मणिपुर के कालेनजांग गांव में शनिवार को हुई गोलीबारी में दो नागा नागरिकों की मौत के बाद रविवार तड़के एक घायल ने भी दम तोड़ दिया। मृतकों की संख्या तीन हो गई। एक अन्य घायल का इलाज जारी है। घटना यूएनसी की आर्थिक नाकेबंदी स्थगित करने की घोषणा के कुछ घंटे बाद हुई।
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📍 Imphal, Manipur | 📰 27 September 2026 | ✍️ Apurva Choudhary
मणिपुर में फिर गोलीबारी, तीन नागा नागरिकों की मौत
मणिपुर में नागा नागरिकों को निशाना बनाकर की गई एक और गोलीबारी की घटना में मृतकों की संख्या तीन हो गई है। सेनापति पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र से जुड़े कालेनजांग गांव में शनिवार दोपहर हुई फायरिंग में दो लोगों की मौके पर मौत हुई थी, जबकि दो अन्य घायल हुए थे। रविवार तड़के इलाज के दौरान 49 वर्षीय आशिहो सानी की मौत हो गई। एक अन्य घायल का इलाज जारी है।
पुलिस और स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक घटना शनिवार दोपहर करीब तीन बजे हुई। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि सशस्त्र हमलावरों ने गांव के मुखिया के घर में मौजूद लोगों पर गोलीबारी की। मृतकों की पहचान रॉकी माओ और कुमार पोउमई के रूप में हुई है। दोनों नागा समुदाय से थे।
घायल आशिहो सानी और 33 वर्षीय अदानी मैनियो को गोली लगने के बाद सेनापति के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। रविवार सुबह करीब तीन बजे आशिहो सानी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए सेनापति जिला अस्पताल ले जाया गया। अदानी मैनियो का इलाज जारी है।
कालेनजांग की लोकेशन को लेकर रिपोर्टों में अंतर
इस घटना के स्थान को लेकर शुरुआती रिपोर्टिंग में कुछ अंतर सामने आया है। कई रिपोर्टों ने कालेनजांग को सेनापति जिले के आसपास या सेनापति क्षेत्र से जोड़ा है, जबकि अन्य रिपोर्टों के अनुसार गांव प्रशासनिक रूप से कांगपोकपी जिले में आता है और सेनापति पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में है।
इसी वजह से खबर में केवल “सेनापति जिला” लिखने के बजाय यह स्पष्ट करना जरूरी है कि घटना कालेनजांग गांव में हुई और पुलिस कार्रवाई सेनापति पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में की जा रही है। यह भौगोलिक अंतर घटना की रिपोर्टिंग को अधिक सटीक बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।
हमलावरों की पहचान अब तक स्पष्ट नहीं
गोलीबारी के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है। शुरुआती रिपोर्टों में हमलावरों को अज्ञात सशस्त्र लोगों या संदिग्ध उग्रवादियों के तौर पर बताया गया है। कुछ स्थानीय संगठनों और स्रोतों ने विशेष सशस्त्र समूहों की कथित भूमिका का आरोप लगाया है, लेकिन इस घटना में किसी संगठन की जिम्मेदारी की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
स्थानीय रिपोर्टों में अलग-अलग संगठनों के नाम सामने आए हैं, लेकिन इन दावों को आधिकारिक जांच के निष्कर्ष के रूप में पेश करना जल्दबाजी होगी। पुलिस ने घटना की परिस्थितियों, हमलावरों की पहचान और गोलीबारी के पीछे के मकसद को लेकर जांच शुरू की है।
यह अंतर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मणिपुर के पहाड़ी इलाकों में हाल के महीनों में अलग-अलग समुदायों के बीच हिंसा और सशस्त्र समूहों की गतिविधियों से जुड़ी कई घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे माहौल में किसी संगठन की जिम्मेदारी की पुष्टि से पहले आरोप और तथ्य को अलग रखना जरूरी है।
दो दिन पहले चार नागा नागरिकों की हत्या
कालेनजांग की घटना से पहले 24 सितंबर को मणिपुर के कामजोंग जिले के पिलोंग गांव में चार तांगखुल नागा नागरिकों की हत्या की गई थी। पुलिस ने शुरुआती जानकारी में हमलावरों को म्यांमार-आधारित संदिग्ध उग्रवादी समूह से जुड़ा बताया था और कूकी नेशनल आर्मी-बर्मा यानी केएनए-बी का नाम रिपोर्टों में सामने आया था।
पिलोंग गांव भारत-म्यांमार सीमा के करीब स्थित है। इस हमले में चार नागरिकों की मौत के बाद नागा संगठनों की ओर से विरोध और बंद का आह्वान भी किया गया था। कुछ स्थानीय संगठनों ने हमले के लिए केएनए-बी को जिम्मेदार बताया, हालांकि संबंधित दावे और जिम्मेदारी का स्वतंत्र सत्यापन अलग-अलग रिपोर्टों में सीमित रहा है।
दो दिनों के भीतर नागा नागरिकों से जुड़ी दो गंभीर गोलीबारी की घटनाओं ने राज्य के पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
आर्थिक नाकेबंदी स्थगित करने के कुछ घंटे बाद हमला
कालेनजांग में गोलीबारी का समय भी घटनाक्रम को महत्वपूर्ण बनाता है। United Naga Council यानी यूएनसी ने 26 सितंबर को केंद्र, मणिपुर सरकार और नागा प्रतिनिधियों के बीच गुवाहाटी में हुई त्रिपक्षीय बातचीत के बाद राज्य के राष्ट्रीय राजमार्गों पर चल रही आर्थिक नाकेबंदी को शाम छह बजे से स्थगित करने की घोषणा की थी।
यूएनसी की यह नाकेबंदी कई महीनों से जारी थी और इसका असर मणिपुर में आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही और परिवहन पर पड़ा था। त्रिपक्षीय बैठक में कानून-व्यवस्था और शांति निर्माण से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई थी।
कालेनजांग में हमला नाकेबंदी स्थगित किए जाने की घोषणा के कुछ घंटे पहले हुआ। PTI की रिपोर्टिंग के अनुसार, गोलीबारी और यूएनसी के फैसले के बीच समय का अंतर करीब एक घंटे का था।
हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए नाकेबंदी के फैसले और गोलीबारी को एक-दूसरे का कारण बताना फिलहाल उचित नहीं होगा।
मुख्यमंत्री ने घटना की निंदा की
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने दो नागा नागरिकों की हत्या और दो लोगों के घायल होने की घटना की निंदा की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने इसे निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा बताते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
घटना के समय मुख्यमंत्री मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्र के दौरे पर थे। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, वह माराम में एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद लौटे थे, जब कालेनजांग में गोलीबारी की खबर सामने आई।
मुख्यमंत्री की ओर से घटना की निंदा के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चिंता सामने आई है। हालांकि, हमले में शामिल लोगों की पहचान और उनके संगठन की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
मणिपुर में सितंबर में लगातार हिंसा
कालेनजांग और पिलोंग की घटनाएं ऐसे समय हुई हैं जब सितंबर में मणिपुर के कई पहाड़ी जिलों में अलग-अलग गोलीबारी की घटनाएं रिपोर्ट हुई हैं। PTI और अन्य रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर में तमेंगलोंग, कांगपोकपी, नोनी और कामजोंग जिलों में अलग-अलग हमलों में कई लोगों की मौत हुई है।
हाल की घटनाओं में अलग-अलग समुदायों के नागरिक प्रभावित हुए हैं। मणिपुर में मई 2023 से शुरू हुए व्यापक जातीय संघर्ष के बाद राज्य में सुरक्षा बलों की बड़ी तैनाती के बावजूद समय-समय पर हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं।
मौजूदा घटनाओं में स्थानीय संगठनों के आरोप, पुलिस की शुरुआती जानकारी और आधिकारिक जांच के निष्कर्षों के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। किसी भी समुदाय या संगठन को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराने से पहले जांच से सामने आने वाले प्रमाण महत्वपूर्ण होंगे।
सुरक्षा और जांच पर निगाह
कालेनजांग में गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों और पुलिस की गतिविधियां बढ़ाई गई हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है और घटना से जुड़े लोगों की पहचान तथा हमले के कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
फिलहाल एक घायल व्यक्ति अस्पताल में उपचाराधीन है। तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। मृतकों के पोस्टमार्टम और पुलिस जांच के बाद घटना की परिस्थितियों के बारे में और जानकारी सामने आने की संभावना है।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब यह है कि हमला किसने किया, हमलावर किस रास्ते से पहुंचे और उनके पीछे कौन सा संगठन या नेटवर्क था। इन सवालों का जवाब जांच के आधिकारिक निष्कर्ष आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
नाकेबंदी स्थगित, लेकिन सुरक्षा चुनौती कायम
यूएनसी की आर्थिक नाकेबंदी स्थगित करने की घोषणा से मणिपुर में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में बातचीत का एक रास्ता खुला है। केंद्र, राज्य सरकार और नागा प्रतिनिधियों के बीच बातचीत में कानून-व्यवस्था और शांति निर्माण के मुद्दों पर चर्चा हुई थी।
लेकिन इसके तुरंत बाद हुई कालेनजांग की गोलीबारी ने यह भी दिखाया कि राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बातचीत के साथ जमीनी सुरक्षा चुनौती अभी बनी हुई है। दो दिनों के भीतर सात नागा नागरिकों की मौत से जुड़े घटनाक्रम ने पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं।
फिलहाल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के सामने प्राथमिकता हमले में शामिल लोगों की पहचान, घायल व्यक्ति को उपचार उपलब्ध कराना और संवेदनशील इलाकों में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। घटना के पीछे की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।