मुज़फ्फरनगर में सपा नेत्री डॉ. मोनिका सिंह की भूख हड़ताल तीसरे दिन पहुंची। विवाद पुलिस कार्रवाई और कथित एकतरफा रवैये को लेकर है। मामला राजनीतिक टकराव में बदलता दिख रहा है।
📍 मुज़फ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
📰 3 अगस्त 2026
✍️ By Asif Khan
मुज़फ्फरनगर भूख हड़ताल विवाद ने स्थानीय सियासत को गर्म कर दिया है। समाजवादी पार्टी की नेत्री डॉ. मोनिका सिंह पिछले तीन दिन से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठी हैं। उनका आरोप है कि पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की है और प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया।
रविवार देर रात सपा सांसद हरेंद्र मलिक कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने धरना स्थल पर पहुंचकर डॉ. मोनिका सिंह से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही पर खुलकर सवाल उठाए और इसे “छोटा लेकिन अहम मसला” बताया।
महावीर चौक पर 22 जुलाई की रात सपा के धरने के दौरान विवाद हुआ था। इस घटना के बाद पुलिस ने मुकदमे दर्ज किए। सपा का आरोप है कि कार्रवाई एकतरफा हुई और उनके पक्ष को नजरअंदाज किया गया।
डॉ. मोनिका सिंह ने इसी के विरोध में शुक्रवार से भूख हड़ताल शुरू की। उनके साथ उनके पति युधिष्ठिर पहलवान और समर्थक भी धरने पर मौजूद हैं।
भूख हड़ताल के तीसरे दिन स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। सपा नेताओं का दावा है कि डॉ. मोनिका सिंह का ब्लड प्रेशर कम हो रहा है।
सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि तीन दिन में कोई डॉक्टर हालचाल लेने नहीं आया। उन्होंने इसे प्रशासन की गंभीर चूक बताया।
हालांकि, इस दावे पर प्रशासन की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
डॉ. मोनिका सिंह के पति युधिष्ठिर पहलवान ने आरोप लगाया कि सिविल लाइन थाने के अधिकारियों ने उन्हें दबाव में लेने की कोशिश की।
उनका कहना है कि पुलिस ने उन्हें अधिकारियों से मिलने को कहा और कार्रवाई के लिए निर्देश का इंतजार करने को कहा।
युधिष्ठिर पहलवान का दावा है कि जिस व्यक्ति पर विवाद की शुरुआत का आरोप है, उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने समान कार्रवाई की मांग दोहराई।
प्रशासन की तरफ से अब तक आधिकारिक बयान सीमित है। स्थानीय स्तर पर सूत्र बताते हैं कि कांवड़ यात्रा के कारण प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग व्यस्त है।
एक अधिकारी ने अनौपचारिक तौर पर कहा कि सभी मेडिकल संसाधन कांवड़ ड्यूटी में लगे हैं। इसी वजह से मौके पर डॉक्टर उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
हालांकि, यह तर्क विपक्ष के आरोपों को शांत करने के लिए पर्याप्त नहीं दिख रहा।
समाजवादी पार्टी इसे राजनीतिक उत्पीड़न का मामला बता रही है। जिला अध्यक्ष जिया चौधरी ने कहा कि पुलिस का रवैया पक्षपातपूर्ण है।
दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ पक्ष से अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय स्तर का यह विवाद बड़े राजनीतिक नैरेटिव में बदल सकता है।
मुज़फ्फरनगर भूख हड़ताल विवाद सिर्फ एक स्थानीय घटना नहीं रह गया है। यह पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली, राजनीतिक हस्तक्षेप और कानून-व्यवस्था के सवालों से जुड़ गया है।
ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता अहम होती है। अगर यह सुनिश्चित नहीं होता, तो जनता का भरोसा प्रभावित होता है।
एक पक्ष इसे प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक दबाव का मामला मानता है। दूसरा पक्ष इसे कानून-व्यवस्था के तहत की गई कार्रवाई बता सकता है, हालांकि आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट नहीं हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिना पूरी जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
धरना स्थल पर समर्थकों की मौजूदगी बनी हुई है। माहौल तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रित है।
स्थानीय पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अब तक किसी बड़े टकराव की खबर नहीं है।
यह विवाद आने वाले समय में स्थानीय राजनीति को प्रभावित कर सकता है। सपा इसे मुद्दा बना सकती है।
साथ ही, प्रशासन पर जवाबदेही का दबाव बढ़ सकता है।
अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन क्या कदम उठाता है। क्या निष्पक्ष जांच होती है या मामला और लंबा खिंचता है।
डॉ. मोनिका सिंह की भूख हड़ताल कब खत्म होगी, यह भी स्थिति पर निर्भर करेगा।
मुज़फ्फरनगर भूख हड़ताल विवाद प्रशासन और राजनीति के बीच टकराव का उदाहरण बनता जा रहा है।
मामले का समाधान संवाद, पारदर्शिता और निष्पक्ष कार्रवाई से ही निकल सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।