई प्रशासनिक सवाल भी उठाता है। यदि ट्रकों की जीपीएस निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और डिलीवरी सत्यापन प्रभावी होता तो कथित डायवर्जन शुरुआती स्तर पर ही पकड़ा जा सकता था। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी सप्लाई चेन में तकनीकी निगरानी, रियल टाइम डेटा शेयरिंग और स्वतंत्र ऑडिट को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।
दूसरी तरफ
सरकार का
पक्ष
राज्य और केंद्रीय एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई कर रही हैं। SIT गठित की जा चुकी है और जांच लगातार आगे बढ़ रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। इसी दौरान केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि E20 ईंधन नीति जारी रहेगी। पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि समानांतर ईंधन वितरण प्रणाली आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं होगी।
क्या जांच
के सामने
चुनौतियां हैं
ऐसे मामलों में केवल ट्रकों की बरामदगी पर्याप्त नहीं होती। जांच एजेंसियों को बैंक लेनदेन, खरीद रिकॉर्ड, वेयरहाउस डेटा, जीपीएस रिकॉर्ड, बिलिंग दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर और डिजिटल ट्रेल की भी जांच करनी होगी। यदि कई जिलों और कंपनियों के बीच समन्वित नेटवर्क काम कर रहा था तो जांच लंबी और जटिल हो सकती है।
कानूनी प्रक्रिया
क्या कहती
है
भारतीय न्याय व्यवस्था के अनुसार गिरफ्तार सभी आरोपी तब तक निर्दोष माने जाते हैं जब तक अदालत में उनके खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं हो जाते। इसीलिए जांच एजेंसियों के दावों और आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। अदालत में उपलब्ध कराए जाने वाले साक्ष्य और न्यायिक प्रक्रिया ही अंतिम निर्णय तय करेगी।
आगे क्या
SIT अब बाकी
दो ट्रकों, संबंधित
कंपनियों, परिवहन
रिकॉर्ड और
वित्तीय लेनदेन
की जांच
कर रही
है। यदि
जांच में
बड़े स्तर
पर सरकारी
अनाज की
अवैध री-साइक्लिंग
साबित होती
है तो
यह हाल
के वर्षों
के महत्वपूर्ण
आर्थिक अपराध
मामलों में
शामिल हो
सकता है।
यह मामला केवल कथित आर्थिक अनियमितता तक सीमित नहीं है। यह सार्वजनिक धन, खाद्य सुरक्षा, सरकारी खरीद प्रणाली और एथनॉल नीति की विश्वसनीयता से भी जुड़ा हुआ है। जांच का अंतिम निष्कर्ष यह तय करेगा कि यह अलग-अलग व्यक्तियों की साजिश थी या संगठित सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।