मुलेठी पारंपरिक रूप से गले और श्वसन संबंधी समस्याओं में इस्तेमाल होती रही है। कुछ अध्ययनों में इसके संभावित लाभ सामने आए हैं, लेकिन अधिक सेवन से रक्तचाप और हृदय पर असर पड़ सकता है।
मुलेठी हमारे लिए कैसे होती है फायदेमंद? आइए जानते हैं
मुलेठी यानी लिकोरिस एक ऐसी जड़ी-बूटी है जिसका इस्तेमाल भारतीय समेत कई पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में लंबे समय से किया जाता रहा है। इसकी जड़ स्वाद में प्राकृतिक रूप से मीठी होती है और पारंपरिक तौर पर इसका इस्तेमाल खासकर गले तथा श्वसन संबंधी तकलीफों के लिए किया जाता रहा है। हालांकि, मुलेठी को लेकर प्रचलित हर स्वास्थ्य दावा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हुआ है। उपलब्ध शोध के मुताबिक कुछ विशेष इस्तेमाल में शुरुआती सकारात्मक संकेत मिले हैं, लेकिन कई स्वास्थ्य स्थितियों के लिए पर्याप्त उच्च गुणवत्ता वाले प्रमाण अभी उपलब्ध नहीं हैं।
क्या है मुलेठी?
मुलेठी एक पौधे की जड़ है, जिसे अंग्रेजी में लिकोरिस रूट कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम ग्लाइसिराइज़ा ग्लैब्रा सहित ग्लाइसिराइज़ा की कुछ अन्य प्रजातियां हैं। इसमें ग्लाइसिराइज़िन नामक प्रमुख यौगिक पाया जाता है, जो इसकी प्राकृतिक मिठास और इसके कई जैविक प्रभावों से जुड़ा माना जाता है। मुलेठी का इस्तेमाल परंपरागत रूप से खांसी, गले की तकलीफ, कुछ श्वसन संबंधी समस्याओं और पाचन से जुड़ी शिकायतों में किया जाता रहा है। हालांकि पारंपरिक इस्तेमाल और वैज्ञानिक रूप से सिद्ध उपचार के बीच अंतर समझना जरूरी है।
गले के लिए उपयोगी हो सकती है मुलेठी
मुलेठी का सबसे प्रचलित पारंपरिक इस्तेमाल गले से जुड़ी परेशानी में किया जाता है। उपलब्ध शोध में मुलेठी से बने गरारे या कुछ विशेष उत्पादों के इस्तेमाल से गले के दर्द जैसी स्थितियों में संभावित लाभ के संकेत मिले हैं। सर्जरी के दौरान सांस की नली डालने के बाद होने वाले गले के दर्द को कम करने के संदर्भ में भी कुछ शोध हुए हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर तरह के गले के संक्रमण या दर्द का इलाज मुलेठी से किया जा सकता है। लगातार गले में दर्द, तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या निगलने में कठिनाई होने पर चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
मुंह के छालों में भी हो सकता है संभावित लाभ
कुछ अध्ययनों में मुलेठी से बने गरारे या स्थानीय रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पादों को बार-बार होने वाले मुंह के छालों के आकार और दर्द को कम करने में संभावित रूप से मददगार पाया गया है। लेकिन इन परिणामों को व्यापक उपचार की सिफारिश मानने से पहले और शोध की जरूरत है।
पाचन संबंधी समस्याओं में क्या भूमिका है?
मुलेठी का इस्तेमाल पारंपरिक चिकित्सा में पाचन से जुड़ी विभिन्न शिकायतों के लिए किया जाता रहा है। हालांकि वैज्ञानिक प्रमाण इस मामले में स्पष्ट नहीं हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार केवल मुलेठी से बने उत्पादों का पाचन संबंधी लक्षणों पर कितना प्रभाव पड़ता है, यह अभी निश्चित रूप से स्पष्ट नहीं है। इसलिए पेट की किसी बीमारी का इलाज डॉक्टर की सलाह के बजाय केवल मुलेठी के सहारे करना उचित नहीं माना जाना चाहिए।
त्वचा के लिए भी हो रही है रिसर्च
मुलेठी के कुछ बाहरी इस्तेमाल पर भी अध्ययन हुए हैं। शुरुआती शोध में मुलेठी युक्त कुछ स्थानीय उत्पादों से एक्जिमा जैसे त्वचा संबंधी लक्षणों या जलने के बाद त्वचा की रिकवरी में संभावित लाभ के संकेत मिले हैं। हालांकि इस संबंध में भी अधिक शोध की आवश्यकता है।
इसका अर्थ यह नहीं कि घर पर मुलेठी का कोई भी लेप त्वचा पर सुरक्षित या प्रभावी होगा। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में जलन भी हो सकती है।
मुलेठी का सेवन हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं
मुलेठी को प्राकृतिक जड़ी-बूटी समझकर अत्यधिक मात्रा में या लंबे समय तक लेना नुकसानदायक हो सकता है। इसमें मौजूद ग्लाइसिराइज़िन शरीर में सोडियम और पोटैशियम के संतुलन तथा रक्तचाप को प्रभावित कर सकता है। अधिक मात्रा या लंबे समय तक सेवन से उच्च रक्तचाप, पोटैशियम की कमी, अनियमित धड़कन और गंभीर मामलों में हृदय संबंधी समस्या का जोखिम बढ़ सकता है।
विशेष रूप से उच्च रक्तचाप, हृदय या किडनी की बीमारी से जूझ रहे लोगों को मुलेठी का सेवन बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए।
गर्भावस्था में विशेष सावधानी जरूरी
गर्भवती महिलाओं के लिए अधिक मात्रा में मुलेठी का सेवन सुरक्षित नहीं माना जाता। राष्ट्रीय पूरक एवं समेकित स्वास्थ्य केंद्र के अनुसार बड़ी मात्रा में मौखिक मुलेठी का सेवन गर्भावस्था में जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए गर्भावस्था या स्तनपान के दौरान मुलेठी या इसके सप्लीमेंट लेने से पहले चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।
दवाएं लेने वाले लोग भी रहें सावधान
मुलेठी कुछ दवाओं के साथ परस्पर प्रभाव डाल सकती है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से रक्तचाप, हृदय या अन्य बीमारी की दवाएं ले रहा है, तो मुलेठी का औषधीय मात्रा में इस्तेमाल शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना चाहिए।
क्या मुलेठी को बीमारी का इलाज माना जा सकता है?
नहीं। मुलेठी के पारंपरिक इस्तेमाल और वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित चिकित्सा उपचार में फर्क करना जरूरी है। उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण कई स्वास्थ्य स्थितियों के लिए अभी पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए इसे किसी बीमारी की निर्धारित दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
निष्कर्ष
मुलेठी एक पारंपरिक जड़ी-बूटी है, जिसका इस्तेमाल खासकर गले और कुछ अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों में लंबे समय से होता आया है। शोध में इसके कुछ संभावित लाभ सामने आए हैं, लेकिन इसके प्रभावों को लेकर अभी और उच्च गुणवत्ता वाले अध्ययन जरूरी हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्राकृतिक होने का अर्थ हमेशा पूरी तरह सुरक्षित होना नहीं है। इसलिए मुलेठी का सेवन सीमित और उचित तरीके से करना चाहिए। उच्च रक्तचाप, हृदय या किडनी की समस्या वाले लोगों, गर्भवती महिलाओं और नियमित दवा लेने वालों को इसके औषधीय इस्तेमाल से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूर लेनी चाहिए।