जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर आंदोलन तेज़ करने का संकेत दिया है। जम्मू में आयोजित एक बड़ी जनसभा में उन्होंने 20 जुलाई से संसद के मॉनसून सत्र के दौरान 'दिल्ली चलो' अभियान शुरू करने की घोषणा की। उनका कहना है कि लंबे समय से किए जा रहे इंतज़ार के बाद अब जनता की आवाज़ राष्ट्रीय राजधानी तक पहुंचाई जाएगी।
📍 Location: जम्मू
🗓️ Date: 12 जुलाई 2026
✍️ Apurva Choudhary | Shah Times
राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग ने पकड़ी रफ़्तार
जम्मू-कश्मीर की राजनीति में राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू में आयोजित एक विशाल जनसभा के दौरान घोषणा की कि उनकी पार्टी संसद के आगामी मॉनसून सत्र के दौरान 'दिल्ली चलो' अभियान शुरू करेगी। इस अभियान का उद्देश्य केंद्र सरकार से राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को और मुखर बनाना है।
उमर अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले कई महीनों से संयम बनाए रखने के बावजूद राज्य का दर्जा बहाल करने की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। उनके अनुसार अब जनता की अपेक्षाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने का समय आ गया है।
रैली से दिया राजनीतिक संदेश
जम्मू के महाराजा हरि सिंह पार्क में आयोजित जनसभा में बड़ी संख्या में समर्थकों की मौजूदगी रही। अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू और कश्मीर दोनों क्षेत्रों के लोग राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग पर एकजुट दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने इसे जनता की सामूहिक इच्छा और लोकतांत्रिक भावना का प्रतीक बताया।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वह श्रीनगर से जम्मू तक का दौरा केवल इसलिए करके आए हैं ताकि दिल्ली में प्रस्तावित अभियान से पहले लोगों का समर्थन और विश्वास प्राप्त किया जा सके। उनके अनुसार यह आंदोलन किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के अधिकारों से जुड़ा व्यापक जनहित का मुद्दा है।
केंद्र के आश्वासनों पर उठाए सवाल
अपने संबोधन में उमर अब्दुल्ला ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर केंद्र सरकार की ओर से कई बार आश्वासन दिए गए, लेकिन अब तक स्पष्ट समय-सीमा सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि जनता लंबे समय से इस फैसले का इंतज़ार कर रही है और अब इस विषय पर ठोस प्रगति की अपेक्षा कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि निर्वाचित सरकार को सीमित प्रशासनिक अधिकारों के साथ ही कार्य करना पड़े, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी प्रश्न उठते हैं।
राज्य का दर्जा क्यों बना है प्रमुख राजनीतिक मुद्दा?
जम्मू-कश्मीर को वर्ष 2019 में पुनर्गठन के बाद दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर और लद्दाख—में विभाजित किया गया था। इसके बाद से राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा लगातार राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना हुआ है। विभिन्न राजनीतिक दलों का मानना है कि पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने से निर्वाचित सरकार को प्रशासनिक और नीतिगत फैसलों में अधिक अधिकार प्राप्त होंगे।
नेशनल कॉन्फ्रेंस लंबे समय से इस मुद्दे को अपनी प्राथमिक राजनीतिक मांग बताती रही है। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने और जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए राज्य का दर्जा बहाल होना आवश्यक है।
'दिल्ली चलो' अभियान का उद्देश्य
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घोषणा की कि संसद के मॉनसून सत्र के दौरान पार्टी दिल्ली में व्यापक स्तर पर अपनी मांग रखेगी। उनके अनुसार यह अभियान केंद्र सरकार का ध्यान राज्य के दर्जे के मुद्दे की ओर आकर्षित करने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि जम्मू और कश्मीर दोनों क्षेत्रों से मिल रहे जनसमर्थन ने पार्टी को आगे बढ़ने का विश्वास दिया है। मुख्यमंत्री ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग बताते हुए कहा कि जनता की आवाज़ को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना आवश्यक है।
केंद्र और विपक्ष के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण
राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर राजनीतिक दलों की राय अलग-अलग रही है। नेशनल कॉन्फ्रेंस और अन्य क्षेत्रीय दल जल्द बहाली की मांग कर रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार पहले भी यह कह चुकी है कि उचित समय पर राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा।
हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक समय-सीमा घोषित नहीं की गई है। इसी कारण विपक्षी दल लगातार इस मुद्दे को सार्वजनिक मंचों पर उठा रहे हैं।
विधानसभा और प्रशासनिक अधिकारों पर बहस
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में कहा कि यदि निर्वाचित सरकार के पास पर्याप्त प्रशासनिक अधिकार नहीं होंगे, तो विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कठिनाइयाँ आ सकती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अधिकांश निर्णय अन्य प्रशासनिक संस्थाओं के स्तर पर ही होने हैं, तो निर्वाचित विधानसभा की भूमिका सीमित हो जाती है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार का पक्ष रहा है कि जम्मू-कश्मीर में विकास, सुरक्षा और प्रशासनिक स्थिरता सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।
जनसभा से मिला राजनीतिक संदेश
जम्मू में आयोजित रैली में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति को नेशनल कॉन्फ्रेंस ने जनसमर्थन का संकेत बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता की भावनाओं का प्रदर्शन भी है।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में पार्टी संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी मांग को आगे बढ़ाती रहेगी।
आगे की राह
20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र के दौरान प्रस्तावित 'दिल्ली चलो' अभियान इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीति में फिर से प्रमुखता दिला सकता है। हालांकि राज्य का दर्जा कब और किस प्रक्रिया के तहत बहाल होगा, इस पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार और संसद की संवैधानिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में इस विषय पर केंद्र और क्षेत्रीय नेतृत्व के बीच संवाद तथा राजनीतिक गतिविधियाँ और तेज़ हो सकती हैं।
जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा घोषित 'दिल्ली चलो' अभियान इस मुद्दे को संसद के मॉनसून सत्र के दौरान प्रमुखता से उठाने का प्रयास है। उनका कहना है कि जनता अब इस विषय पर स्पष्ट और ठोस निर्णय चाहती है।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार पहले भी सार्वजनिक रूप से यह कह चुकी है कि उचित समय पर राज्य का दर्जा बहाल करने की प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा। हालांकि, अभी तक इसकी कोई निश्चित समय-सीमा घोषित नहीं की गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां और संवाद तेज़ होने की संभावना है।
राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रश्न केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक, संवैधानिक और विकास से जुड़े कई पहलुओं से भी जुड़ा है। आगे की दिशा केंद्र सरकार के निर्णय, संवैधानिक प्रक्रिया और राजनीतिक सहमति पर निर्भर करेगी।