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NCR परिवर्तन योजना: पुराने ट्रक-बस स्क्रैप करने पर 10 साल तक 100% टैक्स छूट

Wasi Siddiqui • 2026-07-10 14:02:58
NCR परिवर्तन योजना: पुराने ट्रक-बस स्क्रैप करने पर 10 साल तक 100% टैक्स छूट
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 'परिवर्तन योजना' लागू की है। योजना के तहत पुराने ट्रक और बसों को हटाकर आधुनिक BS-VI, CNG और इलेक्ट्रिक कमर्शियल वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे प्रदूषण घटाने के साथ परिवहन क्षेत्र के आधुनिकीकरण और ऑपरेटिंग कॉस्ट कम होने की उम्मीद है।

📍 : मुजफ्फरनगर / राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR)
📰 : 10 जुलाई 2026
✍️ : Wasi Siddiqui

NCR परिवर्तन योजना: प्रदूषण नियंत्रण की नई स्ट्रैटेजी या ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए आर्थिक अवसर?

परिवर्तन योजना का मकसद क्या है

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र लंबे समय से देश के सबसे प्रदूषित इलाकों में शामिल रहा है। वायु गुणवत्ता में लगातार गिरावट के पीछे पुराने डीजल कमर्शियल वाहनों की बड़ी भूमिका मानी जाती रही है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 'परिवर्तन योजना' लागू की है। इसका उद्देश्य केवल पुराने ट्रक और बसों को हटाना नहीं बल्कि पूरे कमर्शियल ट्रांसपोर्ट सेक्टर को स्वच्छ और आधुनिक तकनीक की ओर ले जाना है।

योजना का दायरा केवल ट्रक और बसों तक सीमित रखा गया है। निजी कार, टैक्सी, ऑटो या अन्य वाहन इस स्कीम के दायरे में शामिल नहीं हैं। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार फिलहाल सबसे अधिक प्रदूषण फैलाने वाले भारी वाहनों पर फोकस कर रही है।

किन वाहनों को मिलेगा लाभ

योजना केवल एनसीआर में पंजीकृत BS-I, BS-II, BS-III और BS-IV मानक वाले ट्रक एवं बसों पर लागू होगी।

BS-III और उससे पुराने वाहनों को अधिकृत Registered Vehicle Scrapping Facility (RVSF) में स्क्रैप कराना अनिवार्य होगा। वहीं BS-IV वाहनों के लिए दो विकल्प रखे गए हैं। वाहन स्वामी चाहे तो स्क्रैप करा सकता है या उसे गैर-एनसीआर क्षेत्र में बेच सकता है।

यही प्रावधान इस योजना को अपेक्षाकृत लचीला बनाता है क्योंकि सभी वाहन मालिक एक जैसी आर्थिक स्थिति में नहीं होते।

आर्थिक राहत कितनी बड़ी है

यदि पात्र वाहन मालिक अपना पुराना ट्रक या बस स्क्रैप कर नया BS-VI, CNG या इलेक्ट्रिक वाहन खरीदता है तो उसे 10 वर्षों तक 100 प्रतिशत मोटर वाहन कर में छूट मिलेगी।

इसके अलावा पंजीकरण शुल्क पूरी तरह माफ रहेगा। यदि पुराने वाहन पर मोटर वाहन कर या शास्ति का बकाया है तो Certificate of Deposit (CoD) के आधार पर उसे भी माफ किया जा सकेगा।

सरकार का उद्देश्य केवल वाहन बदलवाना नहीं बल्कि शुरुआती निवेश का बोझ भी कम करना है ताकि अधिक से अधिक ऑपरेटर इस योजना में शामिल हो सकें।

BS-IV वाहनों के लिए अलग विकल्प

सरकार ने BS-IV वाहन मालिकों को अतिरिक्त विकल्प दिया है। यदि वे अपना वाहन गैर-एनसीआर क्षेत्र में बेचते हैं और नया BS-VI, CNG या इलेक्ट्रिक वाहन खरीदते हैं तो उन्हें 10 वर्षों तक 50 प्रतिशत मोटर वाहन कर में छूट मिलेगी।

यह प्रावधान उन ऑपरेटरों के लिए उपयोगी माना जा रहा है जिनके वाहन अभी तकनीकी रूप से उपयोग योग्य हैं लेकिन एनसीआर के प्रदूषण मानकों के अनुरूप नहीं हैं।

क्या केवल टैक्स छूट से बदलाव आएगा

योजना में वाहन निर्माता कंपनियों द्वारा लगभग 8 प्रतिशत तक Upfront Discount देने का भी प्रावधान रखा गया है।

साथ ही नए डीजल और CNG ट्रकों तथा बसों पर पांच वर्षों तक ब्याज अनुदान और मासिक ईंधन वाउचर जैसी सुविधाओं का उल्लेख किया गया है।

हालांकि इन प्रोत्साहनों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि उनकी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और व्यावहारिक बनाई जाती है।

पर्यावरण पर संभावित असर

विशेषज्ञ लंबे समय से मानते रहे हैं कि पुराने डीजल ट्रक और बसें पार्टिकुलेट मैटर तथा नाइट्रोजन ऑक्साइड के बड़े स्रोत हैं।

यदि बड़ी संख्या में पुराने वाहन हटते हैं तो एनसीआर में प्रदूषण स्तर कम करने की दिशा में सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। हालांकि केवल वाहन बदलने से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होगी।

निर्माण गतिविधियां, सड़क की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और कृषि अवशेष जलाना भी प्रदूषण के बड़े कारण बने हुए हैं। इसलिए यह योजना व्यापक समाधान का केवल एक हिस्सा मानी जा सकती है।

ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री के सामने चुनौतियां

कमर्शियल वाहन खरीदना आज भी करोड़ों रुपये तक का निवेश हो सकता है।

कई छोटे ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों के लिए बैंक फाइनेंस, डाउन पेमेंट और बढ़ती परिचालन लागत बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में टैक्स छूट आकर्षक जरूर है लेकिन सभी ऑपरेटर इसका लाभ उठा पाएंगे, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी।

यदि फाइनेंसिंग आसान नहीं हुई तो छोटे परिवहन कारोबारी योजना से बाहर भी रह सकते हैं।

स्क्रैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर कितना तैयार है

योजना की सफलता काफी हद तक Registered Vehicle Scrapping Facility की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।

यदि अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर पर्याप्त संख्या में नहीं होंगे तो वाहन मालिकों को लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। इससे समय और लागत दोनों बढ़ेंगे।

नीति का वास्तविक असर केवल घोषणा से नहीं बल्कि उसके प्रभावी क्रियान्वयन से तय होगा।

नीति का व्यापक नज़रिया

दुनिया के कई देशों में पुराने और अधिक प्रदूषणकारी वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की नीति अपनाई गई है।

भारत भी धीरे-धीरे उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह योजना जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा और सतत परिवहन की राष्ट्रीय नीति से भी जुड़ती है।

हालांकि किसी भी सार्वजनिक नीति की सफलता उसके निष्पक्ष क्रियान्वयन, पारदर्शिता और लाभार्थियों की वास्तविक भागीदारी पर निर्भर करती है।

आगे क्या होगा

सरकार के अनुसार अधिसूचना जारी होने के बाद पात्र वाहन मालिकों को दो वर्षों के भीतर योजना का लाभ लेना होगा।

यह समय सीमा संकेत देती है कि सरकार पुराने कमर्शियल वाहनों को अपेक्षाकृत तेजी से सड़क से हटाना चाहती है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितने वाहन वास्तव में स्क्रैप होते हैं और कितने नए स्वच्छ वाहन एनसीआर की सड़कों पर उतरते हैं।



NCR परिवर्तन योजना केवल टैक्स छूट देने वाली योजना नहीं बल्कि भारत के कमर्शियल ट्रांसपोर्ट सेक्टर को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की एक व्यापक स्ट्रैटेजी है। इसके सफल होने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन के साथ आसान फाइनेंसिंग, पर्याप्त स्क्रैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और पारदर्शी क्रियान्वयन समान रूप से आवश्यक होंगे। यदि नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इसका असर केवल परिवहन उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एनसीआर की हवा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और भविष्य की ग्रीन इकोनॉमी पर भी दिखाई दे सकता है।

वीडियो देखें

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Wasi Siddiqui

Wasi Siddiqui

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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