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नालंदा विश्वविद्यालय को किसने जलाया था? जानिए पूरा इतिहास और विवाद

Neelam Saini • 2026-08-06 15:55:31
नालंदा विश्वविद्यालय को किसने जलाया था? जानिए पूरा इतिहास और विवाद
नालंदा विश्वविद्यालय को किसने जलाया? इतिहास क्या कहता है

नालंदा के विनाश की कहानी, क्या सिर्फ बख्तियार खिलजी ही जिम्मेदार था?

नालंदा विश्वविद्यालय का अंत कैसे हुआ? इतिहास और विवाद की पूरी पड़ताल

नालंदा विश्वविद्यालय प्राचीन भारत का विश्वविख्यात शिक्षा केंद्र था। इसके विनाश को सामान्यतः 12वीं शताब्दी के अंत में बख्तियार खिलजी के आक्रमण से जोड़ा जाता है, लेकिन इस विषय पर इतिहासकारों में मतभेद भी मौजूद हैं। उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों के आधार पर यह विषय आज भी शोध और बहस का हिस्सा बना हुआ है। 

📍 नालंदा (बिहार)
📰 06 अगस्त 2026
✍️ Neelam Saini

नालंदा विश्वविद्यालय को किसने जलाया था? जानिए पूरा इतिहास

ज्ञान का सबसे बड़ा केंद्र, जिसकी गूंज पूरी दुनिया में थी

नालंदा विश्वविद्यालय केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित प्राचीन शिक्षण संस्थान माना जाता था। पांचवीं शताब्दी में स्थापित इस विश्वविद्यालय में भारत, चीन, तिब्बत, कोरिया, जापान और दक्षिण-पूर्व एशिया से हजारों विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त करने आते थे। यहां दर्शन, चिकित्सा, गणित, ज्योतिष, व्याकरण और बौद्ध अध्ययन सहित अनेक विषय पढ़ाए जाते थे। आज भी जब नालंदा का नाम लिया जाता है तो सबसे बड़ा प्रश्न यही उठता है कि आखिर इस महान विश्वविद्यालय को किसने नष्ट किया?

क्या बख्तियार खिलजी ने नालंदा को जलाया था?

लोकप्रिय ऐतिहासिक धारणा यह है कि वर्ष 1193 ईस्वी के आसपास तुर्क सेनापति इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी ने बिहार पर आक्रमण के दौरान नालंदा विश्वविद्यालय को नष्ट कर दिया। कई आधुनिक इतिहासकार इसी मत को स्वीकार करते हैं। तिब्बती परंपराओं तथा बाद के फ़ारसी इतिहासकार मिनहाज-ए-सिराज की रचनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष व्यापक रूप से सामने आया है। कहा जाता है कि इस आक्रमण में विश्वविद्यालय के विशाल पुस्तकालय को आग लगा दी गई और बड़ी संख्या में भिक्षुओं की हत्या हुई या वे पलायन कर गए।

लेकिन क्या इतिहास पूरी तरह स्पष्ट है?

यहीं से इतिहास में विवाद शुरू होता है।

कुछ इतिहासकारों का कहना है कि उपलब्ध प्राथमिक स्रोतों में “नालंदा” का प्रत्यक्ष उल्लेख सीमित है। कुछ स्रोतों में बिहार के बौद्ध महाविहारों पर हमले का वर्णन मिलता है, जबकि यह स्पष्ट नहीं है कि हर विवरण सीधे नालंदा से संबंधित है। इसी कारण कुछ विद्वान मानते हैं कि नालंदा के विनाश की कहानी समय के साथ विभिन्न स्रोतों से जुड़कर अधिक प्रचलित हुई। 

पुरातात्विक साक्ष्य क्या कहते हैं?

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की खुदाइयों में नालंदा परिसर में आग लगने के प्रमाण मिले हैं। राख की परतें इस बात की पुष्टि करती हैं कि परिसर में बड़े पैमाने पर आग लगी थी। हालांकि यह आग एक ही हमले में लगी या अलग-अलग घटनाओं का परिणाम थी, इस पर इतिहासकारों की राय एक जैसी नहीं है। 

क्या नालंदा पहले से कमजोर हो चुका था?

कई शोध यह भी बताते हैं कि नालंदा का पतन केवल किसी एक आक्रमण का परिणाम नहीं था। 12वीं शताब्दी तक पाल शासकों का संरक्षण समाप्त हो चुका था। आर्थिक सहायता घट रही थी और बौद्ध संस्थानों की राजनीतिक स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रही थी। ऐसे में विश्वविद्यालय पहले से ही कमजोर पड़ चुका था। बाद के सैन्य आक्रमणों ने उसके अंतिम पतन को तेज कर दिया। 

इतिहासकारों की अलग-अलग राय

एक पक्ष मानता है कि बख्तियार खिलजी के आक्रमण ने नालंदा को अंतिम और सबसे बड़ा नुकसान पहुंचाया। दूसरा पक्ष यह कहता है कि केवल एक व्यक्ति या एक घटना को जिम्मेदार ठहराना इतिहास को अत्यधिक सरल बना देना होगा। उनके अनुसार राजनीतिक संरक्षण का समाप्त होना, आर्थिक गिरावट और लगातार संघर्ष भी इसके पतन के महत्वपूर्ण कारण थे। 

नालंदा का महत्व आज भी क्यों बना हुआ है?

नालंदा केवल एक विश्वविद्यालय नहीं था बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा, बौद्ध दर्शन और अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक संवाद का प्रतीक था। इसकी विरासत आज भी विश्वभर के शोधकर्ताओं को आकर्षित करती है। यूनेस्को द्वारा नालंदा महाविहार के अवशेषों को विश्व धरोहर का दर्जा दिए जाने से इसका वैश्विक महत्व और बढ़ गया। 

निष्कर्ष

नालंदा विश्वविद्यालय के विनाश को लेकर सबसे व्यापक रूप से स्वीकार किया जाने वाला मत यह है कि 12वीं शताब्दी के अंत में बख्तियार खिलजी के सैन्य अभियान के दौरान इसे गंभीर क्षति पहुंची। हालांकि उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों की सीमाओं और विभिन्न व्याख्याओं के कारण कुछ पहलुओं पर विद्वानों में मतभेद अब भी मौजूद हैं। इसलिए इस विषय को एक निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण से समझना आवश्यक है

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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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