दिल्ली-NCR में भूकंप के तेज झटके, अफ़ग़ानिस्तान में 6.2 तीव्रता
Asif Khan
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2026-06-27 17:41:25
अफ़ग़ानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में शनिवार शाम आए शक्तिशाली भूकंप के झटके भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों तक महसूस किए गए। दिल्ली-एनसीआर, जम्मू-कश्मीर और कई अन्य क्षेत्रों में लोग एहतियातन इमारतों से बाहर निकल आए। शुरुआती रिपोर्टों में बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन घटना ने एक बार फिर हिमालयी भूकंपीय क्षेत्र की संवेदनशीलता को सामने ला दिया।
📍 नई दिल्ली
📰 27 जून 2026
✍️ Asif Khan
भूकंप ने फिर याद दिलाई भूगर्भीय हकीकत
शनिवार शाम करीब सात बजे के बाद उत्तर भारत के लाखों लोगों ने अचानक ज़मीन में कंपन महसूस किया। कुछ सेकंड तक चले इन झटकों ने दिल्ली-एनसीआर, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और आसपास के कई इलाकों में लोगों को घरों, दफ्तरों और ऊंची इमारतों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। शुरुआती सूचना ने सोशल मीडिया पर तेज़ी से जगह बनाई, लेकिन आधिकारिक एजेंसियों ने जल्द ही स्पष्ट किया कि भूकंप का केंद्र भारत में नहीं बल्कि अफ़ग़ानिस्तान के हिंदूकुश क्षेत्र में था।
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार भूकंप की तीव्रता लगभग 6.2 दर्ज की गई। इसकी गहराई लगभग 215 किलोमीटर बताई गई, जिसकी वजह से झटके दूर-दूर तक महसूस हुए, लेकिन सतह पर विनाश अपेक्षाकृत सीमित रहा। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों जैसे USGS और EMSC ने परिमाण में मामूली अंतर दर्ज किया, जो शुरुआती भूकंपीय आकलनों में सामान्य माना जाता है।
क्यों दूर का भूकंप दिल्ली तक महसूस हुआ
कई लोगों के मन में सवाल उठा कि अफ़ग़ानिस्तान में आए भूकंप का असर दिल्ली-एनसीआर तक कैसे पहुंच गया। इसका जवाब भूकंप की गहराई और हिंदूकुश क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना में छिपा है। जब किसी गहरे केंद्र वाला शक्तिशाली भूकंप आता है, तब उसकी भूकंपीय तरंगें सैकड़ों किलोमीटर तक यात्रा कर सकती हैं।
हिंदूकुश दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में शामिल है। यहां इंडो-ऑस्ट्रेलियन और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच लगातार दबाव बनता रहता है। इसी कारण इस क्षेत्र में समय-समय पर मध्यम से लेकर शक्तिशाली भूकंप दर्ज होते रहते हैं।
दहशत ज्यादा, नुकसान कम
दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के कई शहरों में लोगों ने पंखों, खिड़कियों और फर्नीचर को हिलते हुए महसूस किया। ऊंची इमारतों में रहने वाले लोगों को झटके अपेक्षाकृत अधिक महसूस हुए। हालांकि देर रात तक किसी बड़े जान-माल के नुकसान या संरचनात्मक क्षति की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी भूकंप के तुरंत बाद वायरल वीडियो या अपुष्ट दावों पर भरोसा करने के बजाय केवल आधिकारिक एजेंसियों की जानकारी पर विश्वास करना चाहिए। आपदा प्रबंधन संस्थाएं स्थिति की लगातार समीक्षा करती हैं और आवश्यक होने पर अपडेट जारी करती हैं।
हर भूकंप तबाही नहीं लाता
भूकंप की तीव्रता जितनी महत्वपूर्ण होती है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण उसकी गहराई, केंद्र की स्थिति, स्थानीय भूगर्भीय संरचना और आबादी का घनत्व होता है। यही कारण है कि समान तीव्रता वाले दो भूकंप अलग-अलग स्तर का नुकसान पहुंचा सकते हैं।
इस घटना में राहत की सबसे बड़ी बात यही रही कि शुरुआती रिपोर्टों में व्यापक तबाही की पुष्टि नहीं हुई। इसके बावजूद यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि उत्तर भारत भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है और आपदा तैयारियों को लगातार मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता है।
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Asif Khan
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।