पीलीभीत हत्याकांड, शिकायत के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
कशिश हत्याकांड में कॉलेज प्रशासन पर परिजनों का बड़ा आरोप
Location:-
Pilibhit, Uttar Pradesh
Date:-
16 July 2026
Byline:-
Shahana
पीलीभीत मेडिकल कॉलेज केस, सुरक्षा व्यवस्था
पर उठे नए सवाल
पीलीभीत मेडिकल कॉलेज में पैरामेडिकल छात्रा कशिश पटेल की हत्या के बाद मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है। परिजनों का आरोप है कि छात्रा ने पहले ही आरोपी की शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब जांच का केंद्र केवल आरोपी नहीं, बल्कि संस्थागत जवाबदेही भी बनती जा रही है।
पीलीभीत मेडिकल कॉलेज हत्याकांड, क्या समय रहते कार्रवाई होती तो बच सकती थी कशिश?
पीलीभीत मेडिकल कॉलेज की पैरामेडिकल प्रथम वर्ष की छात्रा कशिश पटेल की सीटी स्कैन विभाग में चाकू मारकर हत्या ने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर दिया है। पुलिस ने आरोपी सहपाठी सागर सिंह को हिरासत में लेकर हत्या का मुकदमा दर्ज किया है और विभिन्न पहलुओं से जांच जारी है। शुरुआती जांच में एकतरफा लगाव और आपसी विवाद जैसे पहलू सामने आए हैं, हालांकि पुलिस ने किसी अंतिम निष्कर्ष की पुष्टि नहीं की है।
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह बन गया है कि क्या यह हत्या रोकी जा सकती थी। यही प्रश्न अब पीड़ित परिवार, छात्र-छात्राओं और आम जनता के बीच चर्चा का विषय है।
परिजनों ने कॉलेज प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
कशिश के परिजनों का कहना है कि छात्रा ने आरोपी की कथित हरकतों की शिकायत पहले ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन से की थी। परिवार का दावा है कि यदि शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई की जाती, आरोपी को रोका जाता या उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कदम उठाए जाते, तो यह घटना शायद नहीं होती। कशिश के चाचा विकास पटेल ने कहा कि यदि कॉलेज प्रशासन शिकायत से अवगत था तो परिवार को भी इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी। उनका आरोप है कि प्राचार्य से लेकर संबंधित अधिकारियों तक सभी की भूमिका की जांच होनी चाहिए।
यह आरोप अभी जांच के दायरे में हैं और प्रशासन की ओर से इन पर अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
शिकायत कब हुई, इस पर अलग-अलग दावे
घटना के बाद शिकायत के समय को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। परिजनों का कहना है कि शिकायत लगभग 15 दिन पहले की गई थी, जबकि कुछ छात्र-छात्राओं का दावा है कि लिखित शिकायत इससे पहले भी कॉलेज प्रशासन को दी गई थी। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
यही वजह है कि जांच एजेंसियों के लिए शिकायत से जुड़े दस्तावेज, कॉलेज रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों के बयान महत्वपूर्ण साक्ष्य बन गए हैं।
घटना कैसे हुई
पुलिस के अनुसार आरोपी सागर सिंह मंगलवार सुबह मेडिकल कॉलेज के सीटी स्कैन विभाग पहुंचा। वहां कशिश से कहासुनी हुई, जिसके बाद उसने चाकू से कई वार किए। बचाव के लिए आगे आई महिला कर्मचारी भी घायल हो गईं। कॉलेज कर्मचारियों और सुरक्षा कर्मियों ने आरोपी को मौके पर पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। घायल कशिश को पहले मेडिकल कॉलेज और बाद में बरेली रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे नए सवाल
घटना ने मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर बहस शुरू कर दी है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि आरोपी चाकू लेकर परिसर में प्रवेश कर गया, तो सुरक्षा जांच कितनी प्रभावी थी। दूसरा प्रश्न यह है कि शिकायत मिलने के बाद क्या किसी जोखिम मूल्यांकन की प्रक्रिया अपनाई गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शिक्षण संस्थान में उत्पीड़न या पीछा किए जाने की शिकायत को केवल अनुशासनात्मक विषय नहीं माना जाना चाहिए। ऐसे मामलों में सुरक्षा प्रोटोकॉल, निगरानी और पीड़ित की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।
प्राचार्य का पुराना विवाद भी चर्चा में
घटना के बाद मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. संगीता अनेजा का फिरोजाबाद में पूर्व कार्यकाल भी चर्चा में आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उस समय उनके खिलाफ एक मेडिकल छात्र की आत्महत्या से जुड़े मामले में मुकदमा दर्ज हुआ था। हालांकि उस पुराने मामले की कानूनी स्थिति अलग है और उसका इस हत्याकांड से प्रत्यक्ष संबंध स्थापित नहीं हुआ है। इसलिए दोनों मामलों को अलग-अलग संदर्भ में देखना आवश्यक है।
कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने घटना के बाद आंतरिक जांच समिति गठित करने की घोषणा की है। समिति को सुरक्षा व्यवस्था, घटनाक्रम और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की समीक्षा का जिम्मा दिया गया है। पुलिस की आपराधिक जांच इससे अलग जारी है।
पुलिस जांच किन बिंदुओं पर केंद्रित
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने हत्या की योजना पहले से बनाई थी या नहीं। साथ ही दोनों छात्रों के बीच संबंधों, कथित विवाद और शिकायतों के रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने कहा है कि सभी संभावित पहलुओं को जांच में शामिल किया जाएगा ताकि अदालत में मजबूत अभियोजन प्रस्तुत किया जा सके।
व्यापक सवाल केवल एक आरोपी तक सीमित नहीं
यह मामला केवल एक व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध का नहीं रह गया है। अब बहस इस बात पर भी है कि यदि किसी छात्रा द्वारा उत्पीड़न की शिकायत दर्ज की जाती है तो संस्थान की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी क्या होती है। क्या शिकायत दर्ज होने के बाद पर्याप्त सुरक्षा दी गई? क्या जोखिम का आकलन किया गया? क्या परिवार को सूचना दी गई?
इन सवालों के उत्तर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे, लेकिन यह घटना देश के मेडिकल कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा का अवसर भी बन सकती है।
कशिश पटेल की हत्या ने एक परिवार से उसकी बेटी छीन ली, लेकिन इसके साथ ही संस्थागत जवाबदेही पर भी गंभीर बहस छेड़ दी है। आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अपनी जगह जारी है, वहीं कॉलेज प्रशासन की भूमिका भी जांच के दायरे में है। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएंगे। तब तक यह मामला इस बात की याद दिलाता रहेगा कि किसी भी शिकायत को समय रहते गंभीरता से लेना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जीवन की सुरक्षा का प्रश्न भी हो सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।