भारतीय रुपया मंगलवार को डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 94.68 रुपये तक पहुंचा। बढ़ते Middle East तनाव और Brent crude में तेजी ने currency पर दबाव बढ़ाया। Traders के अनुसार state-run banks ने 94.70 के आसपास डॉलर बेचे, जिसे RBI intervention माना गया। भारतीय शेयर बाजार भी दबाव में रहा।
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📍 मुंबई | 📰 8 सितंबर 2026 | ✍️ Apurva Choudhary
रुपया कमजोर होकर ₹94.68 तक पहुंचा
भारतीय रुपया मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव में रहा। शुरुआती कारोबार में रुपया 0.2 प्रतिशत कमजोर होकर ₹94.68 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। यह कमजोरी ऐसे समय आई है जब Middle East में बढ़ते तनाव के बीच crude oil prices में तेजी देखी जा रही है।
Reuters के मुताबिक, बाजार में State-run Banks को करीब ₹94.70 प्रति डॉलर के स्तर पर डॉलर बेचते हुए देखा गया। दो Bankers और एक Foreign Exchange Trader ने इन Dollar Sales को RBI की ओर से संभावित Intervention से जोड़ा।
बाद के कारोबार में रुपये पर दबाव और बढ़ा और Reuters के अनुसार भारतीय मुद्रा ₹94.8175 प्रति डॉलर पर बंद हुई। यह जुलाई के अंत के बाद रुपये की सबसे बड़ी एक-दिवसीय गिरावट थी।
RBI Intervention से गिरावट सीमित करने की कोशिश
Foreign Exchange Market में RBI की भूमिका इस समय महत्वपूर्ण हो गई है। पिछले करीब दो सप्ताह से State-run Banks की Dollar Selling देखी जा रही है, जिसे बाजार प्रतिभागी केंद्रीय बैंक के Intervention से जोड़ रहे हैं।
RBI का संभावित Intervention रुपये को किसी निश्चित स्तर पर स्थायी रूप से रोकने की गारंटी नहीं देता। इसका उद्देश्य बाजार में अत्यधिक volatility को कम करना और अचानक होने वाली तेज गिरावट को सीमित करना हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार तक Bankers का अनुमान था कि हाल के हफ्तों में RBI ने रुपये को समर्थन देने के लिए कम से कम 8 अरब डॉलर बेचे थे। मंगलवार के कारोबार में भी State-run Banks की Dollar Selling ने रुपये की गिरावट को कुछ हद तक cushion किया, लेकिन बढ़ते Oil Prices और Importer Dollar Demand ने दबाव बनाए रखा।
Crude Oil बना रुपये के लिए बड़ा दबाव
रुपये की कमजोरी का एक बड़ा कारण Crude Oil Prices में तेजी है। Brent Crude करीब $97.5 प्रति बैरल तक पहुंच गया था। बाद में Brent ने लगभग $99.46 प्रति बैरल का intraday high भी छुआ, जबकि Reuters के अनुसार एक समय यह करीब $98.39 पर कारोबार कर रहा था।
Middle East में बढ़ता तनाव और Saudi Arabia में Energy Facilities पर Houthi हमलों ने Global Oil Supply को लेकर चिंता बढ़ाई है। इससे Oil Market में Geopolitical Risk Premium बढ़ा है।
भारत अपनी Crude Oil जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर भारत के Import Bill पर दबाव बढ़ सकता है।
Middle East तनाव का Currency Market पर असर
Currency Market में रुपये की दिशा अब केवल Dollar Index या घरेलू आर्थिक आंकड़ों से तय नहीं हो रही है। Global Geopolitical Developments भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
Middle East में लंबे संघर्ष की आशंका से Oil Supply और Shipping Routes को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। Strait of Hormuz में भी Shipping Traffic में कमी की खबरों ने Energy Supply Risks को बढ़ाया है।
अगर Crude Oil लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो भारत के लिए Import Cost बढ़ सकती है। इससे Dollar की मांग बढ़ने और रुपये पर अतिरिक्त दबाव आने की संभावना रहती है।
हालांकि Oil Prices का भविष्य केवल Supply Disruption पर निर्भर नहीं है। Global Demand, Alternative Supply Routes, Non-OPEC Production और प्रमुख Importing Economies की मांग भी कीमतों को प्रभावित कर रही हैं।
भारतीय शेयर बाजार भी दबाव में
Rupee और Crude Oil की चाल का असर भारतीय Equity Market पर भी दिखाई दिया।
Reuters के अनुसार मंगलवार सुबह 10:06 AM IST पर Nifty 50 करीब 0.46 प्रतिशत गिरकर 23,668.85 पर था, जबकि Sensex 0.53 प्रतिशत गिरकर 75,727.30 पर कारोबार कर रहा था।
Higher Crude Prices से उन कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है जिनकी लागत Energy Imports से जुड़ी है। साथ ही Geopolitical Uncertainty से Investors की Risk Appetite भी प्रभावित होती है।
Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक उस समय 16 प्रमुख Domestic Sectors में से 12 में गिरावट दर्ज की गई थी। Financials और Private Banks भी दबाव में थे।
यह आंकड़े दिन के शुरुआती कारोबार के हैं। बाद के कारोबार में Market Movement अलग रहा और इसलिए इन्हें अंतिम Closing Levels के रूप में पेश नहीं किया जाना चाहिए।
क्या रुपया ₹95 के पार जा सकता है?
रुपये के आगे के रुख को लेकर निश्चित स्तर बताना अभी मुश्किल है। Market में मुख्य निगाह Crude Oil Prices, Middle East Developments, Dollar Demand, Foreign Fund Flows और RBI की संभावित कार्रवाई पर रहेगी।
Reuters की एक हालिया Poll-Based रिपोर्ट में Strategists ने माना था कि RBI की Dollar Selling आने वाले महीनों में रुपये को कुछ समर्थन दे सकती है, हालांकि Currency के कमजोर स्तरों पर बने रहने की संभावना भी जताई गई थी।
अगर Crude Oil लगातार ऊंचा रहता है और Middle East में Supply Disruptions बढ़ते हैं, तो रुपये पर दबाव जारी रह सकता है। दूसरी ओर, Oil Prices में नरमी या Geopolitical तनाव कम होने पर रुपये को राहत मिल सकती है।
RBI के लिए चुनौती क्या है?
RBI के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक तरफ रुपये में अचानक और तेज गिरावट को रोकना जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ विदेशी मुद्रा बाजार में अत्यधिक हस्तक्षेप से बचना भी महत्वपूर्ण है।
Market Intervention रुपये को short-term volatility से बचा सकता है, लेकिन अगर External Pressure लंबे समय तक बना रहता है तो केवल Dollar Selling से Currency Trend को स्थायी रूप से बदलना मुश्किल हो सकता है।
इसलिए आने वाले दिनों में Crude Oil और Global Geopolitical Situation रुपये के लिए सबसे महत्वपूर्ण external variables में बने रह सकते हैं।
आगे किन संकेतकों पर रहेगी नजर?
Currency Market में आने वाले दिनों में Oil Prices के साथ-साथ अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और Federal Reserve की Monetary Policy Expectations पर भी नजर रहेगी।
Reuters के अनुसार अमेरिकी Inflation Data भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि US Interest Rate Expectations Dollar की दिशा और Emerging Market Currencies पर असर डाल सकती हैं।
भारत के लिए चुनौती यह है कि अगर Oil महंगा रहता है, Dollar मजबूत होता है और Importer Demand बढ़ती है, तो रुपये पर एक साथ कई तरफ से दबाव आ सकता है।
फिलहाल RBI का संभावित Intervention रुपये की गिरावट को cushion कर रहा है, लेकिन बाजार की अगली दिशा largely Crude Oil और Middle East Developments पर निर्भर रहने की संभावना है।