मुजफ्फरनगर में RTI की समीक्षा बैठक, 565 अधिकारियों पर लग चुका है जुर्माना
Wasi Siddiqui
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2026-10-01 16:27:38
मुजफ्फरनगर में RTI मामलों की समीक्षा, 162 प्रकरण आयोग में लंबित
RTI पर अफसरों की तैयारी की खुली पोल, 565 अधिकारियों पर लगा अर्थदंड
सूचना के अधिकार में लापरवाही पर कार्रवाई, मुजफ्फरनगर के 565 अधिकारी दंडित
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मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
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1 अक्टूबर 2026
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Wasi Siddiqui
मुजफ्फरनगर में RTI व्यवस्था की समीक्षा
मुजफ्फरनगर में सूचना का अधिकार यानी RTI कानून के तहत मामलों के निस्तारण और सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया की समीक्षा की गई। उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने विकास भवन स्थित सभागार में जिला स्तरीय जन सूचना अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।
बैठक का मुख्य मकसद RTI आवेदनों के समयबद्ध निस्तारण और आवेदकों को जिला स्तर पर ही सूचना उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत करना रहा। समीक्षा के दौरान जिले से जुड़े लंबित मामलों और अधिकारियों की RTI कानून से संबंधित जानकारी का भी जायजा लिया गया।
सूचना आयोग में 162 मामले लंबित
समीक्षा में सामने आया कि मुजफ्फरनगर जिले से जुड़े 162 मामले अभी राज्य सूचना आयोग में लंबित हैं। इनमें सबसे पुराना मामला वर्ष 2024 का बताया गया है।
लंबित मामलों का मुद्दा इसलिए अहम है क्योंकि RTI व्यवस्था का मूल उद्देश्य नागरिकों को सरकारी कामकाज से संबंधित सूचना निर्धारित प्रक्रिया और समयसीमा के भीतर उपलब्ध कराना है। आयोग स्तर पर मामलों के लंबित रहने से सूचना मांगने वाले आवेदकों को अपने मामलों के निस्तारण के लिए आगे की प्रक्रिया का इंतजार करना पड़ता है।
565 अधिकारियों पर लगाया जा चुका है अर्थदंड
राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम के मुताबिक, सूचना देने में लापरवाही और RTI अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में मुजफ्फरनगर जिले के 565 अधिकारियों को अब तक दंडित किया जा चुका है।
इन मामलों में प्रावधानों के तहत अधिकतम 25 हजार रुपये तक का अर्थदंड लगाया गया। बताया गया कि कई अधिकारियों से जुर्माने की वसूली हो चुकी है, जबकि अन्य मामलों में वसूली की प्रक्रिया विचाराधीन है।
यह आंकड़ा बताता है कि RTI से जुड़े मामलों में सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया और जवाबदेही प्रशासनिक स्तर पर लगातार निगरानी का विषय बनी हुई है।
राजस्व और पंचायती राज विभाग के मामले ज्यादा
समीक्षा के दौरान राजस्व विभाग और पंचायती राज विभाग से जुड़े मामलों की संख्या अधिक सामने आने की जानकारी दी गई। ये दोनों विभाग आम नागरिकों से सीधे जुड़े प्रशासनिक कार्यों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
राजस्व विभाग से संबंधित रिकॉर्ड, भूमि और प्रशासनिक मामलों से जुड़ी सूचनाएं तथा पंचायती राज विभाग से जुड़े स्थानीय निकाय और विकास कार्यों से संबंधित जानकारी RTI आवेदनों का हिस्सा बनती है। ऐसे मामलों में सूचना की उपलब्धता और रिकॉर्ड प्रबंधन का सीधा असर आवेदकों के अधिकारों पर पड़ता है।
RTI कानून की जानकारी पर अधिकारियों से पूछे गए सवाल
बैठक के दौरान जन सूचना अधिकारियों से RTI अधिनियम और उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली से संबंधित सवाल पूछे गए। समीक्षा में कुछ अधिकारियों की कानूनी प्रक्रिया संबंधी तैयारी कमजोर पाई गई।
बताया गया कि कुछ अधिकारी द्वितीय अपील और शिकायत के बीच अंतर स्पष्ट नहीं कर सके। इसके अलावा उत्तर प्रदेश सूचना का अधिकार नियमावली 2015 में हुए 2019 के संशोधन से संबंधित जानकारी को लेकर भी पर्याप्त स्पष्टता सामने नहीं आई।
दूसरे विभाग से संबंधित RTI आवेदन को निर्धारित प्रक्रिया के तहत कितने समय में संबंधित विभाग को स्थानांतरित किया जाना चाहिए, इस सवाल पर भी कुछ अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।
राज्य सूचना आयुक्त ने दिए निर्देश
राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने समीक्षा के दौरान अधिकारियों को RTI अधिनियम और संबंधित नियमावली का गहन अध्ययन करने के निर्देश दिए।
उन्होंने जन सूचना अधिकारियों से आवेदकों को निर्धारित समयसीमा के भीतर सूचना उपलब्ध कराने और RTI मामलों के निस्तारण में लापरवाही से बचने को कहा।
बैठक में प्रशासनिक स्तर पर RTI प्रक्रिया की जानकारी बढ़ाने और लंबित मामलों के निस्तारण पर ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया गया।
RTI व्यवस्था में जवाबदेही क्यों महत्वपूर्ण है
सूचना का अधिकार नागरिकों को सरकारी रिकॉर्ड और प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जुड़ी जानकारी हासिल करने का कानूनी माध्यम देता है। इस व्यवस्था में जन सूचना अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि आवेदन मिलने के बाद सूचना उपलब्ध कराने या कानून के अनुरूप जवाब देने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारी पर होती है।
यदि आवेदन समय पर निपटता नहीं है या कानून के प्रावधानों का पालन नहीं होता, तो मामला अपील और शिकायत की प्रक्रिया तक पहुंच सकता है। इससे आवेदक के लिए सूचना हासिल करने की प्रक्रिया लंबी हो सकती है।
मुजफ्फरनगर में 162 मामलों का आयोग में लंबित होना और 565 अधिकारियों पर अब तक अर्थदंड लगाए जाने की जानकारी इसी प्रशासनिक जवाबदेही के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
आगे क्या होगा
समीक्षा बैठक के बाद जन सूचना अधिकारियों को RTI अधिनियम और नियमावली की प्रक्रिया को समझने, आवेदनों पर समयबद्ध कार्रवाई करने और लंबित मामलों के निस्तारण पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
आने वाले समय में जिले में RTI मामलों की स्थिति इस बात से भी आंकी जाएगी कि लंबित प्रकरणों के निस्तारण और नए आवेदनों के जवाब में कितनी समयबद्धता आती है।
मुजफ्फरनगर में RTI मामलों की समीक्षा ने प्रशासनिक स्तर पर सूचना के अधिकार से जुड़ी कई चुनौतियों को सामने रखा है। 162 मामले सूचना आयोग में लंबित हैं और 565 अधिकारियों पर अब तक अर्थदंड लगाए जाने की जानकारी दी गई है।
समीक्षा बैठक में अधिकारियों की RTI संबंधी कानूनी समझ को भी परखा गया। राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद नदीम ने जन सूचना अधिकारियों को कानून और नियमावली का अध्ययन करने तथा आवेदकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय पर सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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Wasi Siddiqui
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।