राहुल गांधी की हिरासत पर थरूर का सवाल, दिल्ली के सियासी टकराव पर तीखी प्रतिक्रिया
चुनाव आयोग की ओर मार्च के बाद राहुल-प्रियंका हिरासत में, थरूर ने जताया विरोध
दिल्ली में INDIA ब्लॉक का प्रदर्शन, राहुल गांधी की हिरासत पर शशि थरूर ने सरकार को घेरा
INDIA ब्लॉक के चुनाव आयोग की ओर मार्च और आकाशवाणी भवन में लंबे धरने के बाद राहुल गांधी समेत विपक्षी नेता हिरासत में लिए गए। शशि थरूर ने कार्रवाई की आलोचना की और प्रदर्शनकारियों से एकजुटता जताई।
📍 LOCATION 🗓️ DATE ✍️
📍 नई दिल्ली | 🗓️ 7 अक्टूबर 2026 | ✍️ Himani Panwar
नई दिल्ली में चुनावी प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के तरीके पर कड़ा एतराज़ जताया है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को बाद में रिहा कर दिया गया।
INDIA ब्लॉक के सांसद 6 अक्टूबर को संसद परिसर से चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। प्रदर्शन का संबंध चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्ष की आपत्तियों से था। पुलिस बैरिकेडिंग के बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कुछ अन्य नेता आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठ गए। यह धरना करीब 8 घंटे चला।
शाम को दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कई दूसरे नेताओं को हिरासत में लिया। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक करीब 260 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें 10 सांसद शामिल थे। हिरासत में लिए गए नेताओं को न्यू पुलिस लाइंस, किंग्सवे कैंप ले जाया गया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
इस घटनाक्रम पर शशि थरूर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रतिक्रिया दी। उन्होंने राहुल गांधी को हिरासत में ले जाए जाने की तस्वीरों पर चिंता जताई और सरकार की प्रतिक्रिया को “disgraceful” यानी शर्मनाक बताया। थरूर ने विपक्ष के इस आरोप का भी समर्थन किया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। 13 करोड़ मतदाताओं से जुड़ा आंकड़ा थरूर और विपक्ष का दावा है, इसे इस रिपोर्ट में स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा रहा है।
थरूर प्रदर्शन में मौजूद नहीं थे। उनके मुताबिक उन्होंने करीब 4 महीने पहले बर्लिन में एक कॉन्फ्रेंस में शामिल होने की प्रतिबद्धता दी थी, इसलिए वह दिल्ली के मार्च में हिस्सा नहीं ले सके। उन्होंने दूर से प्रदर्शनकारियों के प्रति एकजुटता जाहिर की।
पुलिस का पक्ष है कि मार्च के लिए अनुमति नहीं ली गई थी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई। इस पूरे विवाद का केंद्रीय सवाल अब चुनावी प्रक्रिया पर विपक्ष की आपत्तियों, चुनाव आयोग की भूमिका और लोकतांत्रिक विरोध के दौरान पुलिस कार्रवाई की सीमा पर केंद्रित है।
यह घटनाक्रम केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन या कुछ नेताओं की हिरासत तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में 2 संस्थागत सवाल हैं। पहला, चुनावी प्रक्रिया पर उठने वाली आपत्तियों से चुनाव आयोग किस तरह निपटता है। दूसरा, निर्वाचित सांसदों के विरोध और कानून-व्यवस्था लागू करने की पुलिस की जिम्मेदारी के बीच संतुलन कहां तय होता है।
शशि थरूर की प्रतिक्रिया राजनीतिक रूप से अहम है, लेकिन उनके 13 करोड़ मतदाताओं से जुड़े दावे को तथ्य और आरोप के बीच साफ सीमा के साथ पढ़ना जरूरी है। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टिंग राहुल गांधी और अन्य नेताओं की हिरासत, लंबे धरने और बाद की रिहाई की पुष्टि करती है।
आगे सबसे अहम पहलू यह होगा कि विपक्ष अपने चुनावी आरोपों के समर्थन में कौन-सा दस्तावेजी सबूत पेश करता है और चुनाव आयोग उन सवालों का क्या संस्थागत जवाब देता है। लोकतांत्रिक बहस में आरोप की राजनीतिक ताकत से अधिक अहम उसकी दस्तावेजी पुष्टि होती है।