रूस और यूक्रेन में हवाई हमलों की चेतावनी देने वाले ऐप साइबर हमलों की चपेट में आए हैं। यूक्रेन में परमाणु खतरे के फर्जी संदेशों के बाद रूस ने भी अपने सिस्टम पर हमले की जानकारी दी।
कीव/मॉस्को | 2 नवंबर 2026
By Mohd Haris
रूस-यूक्रेन युद्ध में साइबर हमले का नया मामला
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में डिजिटल सुरक्षा को लेकर एक नया मामला सामने आया है। दोनों देशों के नागरिकों को हवाई हमलों और संभावित खतरों की जानकारी देने वाले इमरजेंसी अलर्ट ऐप साइबर हमलों से प्रभावित हुए हैं। 2 नवंबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन में नागरिकों को परमाणु और रासायनिक हमले की फर्जी चेतावनियां मिलीं। इसके कुछ घंटों बाद रूस के आपातकालीन मंत्रालय ने भी अपने चेतावनी ऐप पर बड़े साइबर हमले की जानकारी दी।
दोनों घटनाओं ने युद्ध के दौरान इस्तेमाल होने वाले डिजिटल इमरजेंसी सिस्टम की सुरक्षा और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं।
यूक्रेन में परमाणु और केमिकल हमले के फर्जी संदेश
यूक्रेनी वायुसेना के मुताबिक, रविवार 1 नवंबर की शाम नागरिकों को हवाई हमलों की चेतावनी देने वाले ऐप पर कई गलत संदेश दिखाई दिए।
इनमें कीव और आसपास के इलाकों में परमाणु तथा रासायनिक खतरे की चेतावनी शामिल थी। कुछ संदेशों में सड़कों पर संभावित लड़ाई की जानकारी भी दी गई।
एक फर्जी संदेश में रूस की हाइपरसोनिक ओरेशनिक मिसाइल के इस्तेमाल का दावा किया गया।
हालांकि, यूक्रेनी वायुसेना ने इन संदेशों को गलत बताते हुए नागरिकों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की।
यूक्रेनी वायुसेना ने क्या कहा?
यूक्रेनी वायुसेना ने अपने आधिकारिक टेलीग्राम चैनल के जरिए बताया कि एयर अलर्ट ऐप बाहरी हस्तक्षेप से प्रभावित हुआ प्रतीत होता है।
वायुसेना ने स्पष्ट किया कि रेडिएशन का कोई खतरा नहीं है। नागरिकों से शांत रहने और आधिकारिक चैनल पर जारी अपडेट का पालन करने को कहा गया।
यह स्पष्टीकरण इसलिए अहम था क्योंकि परमाणु खतरे की चेतावनी आम नागरिकों के बीच गंभीर चिंता पैदा कर सकती है।
यूक्रेन ने रूस पर लगाया साइबर हमले का आरोप
यूक्रेन के सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक कम्युनिकेशंस, स्प्रावदी, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस साइबर हमले के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया।
हालांकि, यह यूक्रेनी संस्था का आरोप है। उपलब्ध जानकारी में ऐसा स्वतंत्र तकनीकी प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे साइबर हमले के स्रोत की निर्णायक शिनाख़्त हो सके।
इसलिए रूस की जिम्मेदारी को फिलहाल स्थापित तथ्य के बजाय यूक्रेन के आरोप के तौर पर देखा जाना चाहिए।
रूस ने भी बड़े साइबर अटैक की जानकारी दी
यूक्रेन में फर्जी चेतावनियों की खबर सामने आने के कुछ घंटों बाद रूस के आपातकालीन मंत्रालय ने सोमवार सुबह अपने इमरजेंसी अलर्ट ऐप पर बड़े साइबर हमले की जानकारी दी।
मंत्रालय के मुताबिक, साइबर हमले के कारण ऐप पर गलत सूचनाएं प्रसारित हुईं।
रूस में यह ऐप नागरिकों को संभावित ड्रोन हमलों की चेतावनी देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
रूसी मंत्रालय ने हमले के पीछे किसी देश, संगठन या समूह का नाम नहीं लिया। ऐसे में दोनों घटनाओं को एक ही साइबर ऑपरेशन का हिस्सा मानने के लिए फिलहाल पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
क्या कीव का पूरा अलर्ट सिस्टम प्रभावित हुआ?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यूक्रेन में हवाई हमलों की चेतावनी देने वाला व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला ऐप प्रभावित हुआ।
हालांकि, कीव प्रशासन के मुताबिक, राजधानी के लिए अलग से संचालित चेतावनी ऐप सामान्य रूप से काम कर रहा था।
इससे स्पष्ट होता है कि सभी चेतावनी सेवाओं के एक साथ बंद होने की पुष्टि नहीं हुई है।
खेरसॉन में संघर्षविराम खत्म होने के बाद घटनाक्रम
दोनों देशों के अलर्ट सिस्टम पर साइबर हमलों की खबर ऐसे समय सामने आई है, जब रूस के कब्जे वाले खेरसॉन क्षेत्र के एक हिस्से में स्थानीय स्तर पर लागू संघर्षविराम समाप्त हुआ है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, यह संघर्षविराम मंगलवार को शुरू हुआ था और रविवार को समाप्त हो गया।
हालांकि, संघर्षविराम की समाप्ति और साइबर हमलों के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
नागरिकों की सुरक्षा के लिए क्यों अहम हैं एयर अलर्ट ऐप?
रूस-यूक्रेन युद्ध में एयर अलर्ट ऐप नागरिकों तक संभावित मिसाइल और ड्रोन हमलों की चेतावनी पहुंचाने का एक अहम माध्यम हैं।
इन प्रणालियों का मकसद लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर जाने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने में मदद देना है।
ऐसी सेवाओं पर फर्जी संदेश प्रसारित होने से 2 तरह के जोखिम पैदा होते हैं।
पहला, गलत चेतावनियों के कारण नागरिकों में भय और भ्रम फैल सकता है।
दूसरा, बार-बार गलत अलर्ट आने से भविष्य की वास्तविक चेतावनियों पर भरोसा कमजोर पड़ने का खतरा रहता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।