किराना हिल्स पर हमला हुआ था या नहीं?
अनिल चौहान ने खोला ऑपरेशन सिंदूर का राज
रडार खोजते-खोजते किराना हिल्स पहुंचा ड्रोन?
पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सरगोधा क्षेत्र में रडार खोजने भेजे गए लोटरिंग म्यूनिशन में से एक ईंधन खत्म होने पर पाकिस्तान के किराना हिल्स पर गिरा हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किराना हिल्स को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया था।
तारीख: 26 अगस्त 2026
बाय: Mohd Naved
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर करीब एक साल से चली आ रही किराना हिल्स की चर्चा को पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के बयान ने नया मोड़ दिया है। उनका कहना है कि भारत ने पाकिस्तान के किराना हिल्स इलाके को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया था, लेकिन सरगोधा के आसपास पाकिस्तानी रडार तलाशने भेजे गए एक लोटरिंग म्यूनिशन के वहां गिरने की संभावना है।
यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने किराना हिल्स पर हमले की खबरों को साफ तौर पर खारिज किया था। उस समय एयर मार्शल ए.के. भारती ने कहा था कि भारत ने किराना हिल्स को हिट नहीं किया। अब जनरल चौहान की टिप्पणी इस पुराने बयान को खारिज नहीं करती, बल्कि संभावित अनजाने प्रभाव की अलग व्याख्या पेश करती है।
जनरल अनिल चौहान ने 25 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के विमर्श कार्यक्रम में ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की घटनाओं पर बात की। इसी दौरान उनसे किराना हिल्स को लेकर उठे सवालों के बारे में पूछा गया।
उनके मुताबिक भारत ने सरगोधा के आसपास पाकिस्तानी रडार खोजने के लिए कई लोटरिंग म्यूनिशन भेजे थे। ऐसे हथियार अपने लक्ष्य की तलाश में कुछ समय तक इलाके में मंडरा सकते हैं। अगर उन्हें निर्धारित समय में लक्ष्य नहीं मिलता, तो उनकी परिचालन क्षमता समाप्त हो जाती है और वे नीचे गिर सकते हैं।
चौहान ने कहा कि किराना हिल्स सरगोधा से करीब 10 किलोमीटर दूर है। उनका आकलन है कि इनमें से कोई एक म्यूनिशन लक्ष्य नहीं मिलने के बाद किराना हिल्स की किसी पहाड़ी से टकराया हो सकता है। उन्होंने इसे जानबूझकर किए गए हमले के तौर पर पेश नहीं किया।
यही इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू है। यहां दो अलग सवाल हैं। पहला, क्या भारत ने किराना हिल्स को लक्ष्य बनाया था? उपलब्ध बयानों के मुताबिक जवाब नहीं है। दूसरा, क्या ऑपरेशन के दौरान कोई भारतीय म्यूनिशन वहां गिरा हो सकता है? जनरल चौहान ने इसकी संभावना जताई है।
किराना हिल्स पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सरगोधा के नजदीक स्थित एक संवेदनशील सैन्य क्षेत्र के तौर पर चर्चा में रहा है। विभिन्न रिपोर्टों में इसे पाकिस्तान के परमाणु बुनियादी ढांचे से जोड़ा गया है, हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी इस इलाके में किसी खास परमाणु प्रतिष्ठान पर हमले की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करती।
मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ढांचे के खिलाफ कार्रवाई की। बाद में पाकिस्तान की सैन्य प्रतिक्रिया के बाद भारत ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों, रडार और अन्य सैन्य बुनियादी ढांचे पर जवाबी कार्रवाई की। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक सरगोधा और भोलीरी समेत कई एयरबेस भारतीय कार्रवाई के दायरे में आए।
इसी दौरान सोशल मीडिया और पाकिस्तानी मीडिया में किराना हिल्स से धुआं उठने की तस्वीरों को लेकर अटकलें सामने आई थीं। इन्हीं अटकलों के बीच 12 मई 2025 को एयर मार्शल ए.के. भारती ने कहा था कि भारतीय सेना ने किराना हिल्स को निशाना नहीं बनाया।
ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 7 मई 2025 को हुई थी। भारत सरकार के मुताबिक कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले के बाद की गई, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। शुरुआती कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने की जानकारी दी गई थी।
10 मई को पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों पर मिसाइल, ड्रोन और दूसरे हथियारों से हमला किया। भारत के रक्षा मंत्रालय के अनुसार भारतीय वायु रक्षा और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों ने इन हमलों को नाकाम किया। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की।
इसी सैन्य अभियान के दौरान सरगोधा भारतीय रणनीतिक योजना का हिस्सा बना। जनरल चौहान के ताजा बयान के मुताबिक, रडार की तलाश के लिए लोटरिंग म्यूनिशन भेजे गए थे। किराना हिल्स की भौगोलिक नजदीकी के कारण किसी म्यूनिशन के वहां गिरने की संभावना उन्होंने बताई।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह घटना एक पूर्व सैन्य अधिकारी का बाद का आकलन है। उपलब्ध सार्वजनिक सामग्री में किसी स्वतंत्र जांच रिपोर्ट या सार्वजनिक सैटेलाइट विश्लेषण से इस संभावित प्रभाव की अलग से पुष्टि सामने नहीं आई है।
जनरल अनिल चौहान का मौजूदा बयान कहता है कि किराना हिल्स को टारगेट नहीं बनाया गया था। उनका अनुमान है कि सरगोधा क्षेत्र में रडार खोजने भेजा गया कोई लोटरिंग म्यूनिशन लक्ष्य नहीं मिलने के बाद वहां गिरा हो सकता है।
इसके उलट मई 2025 में एयर मार्शल ए.के. भारती ने साफ कहा था कि भारत ने किराना हिल्स को हिट नहीं किया। उस समय उनका बयान सीधे तौर पर सोशल मीडिया में चल रही अटकलों के जवाब में आया था।
दोनों बयानों में एक महत्वपूर्ण समानता भी है। दोनों यह नहीं कहते कि भारत ने पाकिस्तान के कथित परमाणु प्रतिष्ठान को सैन्य लक्ष्य बनाकर हमला किया था। मौजूदा अंतर इस बात पर है कि क्या कोई भारतीय म्यूनिशन अनजाने में उस क्षेत्र में गिरा था।
अभी सबसे मजबूत उपलब्ध साक्ष्य जनरल चौहान का प्रत्यक्ष बयान है। उनके बयान को टाइम्स ऑफ इंडिया, द इंडियन एक्सप्रेस, एनडीटीवी और दूसरे प्रमुख समाचार संगठनों ने रिपोर्ट किया है।
दूसरा महत्वपूर्ण तथ्य 2025 का आधिकारिक सैन्य बयान है। एयर मार्शल भारती ने तब किराना हिल्स पर हमले से इनकार किया था। इसलिए मौजूदा स्थिति को इस तरह समझना ज्यादा सटीक है कि भारत ने उस इलाके को जानबूझकर टारगेट नहीं किया, जबकि एक म्यूनिशन के अनजाने में वहां गिरने की संभावना अब पूर्व सीडीएस ने सामने रखी है।
पाकिस्तानी मीडिया में उस समय किराना हिल्स क्षेत्र से धुएं की तस्वीरें दिखाए जाने का भी जनरल चौहान ने उल्लेख किया। लेकिन ऐसी तस्वीरें अपने आप में यह साबित नहीं करतीं कि वहां किस हथियार का प्रभाव पड़ा था या किसी संवेदनशील परमाणु सुविधा को नुकसान हुआ था।
इसलिए परमाणु प्रतिष्ठान को नुकसान, रेडियोधर्मी रिसाव या परमाणु सामग्री के प्रभावित होने जैसे दावों को उपलब्ध सार्वजनिक साक्ष्य के आधार पर स्थापित तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
इस खुलासे का सबसे बड़ा असर भारत-पाकिस्तान सैन्य अभियानों की सार्वजनिक समझ पर पड़ेगा। इससे पता चलता है कि आधुनिक युद्ध में लक्ष्य की पहचान, हथियार की परिचालन सीमा और रीयल-टाइम निर्णय कितने महत्वपूर्ण होते हैं।
लोटरिंग म्यूनिशन की अवधारणा ही लक्ष्य की तलाश और उसके बाद प्रहार पर आधारित है। यदि लक्ष्य नहीं मिलता और हथियार की परिचालन अवधि समाप्त हो जाती है, तो उसके अंतिम प्रभाव को नियंत्रित करना कठिन हो सकता है। यह मामला ऐसे हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े परिचालन जोखिम पर भी सवाल उठाता है।
दूसरा पहलू रणनीतिक संचार का है। जब किसी संवेदनशील इलाके को परमाणु ढांचे से जोड़ा जाता है, तब वहां किसी भी सैन्य गतिविधि की खबर का असर सामान्य सैन्य कार्रवाई से कहीं ज्यादा होता है। गलत आकलन तनाव बढ़ा सकता है।
भारत की तरफ से इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि जानबूझकर परमाणु प्रतिष्ठान को निशाना बनाने का दावा नहीं किया गया है। इससे परमाणु जोखिम से जुड़े नैरेटिव को अलग संदर्भ मिलता है।
साथ ही, यह मामला सैन्य कार्रवाई के दौरान राजनीतिक उद्देश्यों और परिचालन फैसलों के बीच संतुलन की अहमियत दिखाता है। जनरल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में भारत की एस्केलेशन रणनीति पर भी बात की और बताया कि सैन्य नेतृत्व ने आगे की कार्रवाई के लिए कई विकल्प तैयार रखे थे।
इसका मतलब यह नहीं कि भविष्य के अभियानों में ऐसी घटनाएं दोहराई जाएंगी। लेकिन संवेदनशील सैन्य क्षेत्रों के आसपास लक्ष्य चयन और हथियार नियंत्रण की प्रक्रियाओं की समीक्षा का महत्व जरूर सामने आता है।
इस घटना का तत्काल आर्थिक असर सीमित है। लेकिन भारत-पाकिस्तान संबंधों में किसी भी सैन्य घटना का क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल पर प्रभाव पड़ता है।
भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु हथियार रखने वाले देश हैं। इसलिए सैन्य कार्रवाई से जुड़ी गलत सूचना, अपुष्ट तस्वीरें या परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले की अफवाहें बाजारों, सीमावर्ती समुदायों और व्यापक जनमत पर असर डाल सकती हैं।
ऐसे मामलों में जिम्मेदार रिपोर्टिंग का महत्व बढ़ जाता है। किसी संभावित सैन्य प्रभाव को परमाणु हमले के रूप में पेश करना तथ्यात्मक रूप से गलत निष्कर्ष तक ले जा सकता है।
किराना हिल्स से जुड़ा विवाद भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव के एक संवेदनशील पहलू को सामने लाता है। दोनों देशों के बीच संकट के दौरान सैन्य कार्रवाई और परमाणु जोखिम को अलग-अलग समझना जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह सवाल महत्वपूर्ण है कि दोनों परमाणु-सशस्त्र देशों के बीच सीमित सैन्य कार्रवाई किस तरह नियंत्रित रखी जाए। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने अपने आधिकारिक बयानों में कार्रवाई को लक्षित और सीमित बताया था।
किराना हिल्स पर संभावित अनजाने प्रभाव की बात इस व्यापक बहस को फिर सामने लाती है कि उच्च-सटीकता वाले हथियारों के बावजूद युद्धक्षेत्र में अनपेक्षित परिणामों की गुंजाइश खत्म नहीं होती।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी स्वतंत्र तकनीकी या सैटेलाइट विश्लेषण से किराना हिल्स पर उस संभावित प्रभाव की पुष्टि हुई है। सार्वजनिक स्रोतों में ऐसी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल स्पष्ट नहीं है।
दूसरा सवाल यह है कि अगर कोई म्यूनिशन वहां गिरा था, तो उसका वास्तविक प्रभाव कितना था। क्या किसी सैन्य ढांचे को नुकसान हुआ, या केवल पहाड़ी क्षेत्र प्रभावित हुआ, इसका प्रमाण सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
तीसरा सवाल यह है कि इस्तेमाल किए गए लोटरिंग म्यूनिशन की पहचान क्या थी। कुछ रिपोर्टों ने इसे हरोप ड्रोन से जोड़ा है, लेकिन जनरल चौहान के उपलब्ध बयान में मुख्य जोर म्यूनिशन की भूमिका और उसके परिचालन समय पर है। इसलिए किसी खास मॉडल की पहचान को अंतिम तथ्य की तरह पेश करना उचित नहीं होगा।
अब इस बयान के बाद 2025 की घटनाओं को लेकर नए दस्तावेजी और तकनीकी विश्लेषण की मांग बढ़ सकती है। खासकर सैटेलाइट इमेजरी, युद्धक्षेत्र के स्वतंत्र विश्लेषण और उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड इस मामले की तस्वीर और साफ कर सकते हैं।
फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के आधार पर सबसे संतुलित निष्कर्ष यही है कि किराना हिल्स भारत का घोषित लक्ष्य नहीं था। जनरल चौहान ने एक संभावित अनजाने प्रभाव की व्याख्या दी है, जबकि 2025 में भारतीय वायुसेना ने किराना हिल्स पर हमले से इनकार किया था।
किराना हिल्स का मामला ऑपरेशन सिंदूर के सैन्य इतिहास में एक महत्वपूर्ण लेकिन संवेदनशील अध्याय है। जनरल अनिल चौहान का बयान यह स्पष्ट करने की कोशिश करता है कि अगर वहां कोई भारतीय म्यूनिशन गिरा था, तो वह नियोजित हमला नहीं था।
इस मामले में सबसे जरूरी अंतर लक्ष्य और संभावित प्रभाव के बीच है। उपलब्ध रिकॉर्ड भारत द्वारा किराना हिल्स को जानबूझकर निशाना बनाए जाने की पुष्टि नहीं करते। वहीं, पूर्व सीडीएस का बयान एक संभावित अनजाने प्रभाव की व्याख्या सामने रखता है।
इसलिए इस घटना को परमाणु प्रतिष्ठान पर सुनियोजित हमले के तौर पर पेश करना उपलब्ध साक्ष्य से आगे जाना होगा। अंतिम तस्वीर के लिए स्वतंत्र तकनीकी प्रमाण और अधिक आधिकारिक जानकारी की जरूरत बनी हुई है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।