घरेलू विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया 19 पैसे कमजोर होकर 95.35 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। शुरुआती मजबूती के बाद डॉलर की खरीद तेज होने से रुपया दबाव में आ गया। हालांकि कमजोर डॉलर इंडेक्स और नरम कच्चे तेल की कीमतों ने गिरावट को सीमित रखने में मदद की।
📍 मुंबई
📰 02 जुलाई 2026
✍️ Apurva Choudhary
रुपया कमजोर: डॉलर की मांग बढ़ने से घरेलू मुद्रा पर दबाव
भारतीय विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार को रुपया एक बार फिर दबाव में दिखाई दिया। कारोबार की शुरुआत सकारात्मक रहने के बावजूद दिन चढ़ने के साथ डॉलर की मांग बढ़ी, जिससे घरेलू मुद्रा अपनी शुरुआती बढ़त गंवा बैठी। कारोबारी सत्र के अंत में रुपया 19 पैसे की गिरावट के साथ 95.35 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जो 11 जून के बाद इसका सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है।
शुरुआत मजबूत, लेकिन अंत में बढ़ा दबाव
सुबह के कारोबार में वैश्विक बाजार से मिले सकारात्मक संकेतों के चलते रुपये ने मजबूती के साथ शुरुआत की। डॉलर इंडेक्स में कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने शुरुआती कारोबार में घरेलू मुद्रा को सहारा दिया।
हालांकि जैसे-जैसे कारोबार आगे बढ़ा, आयातकों और अन्य बाजार प्रतिभागियों की ओर से डॉलर की खरीद बढ़ती गई। इसका असर रुपये पर पड़ा और वह दिन के उच्च स्तर से फिसलकर अंत में गिरावट के साथ बंद हुआ।
डॉलर की मांग बनी प्रमुख वजह
विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू बाजार में डॉलर की बढ़ती मांग फिलहाल रुपये पर दबाव बनाए हुए है। विदेशी भुगतान, आयात संबंधी जरूरतें और बाजार में डॉलर खरीदारी बढ़ने से रुपये की चाल प्रभावित हो रही है।
हालांकि वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स में कमजोरी और ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट ने रुपये को कुछ राहत भी दी। यदि ये दोनों कारक प्रतिकूल रहते तो गिरावट और अधिक हो सकती थी।
कच्चे तेल में नरमी से मिली सीमित राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार एक प्रतिशत से अधिक गिरकर 71 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह सकारात्मक संकेत माना जाता है क्योंकि इससे आयात बिल पर दबाव कम पड़ सकता है।
इसके साथ ही प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर इंडेक्स में आई कमजोरी ने भी भारतीय मुद्रा को आंशिक समर्थन दिया।
आगे बाजार की नजर किन कारकों पर रहेगी
आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, वैश्विक डॉलर इंडेक्स, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर रहेगी। यदि डॉलर की मांग ऊंची बनी रहती है तो रुपये पर दबाव जारी रह सकता है।
वहीं यदि वैश्विक बाजार में डॉलर कमजोर रहता है और कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो घरेलू मुद्रा को कुछ स्थिरता मिलने की संभावना भी बनी रहेगी।
रुपये में आई यह गिरावट केवल घरेलू मांग का परिणाम नहीं बल्कि वैश्विक और स्थानीय आर्थिक कारकों का संयुक्त असर भी है। फिलहाल विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है, इसलिए निवेशकों और कारोबारियों की नजर आगामी आर्थिक संकेतकों पर बनी रहेगी।