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मुलेठी के फायदे: इम्यूनिटी से लेकर गले की सेहत तक असरदार

Neelam Saini 2026-07-28 16:01:12
मुलेठी के फायदे: इम्यूनिटी से लेकर गले की सेहत तक असरदार
मुलेठी के फायदे जानिए, कैसे बन सकती है सेहत की साथी

गले की खराश से इम्यूनिटी तक, मुलेठी के चौंकाने वाले लाभ

आयुर्वेद की अनमोल जड़ी-बूटी मुलेठी, जानिए कब और कैसे करें सेवन

मुलेठी सदियों से आयुर्वेद में उपयोग की जाने वाली औषधीय जड़ी-बूटी है। यह गले, श्वसन तंत्र, पाचन और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए लाभकारी मानी जाती है। हालांकि इसका अत्यधिक सेवन कुछ लोगों में रक्तचाप बढ़ाने और शरीर में सोडियम प्रतिधारण जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है। इसलिए इसका संतुलित और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार सेवन महत्वपूर्ण है।

📍 स्थान : भारत
📰 दिनांक : 28 जुलाई 2026
✍️ नीलम सैनी

मुलेठी: आयुर्वेद की अमूल्य धरोहर

आयुर्वेद में मुलेठी को ‘यष्टिमधु’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है मीठे स्वाद वाली औषधि। हजारों वर्षों से इसका उपयोग विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं में किया जाता रहा है। आधुनिक वैज्ञानिक शोध भी इसके कई गुणों की पुष्टि करते हैं, हालांकि हर लाभ को चमत्कारिक मान लेना उचित नहीं होगा। मुलेठी की जड़ में प्राकृतिक यौगिक ग्लाइसिर्रिज़िन (Glycyrrhizin) पाया जाता है, जो इसे विशिष्ट औषधीय गुण प्रदान करता है। यही कारण है कि इसका उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ-साथ आधुनिक हर्बल उत्पादों में भी किया जाता है।

मुलेठी के पोषक और औषधीय गुण

मुलेठी में एंटीऑक्सीडेंट, सूजनरोधी और रोगाणुरोधी गुण पाए जाते हैं। इसमें कैल्शियम, पोटैशियम और कई जैव सक्रिय तत्व मौजूद होते हैं, जो शरीर की विभिन्न प्रणालियों पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मुलेठी का सबसे अधिक प्रभाव गले, श्वसन तंत्र और पाचन प्रणाली पर देखा जाता है। यही वजह है कि यह आयुर्वेदिक काढ़ों और हर्बल चाय का प्रमुख हिस्सा रही है।

इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने में सहायक

बदलते मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने लगती है। मुलेठी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में मदद कर सकते हैं। इससे इम्यून सिस्टम के बेहतर तरीके से काम करने में सहायता मिलती है। हालांकि यह कहना उचित नहीं होगा कि केवल मुलेठी का सेवन करने से बीमारियां नहीं होंगी। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम भी उतने ही आवश्यक हैं। मुलेठी को एक सहायक विकल्प के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी उपचार के विकल्प के रूप में।

गले और आवाज की सेहत के लिए लाभकारी

यदि आपकी आवाज का नियमित रूप से अधिक इस्तेमाल होता है, जैसे कि शिक्षक, एंकर, गायक या वक्ता, तो मुलेठी आपके लिए लाभकारी हो सकती है। आयुर्वेद में इसे गले की खराश और स्वर बैठने की समस्या में उपयोगी माना गया है। मुलेठी के छोटे टुकड़े को धीरे-धीरे चूसने से गले को आराम मिल सकता है। कई आयुर्वेदिक चिकित्सक मुलेठी को शहद और सितोपलादि चूर्ण के साथ लेने की सलाह देते हैं। हालांकि किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का नियमित सेवन चिकित्सकीय परामर्श के बिना नहीं करना चाहिए।

श्वसन तंत्र के लिए क्यों है महत्वपूर्ण

मुलेठी को पारंपरिक रूप से खांसी, बलगम और गले की जलन जैसी समस्याओं में प्रयोग किया जाता रहा है। इसके सूजनरोधी गुण श्वसन मार्ग की जलन को कम करने में सहायक हो सकते हैं। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में यह संकेत मिले हैं कि मुलेठी के सक्रिय तत्व श्वसन तंत्र की कोशिकाओं पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। फिर भी अस्थमा या सांस से जुड़ी गंभीर समस्याओं में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहना उचित नहीं है। ऐसी स्थितियों में विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह आवश्यक है।

पाचन स्वास्थ्य में भी निभा सकती है भूमिका

कम लोग जानते हैं कि मुलेठी का संबंध केवल गले की सेहत से नहीं है। आयुर्वेद में इसका उपयोग पाचन तंत्र की समस्याओं में भी किया जाता रहा है। सीमित शोध बताते हैं कि यह पेट की आंतरिक परत को सुरक्षा प्रदान करने में सहायक हो सकती है। पेट में जलन, एसिडिटी और अपच जैसी सामान्य समस्याओं में इसका उपयोग किया जाता है। हालांकि लगातार पेट दर्द या पाचन संबंधी गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में चिकित्सकीय जांच सबसे महत्वपूर्ण है।

क्या मुलेठी बालों के लिए भी फायदेमंद है?

पारंपरिक आयुर्वेदिक उपचारों में मुलेठी का उपयोग बालों की देखभाल के लिए भी किया जाता रहा है। इसका पेस्ट बनाकर सिर की त्वचा पर लगाने से स्कैल्प को पोषण मिलने की बात कही जाती है। हालांकि बाल झड़ने की समस्या कई कारणों से हो सकती है, जिनमें हार्मोनल असंतुलन, पोषण की कमी और तनाव भी शामिल हैं। इसलिए केवल मुलेठी को बालों की हर समस्या का समाधान मान लेना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उचित नहीं होगा।

सेवन का सही तरीका क्या है?

मुलेठी का सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है। इसे हर्बल चाय के रूप में, छोटे टुकड़ों को चूसकर या आयुर्वेदिक मिश्रणों के साथ लिया जाता है। इसकी मात्रा व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और उद्देश्य के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक अधिक मात्रा में मुलेठी का सेवन नहीं करना चाहिए। इसका संतुलित और सीमित उपयोग अधिक सुरक्षित माना जाता है।

किन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी?

मुलेठी के अनेक लाभ हैं, लेकिन यह सभी लोगों के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं होती। अधिक मात्रा में इसका सेवन कुछ मामलों में रक्तचाप बढ़ाने, शरीर में पानी और सोडियम की मात्रा बढ़ाने तथा पोटैशियम के स्तर को प्रभावित करने का कारण बन सकता है। उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों तथा गर्भवती महिलाओं को इसका नियमित सेवन करने से पहले चिकित्सकीय सलाह अवश्य लेनी चाहिए। यदि आप पहले से किसी दवा का सेवन कर रहे हैं, तो भी विशेषज्ञ से परामर्श करना बेहतर रहेगा।

भविष्य की संभावनाएं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

मुलेठी पर विश्वभर में निरंतर शोध किए जा रहे हैं। इसके सूजनरोधी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों को लेकर वैज्ञानिक समुदाय की रुचि बढ़ी है। हालांकि अभी भी कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां अधिक व्यापक और दीर्घकालिक शोध की आवश्यकता है। आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के बीच संवाद लगातार मजबूत हो रहा है। ऐसे में मुलेठी जैसी पारंपरिक औषधियों को वैज्ञानिक कसौटी पर परखना आवश्यक है, ताकि लोगों तक संतुलित और प्रमाणिक जानकारी पहुंच सके।

निष्कर्ष

मुलेठी निस्संदेह आयुर्वेद की महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियों में से एक है। यह गले की सेहत, श्वसन तंत्र, इम्यूनिटी और पाचन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकती है। लेकिन हर प्राकृतिक चीज पूरी तरह सुरक्षित हो, यह मान लेना भी उचित नहीं है। किसी भी औषधीय जड़ी-बूटी का लाभ तभी मिलता है, जब उसका सेवन सही मात्रा और उचित सलाह के साथ किया जाए। इसलिए मुलेठी को चमत्कार नहीं, बल्कि संतुलित जीवनशैली का एक सहायक प्राकृतिक विकल्प मानना अधिक वैज्ञानिक और विवेकपूर्ण दृष्टिकोण होगा।


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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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