अमेरिकी F-35 पहली बार भारत के सैन्य अभ्यास में शामिल हो सकता है।
जोधपुर में दिखेगी पांचवीं पीढ़ी की एयर पावर।
पाक सीमा के करीब भारत में जुटेंगे कई देशों के लड़ाकू विमान।
अमेरिकी F-35 के तरंग शक्ति 2026 में शामिल होने की संभावना है। अभ्यास जोधपुर में होगा, जो पाकिस्तान सीमा के अपेक्षाकृत करीब है। आठ देशों के लड़ाकू विमान हिस्सा ले सकते हैं। यह भारत में F-35 की पहली सैन्य अभ्यास भागीदारी होगी। हालांकि अंतिम तैनाती और संचालन कार्यक्रम अभी आधिकारिक रूप से सुनिश्चित नहीं है।
लोकेशन: जोधपुर, राजस्थान
तारीख: 25 अगस्त 2026
बाय: Mohd Naved
अमेरिकी F-35 की संभावित एंट्री, पाकिस्तान सीमा के करीब भारत का बड़ा एयर एक्सरसाइज
अमेरिका का पांचवीं पीढ़ी का स्टेल्थ फाइटर एफ-35 भारत के बहुराष्ट्रीय वायु सैन्य अभ्यास तरंग शक्ति 2026 में शामिल हो सकता है। अगर अमेरिकी वायुसेना की योजना अंतिम रूप लेती है, तो भारत में किसी सैन्य अभ्यास में एफ-35 की यह पहली भागीदारी होगी। अभ्यास राजस्थान के जोधपुर एयरबेस पर 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक प्रस्तावित है।
जोधपुर की भौगोलिक स्थिति इस अभ्यास को अतिरिक्त रणनीतिक संदर्भ देती है। एयरबेस पश्चिमी राजस्थान में पाकिस्तान सीमा के करीब है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में एफ-35 की संभावित मौजूदगी को किसी खास देश के खिलाफ सैन्य संदेश के रूप में आधिकारिक तौर पर पेश नहीं किया गया है। इसलिए इसे सीधे पाकिस्तान-केंद्रित सैन्य कार्रवाई कहना उचित नहीं होगा।
क्या हुआ?
रक्षा अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी एफ-35 को तरंग शक्ति 2026 के अमेरिकी कार्यक्रम में शामिल किया गया है। हालांकि विमान की अंतिम तैनाती, संख्या, संचालन और फ्लाइंग शेड्यूल अभी परिस्थितियों और अमेरिकी सैन्य योजना पर निर्भर करेगा।
तरंग शक्ति 2026 भारतीय वायुसेना का बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास है। इस संस्करण में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका और बांग्लादेश के विमान शामिल होने की संभावना बताई गई है। 30 से अधिक देश पर्यवेक्षक के तौर पर हिस्सा ले सकते हैं।
अभ्यास की सबसे बड़ी खबर एफ-35 की संभावित भागीदारी है। यह विमान पांचवीं पीढ़ी की स्टेल्थ तकनीक, सेंसर फ्यूजन और नेटवर्क-केंद्रित युद्धक क्षमता के लिए जाना जाता है।
पूरा संदर्भ क्या है?
भारत में एफ-35 की मौजूदगी पूरी तरह नई नहीं है। यह विमान पहले एयरो इंडिया जैसे एयर शो के दौरान भारत आ चुका है। लेकिन सैन्य अभ्यास में इसकी भागीदारी अलग स्तर की बात होगी। द ट्रिब्यून के मुताबिक, एफ-35 पहले भारत में एयर शो के लिए आया है, लेकिन किसी सैन्य अभ्यास में हिस्सा नहीं लिया है।
तरंग शक्ति में इसकी संभावित भागीदारी भारतीय वायुसेना को अमेरिकी पांचवीं पीढ़ी के प्लेटफॉर्म के साथ ऑपरेशनल ट्रेनिंग और इंटरऑपरेबिलिटी का अनुभव दे सकती है। इससे साझा मिशन प्लानिंग, एयर कॉम्बैट कॉन्सेप्ट और नेटवर्क-केंद्रित ऑपरेशन से जुड़े प्रशिक्षण का दायरा बढ़ सकता है।
हालांकि एक अहम फर्क समझना जरूरी है। एफ-35 का भारत आना अपने आप में भारत और अमेरिका के बीच एफ-35 खरीद समझौते का संकेत नहीं है। मौजूदा रिपोर्टें सैन्य अभ्यास में संभावित भागीदारी की बात करती हैं, किसी खरीद निर्णय की नहीं।
पृष्ठभूमि और घटनाक्रम
तरंग शक्ति का पहला संस्करण 2024 में आयोजित किया गया था। इसे दो चरणों में संचालित किया गया था। पहला चरण तमिलनाडु के सुलूर एयरबेस और दूसरा चरण राजस्थान के जोधपुर में हुआ था।
2024 के अभ्यास में कई प्रमुख विदेशी लड़ाकू विमान शामिल हुए थे। इनमें फ्रांसीसी राफेल, यूरोफाइटर टाइफून, ऑस्ट्रेलियाई ईए-18जी ग्राउलर, ग्रीस और यूएई के एफ-16 तथा अमेरिका के ए-10 और एफ-16 शामिल थे। भारतीय वायुसेना ने भी राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, जगुआर, तेजस और मिग-29 जैसे प्लेटफॉर्म के साथ हिस्सा लिया था।
2026 के संस्करण से पहले जोधपुर में भारत और जापान का वीर गार्जियन 2026 अभ्यास भी प्रस्तावित है। यह 9 से 22 सितंबर तक होगा। इसमें भारतीय सुखोई-30 एमकेआई और जापानी एफ-2 लड़ाकू विमानों की भागीदारी की जानकारी सामने आई है।
इस तरह सितंबर के दौरान जोधपुर एयरबेस पर लगातार बहुराष्ट्रीय और द्विपक्षीय हवाई गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
प्रमुख पक्षकारों का रुख
अमेरिकी एफ-35 की संभावित भागीदारी की जानकारी मुख्य तौर पर रक्षा अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों में सामने आई है। अभी उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी में अंतिम संचालन कार्यक्रम की औपचारिक विस्तृत घोषणा स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है।
भारत के लिए तरंग शक्ति का प्रमुख उद्देश्य बहुराष्ट्रीय एयर ऑपरेशंस में प्रशिक्षण और इंटरऑपरेबिलिटी को मजबूत करना है। अमेरिका और अन्य साझेदार देशों की भागीदारी इसी व्यापक सैन्य सहयोग के दायरे में देखी जानी चाहिए।
भारत और जापान के बीच भी रक्षा सहयोग का विस्तार जारी है। 20 अगस्त को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी की बैठक के बाद दोनों देशों ने नियमित सैन्य सहयोग और विभिन्न अभ्यासों की तैयारियों का स्वागत किया था।
उपलब्ध साक्ष्य क्या बताते हैं?
उपलब्ध रिपोर्टों में एक बात अपेक्षाकृत स्पष्ट है कि एफ-35 को तरंग शक्ति 2026 में शामिल करने की अमेरिकी योजना मौजूद है। लेकिन “एफ-35 निश्चित रूप से भारत आएगा” और “एफ-35 निश्चित संख्या में उड़ान भरेगा” जैसी बातें अभी अंतिम आधिकारिक पुष्टि के बिना नहीं लिखी जानी चाहिए।
इसी तरह जोधपुर की पाकिस्तान सीमा से निकटता तथ्यात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इससे अपने आप यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि अभ्यास पाकिस्तान के खिलाफ है। बहुराष्ट्रीय एयर एक्सरसाइज का घोषित स्वरूप प्रशिक्षण, समन्वय और ऑपरेशनल इंटरऑपरेबिलिटी से जुड़ा है।
संभावित प्रभाव क्या हो सकते हैं?
एफ-35 की संभावित मौजूदगी अभ्यास की तकनीकी जटिलता बढ़ा सकती है। भारतीय वायुसेना के लिए पांचवीं पीढ़ी के स्टेल्थ प्लेटफॉर्म के साथ प्रशिक्षण से सेंसर फ्यूजन, डेटा शेयरिंग और नेटवर्क-केंद्रित युद्धक अवधारणाओं को समझने का अवसर मिलेगा।
बहुराष्ट्रीय अभ्यास का दूसरा पहलू एयर फोर्सेज के बीच इंटरऑपरेबिलिटी है। अलग-अलग देशों के विमान, कमांड सिस्टम और ऑपरेशनल प्रक्रियाएं एक साझा अभ्यास में काम करती हैं। इससे वास्तविक संकट के दौरान संयुक्त ऑपरेशन के लिए प्रक्रियागत समझ मजबूत होती है।
राजनीतिक और नीतिगत प्रभाव
जोधपुर में एफ-35 की संभावित भागीदारी को भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों के व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है। अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय साझेदारों के साथ भारत की रक्षा गतिविधियां पिछले वर्षों में लगातार बढ़ी हैं।
लेकिन इस अभ्यास को किसी औपचारिक सैन्य गठबंधन का संकेत मानना सही नहीं होगा। भारत की रणनीतिक नीति अभी भी बहु-साझेदारी और रणनीतिक स्वायत्तता पर आधारित है। अलग-अलग देशों के साथ सैन्य अभ्यास इसी व्यापक नीति का हिस्सा हैं।
आर्थिक और सामाजिक असर
तरंग शक्ति जैसा बड़ा बहुराष्ट्रीय अभ्यास भारत के रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी अहम है। विदेशी एयर फोर्सेज के साथ प्रशिक्षण भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल जरूरतों, तकनीकी प्रक्रियाओं और भविष्य की क्षमता योजना के लिए उपयोगी अनुभव देता है।
जोधपुर के लिए भी बड़े अंतरराष्ट्रीय सैन्य आयोजन से एयरबेस और स्थानीय प्रशासनिक ढांचे पर गतिविधियां बढ़ेंगी। हालांकि स्थानीय आर्थिक असर को लेकर उपलब्ध स्रोतों में अभी कोई प्रमाणित आंकड़ा सामने नहीं आया है।
अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रभाव
पश्चिमी राजस्थान में एक साथ कई देशों के लड़ाकू विमानों का अभ्यास दक्षिण एशिया के सुरक्षा परिदृश्य के लिहाज़ से ध्यान आकर्षित करेगा। खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्र में पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों और स्टेल्थ तकनीक को लेकर चर्चा बढ़ रही है।
फिर भी सैन्य अभ्यास और वास्तविक युद्धक तैनाती में अंतर है। तरंग शक्ति को प्रशिक्षण और सहयोग के संदर्भ में देखना ज्यादा सटीक होगा। किसी संभावित क्षेत्रीय तनाव का निष्कर्ष केवल विमान की मौजूदगी के आधार पर निकालना उचित नहीं होगा।
कौन से सवाल अभी अनुत्तरित हैं?
सबसे बड़ा सवाल एफ-35 की अंतिम तैनाती को लेकर है। कितने विमान आएंगे, कौन सा एफ-35 संस्करण शामिल होगा और किस तरह के मिशन प्रोफाइल में हिस्सा लिया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं है।
दूसरा सवाल यह है कि क्या एफ-35 भारतीय और अन्य विदेशी प्लेटफॉर्म के साथ वास्तविक संयुक्त मिशन उड़ाएगा या सीमित प्रशिक्षण गतिविधियों में हिस्सा लेगा। इसका जवाब अभ्यास के आधिकारिक कार्यक्रम से ही स्पष्ट होगा।
आगे क्या होगा?
9 से 22 सितंबर तक वीर गार्जियन 2026 के बाद 26 सितंबर से तरंग शक्ति 2026 शुरू होने की योजना है। अगर अमेरिकी एफ-35 की भागीदारी अंतिम रूप लेती है, तो यह भारत में इस विमान की पहली सैन्य अभ्यास भागीदारी होगी।
अभ्यास के दौरान वास्तविक विमान संख्या, फ्लाइट प्रोफाइल और मिशन गतिविधियों पर अधिक स्पष्टता सामने आने की उम्मीद होगी। तब यह भी बेहतर तरीके से आकलन किया जा सकेगा कि एफ-35 की मौजूदगी का भारतीय वायुसेना के प्रशिक्षण और इंटरऑपरेबिलिटी पर कितना व्यावहारिक असर पड़ा।
संपादकीय निष्कर्ष
अमेरिकी एफ-35 की तरंग शक्ति 2026 में संभावित भागीदारी भारत के बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास को तकनीकी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है। जोधपुर की पाकिस्तान सीमा से निकटता इस घटनाक्रम को अतिरिक्त क्षेत्रीय संदर्भ देती है, लेकिन उपलब्ध साक्ष्य इसे पाकिस्तान-केंद्रित सैन्य कार्रवाई के रूप में स्थापित नहीं करते।
फिलहाल सबसे सटीक निष्कर्ष यही है कि अमेरिका एफ-35 को इस अभ्यास में भेजने की तैयारी कर रहा है, लेकिन अंतिम तैनाती और संचालन कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। अगर यह भागीदारी होती है, तो भारत में एफ-35 की सैन्य अभ्यास यात्रा का यह पहला अध्याय होगा।