कांवड़ यात्रा के दौरान संभल और गाजियाबाद की दो महिलाएं बुर्का पहनकर शिव चौक पहुंचीं। उन्होंने भगवान शिव की पूजा की और मीडिया से बातचीत में अपने निजी जीवन, सुरक्षा तथा कुछ व्यक्तियों के संबंध में कई दावे किए। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
स्थान: मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
तारीख: 7 अगस्त 2026
By Asif Khan
मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा के दौरान शुक्रवार को उस समय लोगों का ध्यान एक अलग दृश्य की ओर गया, जब संभल निवासी तमन्ना मलिक और गाजियाबाद निवासी अनीसा बानो बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा के साथ शिव चौक पहुंचीं। दोनों महिलाओं के हाथों में भगवा ध्वज था और वे भगवान शिव के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ रही थीं। मौके पर मौजूद लोगों की बड़ी संख्या उन्हें देखने के लिए रुक गई।
पुलिस की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के बीच दोनों महिलाओं ने शिव चौक स्थित भगवान आशुतोष की परिक्रमा की। इसके बाद स्थानीय सामाजिक संगठन के प्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। पूरे कार्यक्रम के दौरान पुलिस बल तैनात रहा और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
मीडिया से बातचीत में तमन्ना मलिक ने दावा किया कि उन्हें अपने जीवन में न्याय और सम्मान नहीं मिला। उन्होंने कहा कि वह अनीसा बानो के समर्थन में कांवड़ यात्रा में शामिल हुई हैं। तमन्ना ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग उनका विरोध कर रहे हैं और उन्हें धमकियां मिल रही हैं।
इसी बातचीत में उन्होंने विवादित इस्लामिक धर्मगुरु मौलाना साजिद रशीदी के हालिया बयान की आलोचना की और उनके खिलाफ कई आरोप लगाए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि शाह टाइम्स नहीं करता है और इस समाचार के प्रकाशन तक संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हो सकी थी।
अनीसा बानो ने भी दावा किया कि उन्हें अपने वैवाहिक जीवन में न्याय नहीं मिला और उनके बच्चों को उनसे अलग कर दिया गया। उन्होंने कहा कि वह अपने बच्चों को वापस पाने के लिए कानूनी प्रक्रिया जारी रखेंगी। उन्होंने भी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और कुछ व्यक्तियों पर गंभीर आरोप लगाए। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
घटना के दौरान बड़ी संख्या में शिवभक्त और स्थानीय लोग मौजूद रहे। पुलिस अधिकारियों ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और किसी कानून-व्यवस्था संबंधी घटना की सूचना नहीं मिली।
कांवड़ यात्रा उत्तर भारत की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में शामिल है, जिसमें हर वर्ष लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं। ऐसे में अलग धार्मिक पृष्ठभूमि बताने वाली दो महिलाओं का बुर्का पहनकर कांवड़ यात्रा में शामिल होना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। हालांकि किसी नागरिक को धार्मिक आस्था के अनुसार पूजा-अर्चना करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है, बशर्ते सार्वजनिक व्यवस्था और कानून का पालन किया जाए।
महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोप व्यक्तिगत और कानूनी प्रकृति के हैं। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष केवल सक्षम न्यायालय या जांच एजेंसियां ही दे सकती हैं। इसलिए आरोपों को तथ्य मानना उचित नहीं होगा। इसी प्रकार जिन व्यक्तियों का नाम लिया गया है, उनका पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।
मुजफ्फरनगर की यह घटना धार्मिक आस्था, व्यक्तिगत संघर्ष और सामाजिक बहस—तीनों पहलुओं को एक साथ सामने लाती है। फिलहाल पुष्टि योग्य तथ्य यही हैं कि दोनों महिलाएं कांवड़ यात्रा के दौरान शिव चौक पहुंचीं, पूजा-अर्चना की और मीडिया से बातचीत की। उनके द्वारा लगाए गए आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।