प्रीति जिंटा ने खुलासा किया कि वह अपनी ही फिल्मों को देखना पसंद नहीं करतीं। स्क्रीन पर खुद को देखने के बाद उनका ध्यान कहानी से ज्यादा अपनी कमियों और बेहतर परफॉर्मेंस की संभावनाओं पर चला जाता है।
📍 मुंबई
🗓️ 12 सितंबर 2026
✍️ मोहम्मद नावेद
बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने अपनी फिल्मों को लेकर एक दिलचस्प बात साझा की है। दर्शकों के लिए उनकी फिल्में मनोरंजन और यादों का हिस्सा रही हैं, लेकिन खुद प्रीति के लिए अपनी ही अदाकारी को पर्दे पर देखना सहज अनुभव नहीं है।
एक्ट्रेस के मुताबिक, वह अपनी फिल्मों को देखने के दौरान अपनी परफॉर्मेंस का आनंद लेने के बजाय उसे परखने लगती हैं। स्क्रीन पर खुद को देखते ही उनके ज़ेहन में यह सवाल आने लगता है कि किसी सीन को वह और बेहतर तरीके से कर सकती थीं।
अपनी अदाकारी को जज करना मुश्किल
प्रीति जिंटा ने बताया कि उनके लिए खुद को स्क्रीन पर देखकर अपनी परफॉर्मेंस का निष्पक्ष मूल्यांकन करना आसान नहीं है। यही वजह है कि फिल्म पूरी होने के बाद वह उसे दर्शक की तरह बैठकर देखने से अक्सर बचती हैं।
उनका नज़रिया यह बताता है कि कैमरे के सामने काम करने और पर्दे पर उसी काम को देखने के अनुभव में काफी फर्क होता है। शूटिंग के दौरान कलाकार किसी सीन की भावनाओं और तकनीकी पहलुओं पर ध्यान देता है, जबकि रिलीज़ के बाद वही सीन देखने पर उसकी निगाह अपनी परफॉर्मेंस की बारीकियों पर टिक सकती है।
बेहतर करने की सोच हावी रहती है
प्रीति के मुताबिक, अपनी फिल्म देखने पर उनके दिमाग में यह खयाल आने लगता है कि किसी हिस्से में वह और बेहतर कर सकती थीं। ऐसे में फिल्म की कहानी या दर्शकों की प्रतिक्रिया से ज्यादा उनका ध्यान अपनी अदाकारी के मूल्यांकन पर चला जाता है।
एक कलाकार के लिए यह प्रक्रिया काफी व्यक्तिगत होती है। कुछ अभिनेता अपनी पुरानी फिल्मों को देखकर अपने काम का विश्लेषण करते हैं, जबकि कुछ कलाकार अपनी रिलीज़ को दोबारा देखने से दूरी रखते हैं। प्रीति जिंटा का मामला इसी दूसरी प्रवृत्ति से जुड़ा दिखाई देता है।
करियर के लंबे सफर के बावजूद वही असहजता
प्रीति जिंटा ने हिंदी सिनेमा में लंबे वक्त तक काम किया है और कई चर्चित फिल्मों में अपनी पहचान बनाई। उनके करियर में रोमांटिक ड्रामा, कॉमेडी और गंभीर भूमिकाओं से लेकर अलग-अलग तरह के किरदार शामिल रहे हैं।
इसके बावजूद अपनी स्क्रीन इमेज को लेकर उनकी व्यक्तिगत प्रतिक्रिया अलग रही है। हालिया बातचीत में उन्होंने साफ किया कि अपनी फिल्मों को दोबारा देखना उनकी आदत नहीं रही है। उनके लिए यह फैसला स्टारडम या दर्शकों की प्रतिक्रिया से ज्यादा व्यक्तिगत असहजता से जुड़ा है।
दर्शक और कलाकार का नज़रिया अलग
किसी फिल्म को दर्शक मनोरंजन, कहानी और किरदार के आधार पर देखते हैं। कलाकार के लिए वही फिल्म उसके काम का रिकॉर्ड होती है। इसलिए दोनों का नज़रिया अलग होना स्वाभाविक है।
प्रीति जिंटा के मामले में भी यही अंतर सामने आता है। दर्शकों ने जिन किरदारों को पसंद किया, एक्ट्रेस उन्हीं किरदारों को अपनी परफॉर्मेंस की कसौटी पर देखती हैं। उन्हें अपनी कमियां और उन जगहों की संभावना दिखाई देती है, जहां उनका मानना है कि वह बेहतर कर सकती थीं।
नए दौर में फिर चर्चा में प्रीति जिंटा
प्रीति जिंटा लंबे अंतराल के बाद फिर बड़े पर्दे पर सक्रिय हैं। उनकी हालिया और आगामी फिल्मों को लेकर दर्शकों के बीच दिलचस्पी बनी हुई है। हालिया इंटरव्यू में उन्होंने अभिनय से जुड़े अपने अनुभवों और सिनेमा में आए बदलावों पर भी बात की है।
ऐसे दौर में जब पुराने दौर के सितारों की फिल्मों को लेकर दर्शकों में नॉस्टैल्जिया फिर मजबूत हुआ है, प्रीति का अपनी ही फिल्मों को दोबारा न देखना उनके व्यक्तित्व और काम के प्रति उनके नज़रिये की एक अलग तस्वीर पेश करता है।
आलोचना से ज्यादा आत्ममूल्यांकन
प्रीति जिंटा की बात को केवल अपनी फिल्मों से दूरी के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं देता। उनके बयान में एक कलाकार का आत्ममूल्यांकन भी दिखाई देता है। स्क्रीन पर अपनी परफॉर्मेंस देखते समय उनका ध्यान इस बात पर चला जाता है कि वह उस पल को और बेहतर तरीके से कैसे निभा सकती थीं।
यानी उनके लिए फिल्म देखना केवल एक पुरानी याद को दोबारा जीना नहीं है। यह अपने काम को दोबारा परखने की प्रक्रिया बन जाती है।
यही वजह है कि वह अपनी फिल्मों को आम दर्शक की तरह देखने के बजाय उनसे दूरी बनाए रखना पसंद करती हैं। उनके इस नज़रिये से यह भी साफ होता है कि किसी कलाकार के लिए अपनी ही परफॉर्मेंस देखना हमेशा उपलब्धि का जश्न नहीं होता। कई बार वह आत्ममंथन और आत्मालोचना का कारण भी बन जाता है।
प्रीति जिंटा का अपनी फिल्मों को न देखने का फैसला किसी फिल्म या किरदार के प्रति बेरुखी नहीं बताता। उनके अपने बयान के मुताबिक, इसकी मुख्य वजह स्क्रीन पर खुद को देखकर अपनी परफॉर्मेंस को निष्पक्ष रूप से आंक न पाना है।
दर्शकों के लिए उनकी फिल्मों की अपनी यादें और अहमियत हैं, लेकिन एक कलाकार अपने काम को अलग नज़रिये से देखता है। प्रीति जिंटा का अनुभव इसी अंतर को सामने लाता है, जहां काम पूरा होने के बाद भी कलाकार के भीतर यह सवाल बना रहता है कि वह इसे और बेहतर कैसे कर सकता था।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।