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RBI ने जून में खरीदे $561 मिलियन, $73 बिलियन Forex Inflow से रुपये को सहारा

Apurva Choudhary 2026-08-25 21:52:47
RBI ने जून में खरीदे $561 मिलियन, $73 बिलियन Forex Inflow से रुपये को सहारा


RBI जून 2026 में करीब $561 मिलियन का नेट डॉलर बायर रहा। केंद्रीय बैंक ने $30.89 बिलियन के डॉलर खरीदे और $30.33 बिलियन बेचे। इसी दौरान RBI की विशेष forex liquidity पहल के बाद 8 जून से 21 अगस्त तक करीब $72.85 बिलियन का विदेशी मुद्रा inflow आया। इससे रुपये और RBI के forex buffer को सहारा मिला।

📍 लोकेशन: मुंबई, भारत
📰 डेट: 25 अगस्त 2026
✍️ Byline: Apurva Choudhary 


जून में RBI बना Net Dollar Buyer
भारतीय रिजर्व बैंक के जून 2026 के forex data ने विदेशी मुद्रा बाजार में केंद्रीय बैंक की भूमिका को लेकर अहम तस्वीर पेश की है। जून में RBI ने कुल $30.89 बिलियन के डॉलर खरीदे, जबकि $30.33 बिलियन की बिक्री की।
इस तरह महीने के दौरान RBI की शुद्ध डॉलर खरीद करीब $561 मिलियन रही। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अप्रैल और मई में केंद्रीय बैंक नेट डॉलर सेलर रहा था।
मई में RBI की नेट डॉलर बिक्री करीब $6 बिलियन और अप्रैल में लगभग $8.9 बिलियन रही थी। जून में तस्वीर बदलने से विदेशी मुद्रा बाजार में RBI की गतिविधियों का रुख अलग दिखाई देता है।

RBI की Forex Strategy में क्यों आया बदलाव?
जून के आंकड़ों को सीधे तौर पर सिर्फ रुपये को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखना सही नहीं होगा। विदेशी मुद्रा बाजार में RBI की खरीद-बिक्री कई कारकों से प्रभावित होती है, जिनमें मार्केट इंटरवेंशन, स्वैप ट्रांजैक्शन, विदेशी पूंजी प्रवाह और सिस्टम में आई डॉलर liquidity को absorb करना शामिल है।
यानी $561 मिलियन की नेट खरीद को एक अकेले policy objective का नतीजा मानना सावधानी के खिलाफ होगा। यह आंकड़ा RBI के व्यापक forex operations की एक तस्वीर देता है।
फिर भी, मजबूत foreign inflows के बीच RBI का डॉलर खरीदना बाजार में अतिरिक्त विदेशी मुद्रा को absorb करने की उसकी भूमिका को दिखाता है।

$72.85 बिलियन का Forex Inflow क्यों अहम?
RBI की जून में घोषित विशेष USD-INR swap facility के बाद विदेशी मुद्रा प्रवाह में उल्लेखनीय तेजी दिखाई दी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 8 जून से 21 अगस्त के बीच करीब $72.85 बिलियन का forex inflow दर्ज हुआ।
इस inflow में सबसे बड़ा हिस्सा FCNR(B) deposits से आया। इसके अलावा Overseas Foreign Currency Borrowings और External Commercial Borrowings भी इसमें शामिल रहे।
लगभग $65.4 बिलियन FCNR(B) deposits, $4.86 बिलियन Overseas Foreign Currency Borrowings और $2.59 बिलियन External Commercial Borrowings से जुड़े रहे। इससे domestic financial system में foreign currency liquidity का cushion मजबूत हुआ।

रुपये को कैसे मिला सहारा?
भारतीय रुपया मई में डॉलर के मुकाबले 96.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक कमजोर हुआ था। उस समय Middle East tensions और crude oil prices में तेजी ने भारत के import bill तथा dollar demand को लेकर चिंता बढ़ाई थी।
इसके बाद विदेशी मुद्रा inflows और RBI के market operations ने currency market को कुछ support दिया। हालांकि रुपये की स्थिरता को सिर्फ RBI intervention से जोड़ना उचित नहीं होगा।
Global dollar movement, crude prices, capital flows और overall risk sentiment भी USD-INR की दिशा तय करते हैं। मौजूदा स्थिति को RBI intervention, foreign inflows और forex liquidity के संयुक्त असर के रूप में देखना ज्यादा संतुलित होगा।

RBI के Forward Dollar Position में भी बदलाव
जून के अंत तक RBI की outstanding net forward dollar sales घटकर करीब $103.3 बिलियन रह गईं। मई के अंत में यह आंकड़ा लगभग $106.7 बिलियन था।
Forward position में यह बदलाव RBI के forex operations में adjustment का संकेत देता है। हालांकि केवल इस आंकड़े के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि RBI ने कितने डॉलर सीधे रुपये को support करने के लिए इस्तेमाल किए।
Forex market में spot और forward operations अलग-अलग परिस्थितियों में अलग उद्देश्य पूरा कर सकते हैं। इसलिए इन आंकड़ों की व्याख्या व्यापक संदर्भ के साथ करना जरूरी है।

Forex Reserves भी मजबूत हुए
Foreign currency inflows के बीच भारत के forex reserves में भी मजबूती देखी गई। 14 अगस्त तक देश का foreign exchange reserve करीब $716.9 बिलियन के छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया था।
एक सप्ताह में reserves में करीब $10 बिलियन की वृद्धि दर्ज की गई। पिछले सात सप्ताह में कुल वृद्धि लगभग $50 बिलियन रही।
मजबूत reserves RBI को external shocks और currency market में अचानक बढ़ने वाली volatility से निपटने के लिए बेहतर buffer देते हैं। हालांकि reserves का बढ़ना अपने आप में रुपये की स्थायी मजबूती की गारंटी नहीं है।

क्या RBI रुपये को 96 के नीचे बनाए रखेगा?
ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। RBI की सामान्य monetary और forex policy किसी एक fixed exchange-rate level को हर स्थिति में बचाने पर आधारित नहीं होती।
केंद्रीय बैंक का बड़ा उद्देश्य अत्यधिक volatility और disorderly market conditions को नियंत्रित करना होता है। इसलिए किसी खास स्तर के आसपास RBI की मौजूदगी की market perception को स्थायी exchange-rate target के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
भारतीय currency market के लिए crude oil की कीमत सबसे महत्वपूर्ण external factors में बनी हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी से dollar demand बढ़ सकती है।
एक सरल chain को इस तरह समझा जा सकता है—महंगा crude → बड़ा import bill → ज्यादा dollar demand → रुपये पर दबाव।
यही वजह है कि मजबूत forex inflows के बावजूद RBI और बाजार की नजर global energy prices पर बनी रहेगी। अगर geopolitical tensions लंबे समय तक जारी रहते हैं तो currency market में volatility फिर बढ़ सकती है।

Economic Growth Outlook में भी सुधार
RBI के latest bulletin में domestic economic activity को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। High-frequency indicators में मजबूती और manufacturing तथा services sector में बेहतर operating conditions की ओर इशारा किया गया है।
केंद्रीय बैंक ने financial year के लिए economic growth forecast को पहले के 6.6% से बढ़ाकर 6.7% किया था। इससे domestic growth outlook में confidence का संकेत मिलता है।
हालांकि inflation और supply-side pressures पर नजर रखना अभी भी जरूरी है। Global commodity prices और geopolitical developments भारत की inflation trajectory को प्रभावित कर सकते हैं

आगे रुपये की दिशा किन बातों पर निर्भर?

भारतीय रिजर्व बैंक के जून 2026 के forex data ने विदेशी मुद्रा बाजार में केंद्रीय बैंक की भूमिका को लेकर अहम तस्वीर पेश की है। जून में RBI ने कुल $30.89 बिलियन के डॉलर खरीदे, जबकि $30.33 बिलियन की बिक्री की।

इस तरह महीने के दौरान RBI की शुद्ध डॉलर खरीद करीब $561 मिलियन रही। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अप्रैल और मई में केंद्रीय बैंक नेट डॉलर सेलर रहा था।

मई में RBI की नेट डॉलर बिक्री करीब $6 बिलियन और अप्रैल में लगभग $8.9 बिलियन रही थी। जून में तस्वीर बदलने से विदेशी मुद्रा बाजार में RBI की गतिविधियों का रुख अलग दिखाई देता है।


RBI की Forex Strategy में क्यों आया बदलाव?

जून के आंकड़ों को सीधे तौर पर सिर्फ रुपये को मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखना सही नहीं होगा। विदेशी मुद्रा बाजार में RBI की खरीद-बिक्री कई कारकों से प्रभावित होती है, जिनमें मार्केट इंटरवेंशन, स्वैप ट्रांजैक्शन, विदेशी पूंजी प्रवाह और सिस्टम में आई डॉलर liquidity को absorb करना शामिल है।

यानी $561 मिलियन की नेट खरीद को एक अकेले policy objective का नतीजा मानना सावधानी के खिलाफ होगा। यह आंकड़ा RBI के व्यापक forex operations की एक तस्वीर देता है।

फिर भी, मजबूत foreign inflows के बीच RBI का डॉलर खरीदना बाजार में अतिरिक्त विदेशी मुद्रा को absorb करने की उसकी भूमिका को दिखाता है।


$72.85 बिलियन का Forex Inflow क्यों अहम?

RBI की जून में घोषित विशेष USD-INR swap facility के बाद विदेशी मुद्रा प्रवाह में उल्लेखनीय तेजी दिखाई दी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 8 जून से 21 अगस्त के बीच करीब $72.85 बिलियन का forex inflow दर्ज हुआ।

इस inflow में सबसे बड़ा हिस्सा FCNR(B) deposits से आया। इसके अलावा Overseas Foreign Currency Borrowings और External Commercial Borrowings भी इसमें शामिल रहे।

लगभग $65.4 बिलियन FCNR(B) deposits, $4.86 बिलियन Overseas Foreign Currency Borrowings और $2.59 बिलियन External Commercial Borrowings से जुड़े रहे। इससे domestic financial system में foreign currency liquidity का cushion मजबूत हुआ।


रुपये को कैसे मिला सहारा?

भारतीय रुपया मई में डॉलर के मुकाबले 96.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक कमजोर हुआ था। उस समय Middle East tensions और crude oil prices में तेजी ने भारत के import bill तथा dollar demand को लेकर चिंता बढ़ाई थी।

इसके बाद विदेशी मुद्रा inflows और RBI के market operations ने currency market को कुछ support दिया। हालांकि रुपये की स्थिरता को सिर्फ RBI intervention से जोड़ना उचित नहीं होगा।

Global dollar movement, crude prices, capital flows और overall risk sentiment भी USD-INR की दिशा तय करते हैं। मौजूदा स्थिति को RBI intervention, foreign inflows और forex liquidity के संयुक्त असर के रूप में देखना ज्यादा संतुलित होगा।


RBI के Forward Dollar Position में भी बदलाव

जून के अंत तक RBI की outstanding net forward dollar sales घटकर करीब $103.3 बिलियन रह गईं। मई के अंत में यह आंकड़ा लगभग $106.7 बिलियन था।

Forward position में यह बदलाव RBI के forex operations में adjustment का संकेत देता है। हालांकि केवल इस आंकड़े के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि RBI ने कितने डॉलर सीधे रुपये को support करने के लिए इस्तेमाल किए।

Forex market में spot और forward operations अलग-अलग परिस्थितियों में अलग उद्देश्य पूरा कर सकते हैं। इसलिए इन आंकड़ों की व्याख्या व्यापक संदर्भ के साथ करना जरूरी है।


Forex Reserves भी मजबूत हुए

Foreign currency inflows के बीच भारत के forex reserves में भी मजबूती देखी गई। 14 अगस्त तक देश का foreign exchange reserve करीब $716.9 बिलियन के छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया था।

एक सप्ताह में reserves में करीब $10 बिलियन की वृद्धि दर्ज की गई। पिछले सात सप्ताह में कुल वृद्धि लगभग $50 बिलियन रही।

मजबूत reserves RBI को external shocks और currency market में अचानक बढ़ने वाली volatility से निपटने के लिए बेहतर buffer देते हैं। हालांकि reserves का बढ़ना अपने आप में रुपये की स्थायी मजबूती की गारंटी नहीं है।

क्या RBI रुपये को 96 के नीचे बनाए रखेगा?

ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। RBI की सामान्य monetary और forex policy किसी एक fixed exchange-rate level को हर स्थिति में बचाने पर आधारित नहीं होती।

केंद्रीय बैंक का बड़ा उद्देश्य अत्यधिक volatility और disorderly market conditions को नियंत्रित करना होता है। इसलिए किसी खास स्तर के आसपास RBI की मौजूदगी की market perception को स्थायी exchange-rate target के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

अगर crude oil prices फिर तेज होते हैं, geopolitical tensions बढ़ते हैं या global risk sentiment कमजोर पड़ता है तो रुपये पर दोबारा दबाव आ सकता है।


महंगा Crude बना हुआ है बड़ा Risk

भारतीय currency market के लिए crude oil की कीमत सबसे महत्वपूर्ण external factors में बनी हुई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में तेजी से dollar demand बढ़ सकती है।

एक सरल chain को इस तरह समझा जा सकता है—महंगा crude → बड़ा import bill → ज्यादा dollar demand → रुपये पर दबाव।

यही वजह है कि मजबूत forex inflows के बावजूद RBI और बाजार की नजर global energy prices पर बनी रहेगी। अगर geopolitical tensions लंबे समय तक जारी रहते हैं तो currency market में volatility फिर बढ़ सकती है।


Economic Growth Outlook में भी सुधार

RBI के latest bulletin में domestic economic activity को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। High-frequency indicators में मजबूती और manufacturing तथा services sector में बेहतर operating conditions की ओर इशारा किया गया है।

केंद्रीय बैंक ने financial year के लिए economic growth forecast को पहले के 6.6% से बढ़ाकर 6.7% किया था। इससे domestic growth outlook में confidence का संकेत मिलता है।

हालांकि inflation और supply-side pressures पर नजर रखना अभी भी जरूरी है। Global commodity prices और geopolitical developments भारत की inflation trajectory को प्रभावित कर सकते हैं।


आगे रुपये की दिशा किन बातों पर निर्भर?

आने वाले हफ्तों में currency market के लिए कई factors अहम रहेंगे। इनमें crude oil prices, Middle East और Iran से जुड़ी geopolitical स्थिति, foreign capital inflows तथा RBI की forex operations strategy प्रमुख हैं।

अगर foreign inflows मजबूत बने रहते हैं और crude prices में नरमी आती है तो रुपये को अतिरिक्त stability मिल सकती है। इसके उलट oil prices में तेज उछाल, global dollar strength या geopolitical escalation currency market पर फिर दबाव डाल सकते हैं।

इसलिए मौजूदा forex cushion को सकारात्मक development जरूर माना जा सकता है, लेकिन इसे currency market के लिए permanent protection समझना उचित नहीं होगा।


निष्कर्ष: Forex Cushion मजबूत, लेकिन जोखिम कायम

जून 2026 में RBI का करीब $561 मिलियन का net dollar buyer बनना और 8 जून से 21 अगस्त के बीच लगभग $72.85 बिलियन का forex inflow भारतीय currency market के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

मजबूत capital inflows और forex reserves ने RBI के पास उपलब्ध liquidity cushion को बेहतर किया है। इससे रुपये में अचानक बढ़ने वाली volatility को संभालने की क्षमता मजबूत हो सकती है।

लेकिन currency market में जोखिम अभी खत्म नहीं हुए हैं। Crude oil prices, geopolitical tensions, global dollar movement और foreign capital flows आने वाले समय में रुपये की दिशा तय करने वाले प्रमुख factors रहेंगे।

इसलिए जून का RBI forex data रुपये के लिए एक मजबूत cushion की तस्वीर जरूर पेश करता है, लेकिन इसे स्थायी currency stability की guarantee मानना सही नहीं होगा।

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Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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