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फिलिस्तीनी राष्ट्रपति पर फिर अमेरिकी रोक, UN महासभा से पहले वीजा प्रतिबंध बढ़ाए गए

Harish Qureshi • 2026-09-17 12:08:43
फिलिस्तीनी राष्ट्रपति पर फिर अमेरिकी रोक, UN महासभा से पहले वीजा प्रतिबंध बढ़ाए गए

अमेरिका ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और कई अन्य फिलिस्तीनी अधिकारियों के वीजा पर रोक जारी रखी है। यह लगातार दूसरा साल है जब अब्बास न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा में व्यक्तिगत रूप से शामिल नहीं हो पाएंगे। वॉशिंगटन ने अपने फैसले के पीछे फिलिस्तीनी प्राधिकरण की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय कानूनी कार्रवाई को वजह बताया है।


वॉशिंगटन | 17 सितंबर 2026

By Mohd Haris


महमूद अब्बास का अमेरिकी वीजा फिर खारिज


अमेरिका ने फिलिस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति महमूद अब्बास को संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेने के लिए वीजा देने से इनकार कर दिया है। यह लगातार दूसरा साल है जब अब्बास को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में होने वाली महासभा की उच्चस्तरीय बैठक में व्यक्तिगत रूप से पहुंचने से रोका गया है।


अमेरिकी विदेश विभाग ने साथ ही फिलिस्तीनी प्राधिकरण और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन के कई अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध जारी रखने की घोषणा की है। अगले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा का उच्चस्तरीय सत्र होने वाला है।


अमेरिका ने क्या वजह बताई


अमेरिकी विदेश विभाग का कहना है कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण ने पूर्व समझौतों के तहत शांति प्रक्रिया से जुड़े अपने दायित्व पूरे नहीं किए हैं।


वॉशिंगटन ने अंतरराष्ट्रीय अदालतों में इजरायल के खिलाफ फिलिस्तीनी कार्रवाई, फिलिस्तीनी राज्य की एकतरफा अंतरराष्ट्रीय मान्यता हासिल करने की कोशिश और इजरायल के खिलाफ हमलों में दोषी ठहराए गए लोगों के परिवारों को भुगतान जारी रखने जैसे मुद्दों का हवाला दिया है। ये अमेरिकी प्रशासन के आरोप और उसका आधिकारिक पक्ष हैं।


अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि इन परिस्थितियों में पीएलओ सदस्यों और फिलिस्तीनी प्राधिकरण के अधिकारियों पर वीजा प्रतिबंध जारी रखे जाएंगे।


यह लगातार दूसरा साल है


2025 में भी अमेरिका ने महमूद अब्बास और कई अन्य वरिष्ठ फिलिस्तीनी अधिकारियों को संयुक्त राष्ट्र महासभा में आने के लिए वीजा नहीं दिया था। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने विशेष व्यवस्था के जरिए अब्बास को वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित करने की अनुमति दी थी।


2025 में महासभा ने 145 मतों के मुकाबले 5 मतों से प्रस्ताव मंजूर किया था। अमेरिका और इजरायल उन देशों में शामिल थे जिन्होंने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया था।


अब 2026 में ऐसी ही स्थिति फिर सामने आई है।


इस साल भी वीडियो संबोधन का रास्ता


महमूद अब्बास के व्यक्तिगत रूप से न्यूयॉर्क पहुंचने पर रोक के बाद फिलिस्तीनी पक्ष ने उन्हें दूरस्थ माध्यम से महासभा को संबोधित कराने की कोशिश शुरू की है।


संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस संबंध में प्रस्ताव पर मतदान होने की उम्मीद है। अगर प्रस्ताव मंजूर होता है, तो अब्बास वीडियो या पहले से रिकॉर्ड किए गए संदेश के जरिए अपनी बात रख सकते हैं।


पिछले साल अब्बास ने भी महासभा को वीडियो के जरिए संबोधित किया था।


फिलिस्तीनी प्रतिनिधित्व पूरी तरह खत्म नहीं होगा


वीजा प्रतिबंध के बावजूद संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन का राजनयिक प्रतिनिधित्व बना रहेगा। पहले से मान्यता प्राप्त फिलिस्तीनी राजनयिक संयुक्त राष्ट्र में काम करते रहेंगे।


अमेरिकी विदेश विभाग ने यह भी कहा है कि संयुक्त राष्ट्र में पीएलओ ऑब्जर्वर मिशन से औपचारिक रूप से जुड़े कर्मचारियों के लिए मौजूदा छूट जारी रहेगी।


इसका अर्थ है कि अमेरिकी वीजा प्रतिबंध का असर मुख्य रूप से उन वरिष्ठ अधिकारियों की व्यक्तिगत यात्रा पर है जो अमेरिका में प्रवेश करना चाहते हैं।


UN मुख्यालय समझौते को लेकर विवाद


इस फैसले का एक अहम कानूनी पहलू संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय समझौते से जुड़ा है।


1947 के समझौते के तहत अमेरिका पर संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय तक विदेशी प्रतिनिधियों की पहुंच में अनावश्यक बाधा नहीं डालने की जिम्मेदारी है। हालांकि वॉशिंगटन का कहना है कि सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े अमेरिकी कानूनों के तहत कुछ परिस्थितियों में वीजा प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।


2025 में कई देशों ने अमेरिकी कदम पर आपत्ति जताई थी। संयुक्त राष्ट्र में रूस, चीन और ईरान के प्रतिनिधियों ने भी वीजा रोकने को लेकर चिंता व्यक्त की थी।


इसलिए 2026 का घटनाक्रम केवल अमेरिका और फिलिस्तीन के बीच राजनयिक विवाद नहीं है। इसमें संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की मेजबानी करने वाले देश की जिम्मेदारियों और राष्ट्रीय वीजा कानूनों के बीच संबंध का सवाल भी शामिल है।


फिलिस्तीन की UN स्थिति


फिलिस्तीन संयुक्त राष्ट्र का पूर्ण सदस्य देश नहीं है। उसे गैर-सदस्य पर्यवेक्षक राज्य का दर्जा प्राप्त है और महासभा में उसे मतदान का अधिकार नहीं है।


इसके बावजूद फिलिस्तीनी प्रतिनिधिमंडल संयुक्त राष्ट्र की बैठकों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिस्सा लेता है। इसी वजह से अब्बास की महासभा में व्यक्तिगत मौजूदगी या दूरस्थ संबोधन को फिलिस्तीनी कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


अमेरिकी और फिलिस्तीनी रुख में अंतर


वॉशिंगटन का कहना है कि फिलिस्तीनी प्राधिकरण को अंतरराष्ट्रीय अदालतों में कार्रवाई और राज्य की मान्यता के प्रयासों के बजाय प्रत्यक्ष वार्ता और शांति प्रक्रिया पर ध्यान देना चाहिए।


फिलिस्तीनी पक्ष का रुख अलग है। फिलिस्तीनी अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही अमेरिकी मध्यस्थता वाली वार्ताएं स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य और इजरायली कब्जे के मुद्दे का समाधान नहीं कर सकी हैं।


यही मतभेद वाशिंगटन और रामल्ला के बीच मौजूदा राजनयिक तनाव की प्रमुख पृष्ठभूमि है।


गाजा और दो-राष्ट्र समाधान का संदर्भ


यह फैसला ऐसे समय आया है जब संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन का मुद्दा लगातार प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एजेंडा बना हुआ है।


फिलिस्तीनी नेतृत्व महासभा के मंच का इस्तेमाल गाजा की मानवीय स्थिति, पश्चिमी तट में इजरायली बस्तियों और स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की मांग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए करता रहा है।


दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन फिलिस्तीनी प्राधिकरण और पीएलओ पर दबाव बनाए रखने की नीति अपना रहा है।


अब आगे क्या होगा


सबसे अहम घटनाक्रम संयुक्त राष्ट्र महासभा में होने वाला मतदान होगा। इससे तय होगा कि अब्बास को पिछले साल की तरह वीडियो या रिकॉर्ड किए गए संदेश के जरिए संबोधन की अनुमति मिलती है या नहीं।


इस बीच फिलिस्तीनी राजनयिक संयुक्त राष्ट्र में अपना काम जारी रखेंगे। अब्बास की व्यक्तिगत मौजूदगी पर रोक के बावजूद फिलिस्तीन की राजनयिक आवाज महासभा में बनी रहने की संभावना है।


निष्कर्ष


अमेरिका द्वारा महमूद अब्बास का वीजा लगातार दूसरे साल रोकना वॉशिंगटन और फिलिस्तीनी नेतृत्व के बीच जारी गंभीर राजनयिक मतभेद को सामने लाता है। अमेरिकी प्रशासन ने इसे फिलिस्तीनी प्राधिकरण और पीएलओ की नीतियों तथा शांति प्रक्रिया से जुड़े अपने दायित्वों के संदर्भ में उचित ठहराया है।


अब ध्यान संयुक्त राष्ट्र महासभा की अगली कार्यवाही पर है। अगर महासभा विशेष अनुमति देती है, तो अब्बास न्यूयॉर्क पहुंचे बिना वीडियो या रिकॉर्ड किए गए संदेश के जरिए अपना संबोधन दे सकते हैं।

वीडियो देखें

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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