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मुजफ्फरनगर गोकशी केस: तीन दोषियों को 10-10 साल की सजा, ₹5-5 लाख जुर्माना

Wasi Siddiqui • 2026-07-18 17:09:28
मुजफ्फरनगर गोकशी केस: तीन दोषियों को 10-10 साल की सजा, ₹5-5 लाख जुर्माना

मुजफ्फरनगर की एडीजे एफटीसी-3 अदालत ने वर्ष 2021 के गोकशी मामले में तीन आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष की कठोर कारावास और ₹5-5 लाख जुर्माने की सजा सुनाई। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि इस प्रकार के अपराध सामाजिक सौहार्द और भाईचारे को प्रभावित करते हैं तथा ऐसे मामलों में कानून का सख्त संदेश आवश्यक है।





📍 मुजफ्फरनगर

📰 18 जुलाई 2026

✍️ Wasi Siddiqui


## गोकशी केस में आया बड़ा फैसला


मुजफ्फरनगर की एडीजे एफटीसी-3 अदालत ने वर्ष 2021 के चर्चित गोकशी प्रकरण में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को दोषी करार दिया है। अदालत ने मुनसाद, अबूजर और आस मोहम्मद को दस-दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर पांच-पांच लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। यह फैसला गोकशी से जुड़े मामलों में न्यायिक सख्ती का एक अहम उदाहरण माना जा रहा है।


क्या था पूरा मामला


अभियोजन के अनुसार 24 जनवरी 2021 की रात थाना तितावी क्षेत्र के ग्राम बुडिना खुर्द में पुलिस को सूचना मिली थी कि एक मकान के भीतर अवैध रूप से गोकशी की जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तत्काल छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान मौके से कथित रूप से गोमांस तथा गोकशी में प्रयुक्त उपकरण बरामद किए गए। पुलिस ने तीनों आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया था।


बरामद मांस को नियमानुसार गड्ढा खुदवाकर दफनाया गया और वैज्ञानिक परीक्षण सहित अन्य कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।


अभियोजन ने कैसे साबित किया मामला


सहायक शासकीय अधिवक्ता कुलदीप सिंह के अनुसार सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने चार महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की। इनके अलावा वैज्ञानिक साक्ष्य और पुलिस विवेचना को भी रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया गया।


न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों की गवाही और रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी माना तथा सजा सुनाई।


न्यायालय की महत्वपूर्ण टिप्पणी


फैसला सुनाते समय न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि इस प्रकार के अपराध केवल कानून का उल्लंघन नहीं हैं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों के बीच लंबे समय से चले आ रहे भाईचारे, आपसी विश्वास और सामाजिक सौहार्द को भी प्रभावित करते हैं।


अदालत ने यह भी कहा कि समाज में शांति और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में कानून के अनुरूप प्रभावी और सख्त संदेश दिया जाना आवश्यक है। यह टिप्पणी न्यायालय के आदेश का हिस्सा है और मामले की संवेदनशीलता को दर्शाती है।


कानून और सामाजिक दृष्टिकोण


उत्तर प्रदेश में गोवध निषेध संबंधी कानूनों के तहत ऐसे मामलों में कठोर दंड का प्रावधान है। समय-समय पर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन अवैध गोकशी के विरुद्ध विशेष अभियान भी चलाते रहे हैं।


हालांकि न्यायिक प्रक्रिया में प्रत्येक मामले का निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और कानूनी परीक्षण के आधार पर ही किया जाता है। इसलिए किसी भी फैसले को उसके तथ्यों और न्यायालय के रिकॉर्ड के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।


सामाजिक सौहार्द का संदेश


न्यायालय की टिप्पणी इस बात पर भी बल देती है कि धार्मिक और सामाजिक रूप से संवेदनशील मामलों में कानून का पालन और प्रशासनिक सतर्कता अत्यंत आवश्यक है। ऐसे मामलों में अफवाहों, भड़काऊ बयानों और बिना पुष्टि की गई सूचनाओं से बचना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है।


विशेषज्ञों का मानना है कि कानून का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं बल्कि समाज में शांति, विश्वास और विधि के शासन को मजबूत करना भी है।


आगे क्या होगा


दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील करने का वैधानिक अधिकार उपलब्ध है। यदि अपील दायर की जाती है तो उच्च न्यायालय मामले के साक्ष्यों और कानूनी पहलुओं की स्वतंत्र समीक्षा करेगा। तब तक निचली अदालत का निर्णय प्रभावी रहेगा, जब तक सक्षम न्यायालय द्वारा कोई अन्य आदेश पारित नहीं किया जाता।

संपदकिया दृष्टिकॉन

✍️ Wasi Siddiqui



मुजफ्फरनगर गोकशी केस में आया यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया के उस सिद्धांत को रेखांकित करता है कि गंभीर अपराधों का निर्णय साक्ष्यों और कानून के आधार पर किया जाता है। अदालत ने जहां दोषियों को कठोर सजा सुनाई, वहीं अपने आदेश में सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की रक्षा को भी महत्वपूर्ण बताया। यह निर्णय कानून के शासन, निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया और सामाजिक शांति—तीनों के महत्व को एक साथ सामने लाता है।

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Wasi Siddiqui

Wasi Siddiqui

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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