जर्मनी की विदेशी खुफिया एजेंसी के प्रमुख मार्टिन येगर ने रूस की कथित शैडो वॉर गतिविधियों को गंभीर खतरा बताया और सीधे हिंसक संघर्ष में फंसने की आशंका जताई।
जर्मनी की विदेशी खुफिया एजेंसी BND के प्रमुख मार्टिन येगर ने रूस के साथ संभावित हिंसक संघर्ष को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। Bundestag की खुफिया निगरानी समिति की सार्वजनिक सुनवाई में येगर ने कहा कि रूस और यूरोप के बीच टकराव ने अधिक खतरनाक रूप ले लिया है। उनके मुताबिक जर्मनी के रूस के साथ हिंसक संघर्ष में खिंचने का जोखिम बढ़ रहा है।
येगर ने रूस की कथित गतिविधियों को “शैडो वॉर” के तौर पर पेश किया। उनके अनुसार इसमें पारंपरिक युद्ध के बजाय ड्रोन हमले, साइबर ऑपरेशन, तोड़फोड़ और अन्य हाइब्रिड गतिविधियां शामिल हैं। जर्मन अधिकारियों का आरोप है कि ऐसी कार्रवाइयां यूरोपीय देशों की सुरक्षा और यूक्रेन को मिल रहे समर्थन को प्रभावित करने के मकसद से की जा रही हैं।
BND प्रमुख ने जर्मनी में Leipzig एयरपोर्ट से जुड़ी अगस्त की घटना को अपनी चेतावनी के प्रमुख उदाहरणों में शामिल किया। जर्मन अधिकारियों ने इस मामले में रूस की भूमिका का आरोप लगाया है और इसे व्यापक हाइब्रिड गतिविधियों के पैटर्न से जोड़कर देखा है।
हालांकि इस मामले में आरोप और स्थापित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखना जरूरी है। रूस ने नाटो देशों पर हमला करने की मंशा से इनकार किया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी कहा है कि रूस किसी पर हमला करने की योजना नहीं बना रहा।
जर्मनी की चेतावनी का एक अहम पहलू यह भी है कि BND को फिलहाल नाटो सदस्य देश पर रूस के किसी बड़े सैन्य हमले की योजना के संकेत नहीं मिले हैं।
येगर ने इसके बावजूद Baltic क्षेत्र में छोटे स्तर की सैन्य गतिविधियों की आशंका जताई। उनके मुताबिक रूस सीमित स्तर की कार्रवाई के जरिए नाटो की प्रतिक्रिया और उसकी राजनीतिक एकजुटता को परखने की कोशिश कर सकता है।
इसका मतलब यह नहीं है कि जर्मनी तत्काल बड़े युद्ध की घोषणा या भविष्यवाणी कर रहा है। खुफिया आकलन का केंद्र फिलहाल हाइब्रिड गतिविधियों और सीमित सैन्य उकसावे से पैदा होने वाले escalation risk पर है।
BND के आकलन के मुताबिक जर्मनी यूरोप में यूक्रेन के समर्थन का प्रमुख केंद्र है। इसी वजह से बर्लिन रूस की रणनीतिक प्राथमिकताओं में एक महत्वपूर्ण लक्ष्य के रूप में देखा जा रहा है।
येगर ने कहा कि जर्मनी रूस के यूरोप में प्रभाव बढ़ाने की कोशिश के लिए बड़ी बाधा बन गया है। उनके अनुसार जर्मनी के खिलाफ दबाव का एक मकसद यूक्रेन को मिलने वाले यूरोपीय समर्थन को कमजोर करना है।
जर्मनी ने यूक्रेन को सैन्य और आर्थिक समर्थन देने के साथ अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया है। इससे Berlin और Moscow के बीच रणनीतिक तनाव का स्तर बढ़ा है।
यूरोप की सुरक्षा बहस में हाइब्रिड वॉरफेयर अब केंद्रीय मुद्दा बन चुका है। इसमें किसी देश के खिलाफ पारंपरिक सेना भेजने के बजाय साइबर हमले, तोड़फोड़, जासूसी, ड्रोन गतिविधियां और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने जैसी कार्रवाइयां शामिल हो सकती हैं।
जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी BfV के प्रमुख सिनान सेलेन ने भी कहा कि रूसी गतिविधियां पारंपरिक जासूसी से आगे बढ़कर sabotage और assassination जैसी गतिविधियों तक पहुंच रही हैं। उन्होंने रक्षा उद्योग और सैन्य बुनियादी ढांचे को संभावित निशाने के रूप में बताया।
इन आरोपों को रूस ने लगातार खारिज किया है। इसलिए इन गतिविधियों से जुड़े प्रत्येक मामले में जांच के निष्कर्ष और उपलब्ध सबूत महत्वपूर्ण रहेंगे।
जर्मनी NATO का प्रमुख सदस्य है। अगर किसी नाटो देश पर सैन्य हमला होता है तो गठबंधन की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय होने का सवाल उठता है। इसी वजह से छोटे स्तर की ऐसी घटनाएं भी बड़े रणनीतिक जोखिम में बदल सकती हैं।
BND प्रमुख ने संकेत दिया कि रूस का उद्देश्य जरूरी नहीं कि तुरंत नाटो के साथ पूर्ण युद्ध शुरू करना हो। सीमित कार्रवाई के जरिए गठबंधन की प्रतिक्रिया परखना भी एक संभावित रणनीति हो सकती है।
यही स्थिति यूरोपीय सुरक्षा योजनाकारों के लिए चुनौती पैदा करती है। किसी घटना की गंभीरता का आकलन केवल हमले की प्रकृति से नहीं, बल्कि उसके बाद होने वाली राजनीतिक और सैन्य प्रतिक्रिया से भी जुड़ जाता है।
बर्लिन ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है। खुफिया एजेंसियों को लेकर भी जर्मनी में सुधार किए गए हैं।
BND और BfV के अधिकारियों का तर्क है कि बदलते सुरक्षा माहौल में खुफिया एजेंसियों को केवल जानकारी जुटाने तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। इसी संदर्भ में जर्मनी ने इस साल अपनी खुफिया व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।
यह बदलाव इस बात का संकेत है कि Berlin रूस से जुड़े सुरक्षा जोखिम को लंबे समय के रणनीतिक मुद्दे के रूप में देख रहा है।
रूस ने नाटो देशों पर हमला करने की किसी योजना से इनकार किया है। राष्ट्रपति पुतिन ने हाल में कहा कि रूस किसी देश को धमकी नहीं दे रहा है और अगर उस पर हमला होता है तो वह जवाब देगा।
इसलिए मौजूदा स्थिति में दो अलग दावों को अलग रखना जरूरी है। जर्मन खुफिया एजेंसियां रूस की गतिविधियों को बढ़ता सुरक्षा खतरा बता रही हैं, जबकि Moscow इन आरोपों और नाटो पर हमला करने की मंशा से इनकार कर रहा है।
मौजूदा घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू पूर्ण युद्ध की तत्काल संभावना नहीं, बल्कि escalation का जोखिम है।
अगर ड्रोन, साइबर हमले या sabotage जैसी गतिविधियां किसी नाटो सदस्य देश में गंभीर नुकसान पहुंचाती हैं और उनका जिम्मेदार किसी दूसरे राज्य से जुड़ा साबित होता है, तो राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो सकती है। इसके बाद जवाबी कदम और सैन्य गतिविधियां तनाव को और बढ़ा सकती हैं।
BND के मौजूदा आकलन में NATO पर बड़े रूसी हमले की तत्काल योजना के संकेत नहीं हैं। इसलिए मौजूदा चेतावनी को तत्काल युद्ध की घोषणा के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
जर्मन खुफिया आकलन में Baltic क्षेत्र को विशेष संवेदनशील माना गया है। छोटे स्तर की सैन्य गतिविधियां या सीमित घुसपैठ जैसी घटनाएं नाटो की सामूहिक प्रतिक्रिया को परखने का माध्यम बन सकती हैं, ऐसा BND प्रमुख ने चेताया है।
यूरोप के लिए चुनौती यह है कि ऐसे घटनाक्रम को समय रहते पहचाना जाए और उसे बड़े सैन्य टकराव में बदलने से रोका जाए।
जर्मनी की ताजा चेतावनी यूरोप की सुरक्षा नीति के सामने एक कठिन सवाल रखती है। अगर रूस के साथ प्रतिस्पर्धा पारंपरिक युद्ध के बजाय लगातार हाइब्रिड गतिविधियों के जरिए आगे बढ़ती है, तो नाटो देशों को अपनी सुरक्षा व्यवस्था को किस स्तर तक बदलना होगा?
फिलहाल Berlin का संदेश स्पष्ट है। रूस से जुड़ी गतिविधियों को केवल जासूसी या साइबर सुरक्षा का मुद्दा मानना पर्याप्त नहीं है। जर्मन खुफिया आकलन इन्हें व्यापक सुरक्षा चुनौती के रूप में देख रहा है।
फिर भी उपलब्ध जानकारी बड़े रूसी नाटो हमले की पुष्टि नहीं करती। मौजूदा चेतावनी का केंद्र संभावित उकसावे, हाइब्रिड गतिविधियों और उनसे पैदा होने वाले सीधे सैन्य टकराव के जोखिम पर है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।