रूसी लैब कर्मचारी की मौत से प्लेग का खौफ, संपर्क में आए करीब 200 लोग निगरानी में
Harish Qureshi
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2026-10-07 13:22:09
रूस के इरकुत्स्क में प्लेग रिसर्च संस्थान की कर्मचारी की मौत के बाद करीब 200 लोग निगरानी में हैं। अधिकारियों ने प्लेग की पुष्टि से इनकार किया है।
इरकुत्स्क, रूस | 7 अक्टूबर 2026
By Mohd Haris
प्लेग रिसर्च संस्थान की कर्मचारी की मौत
रूस के साइबेरिया क्षेत्र में एक प्लेग रिसर्च संस्थान की 28 वर्षीय कर्मचारी की मौत के बाद स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। कर्मचारी की पहचान दर्या शिपिलोवा के तौर पर हुई है। वह इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में लैब टेक्नीशियन के तौर पर काम करती थीं। शिपिलोवा की 2 अक्टूबर 2026 को मौत हुई। रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक उनकी मौत का आधिकारिक कारण अभी “अज्ञात कारण वाला निमोनिया” है। प्लेग संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है।
करीब 200 लोग निगरानी में
मौत के बाद शिपिलोवा के संपर्क में आए करीब 200 लोगों को एहतियातन मेडिकल निगरानी में रखा गया। इनमें संस्थान के कर्मचारी और अन्य संभावित संपर्क शामिल हैं। रूसी स्वास्थ्य निगरानी एजेंसी के मुताबिक संपर्क में आए लोगों में प्लेग से जुड़ा कोई पुष्ट संक्रमण नहीं मिला है। संस्थान में काम करने वाले लोगों के बीच भी हाल के दिनों में किसी नए संक्रामक मामले की पुष्टि नहीं हुई।
प्लेग संक्रमण की पुष्टि नहीं
इस मामले में सबसे अहम तथ्य यह है कि शिपिलोवा की मौत को आधिकारिक तौर पर प्लेग से हुई मौत नहीं माना गया है। रूसी अधिकारियों ने बताया कि मृतक के जैविक नमूनों की जांच की गई। जांच में उनके पेशेवर काम से जुड़े किसी ऐसे सूक्ष्मजीव का प्रमाण नहीं मिला, जो उनकी मौत को लैब में प्लेग संक्रमण से जोड़ता हो। अधिकारियों ने संस्थान में किसी ऐसे हादसे से भी इनकार किया है, जिसमें रोगजनक सूक्ष्मजीव का अनियंत्रित संपर्क हुआ हो।
विश्व स्वास्थ्य संगठन को रूस की ओर से बताया गया है कि इरकुत्स्क शहर में प्लेग का कोई पुष्ट मामला दर्ज नहीं हुआ है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर व्यापक संक्रमण का जोखिम फिलहाल कम आंका गया है।
टेस्ट ट्यूब टूटने की खबर कितनी सही
इस घटना के बाद सोशल मीडिया और कुछ स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया गया कि लैब में प्लेग बैक्टीरिया वाले टेस्ट ट्यूब के टूटने के बाद कर्मचारी संक्रमित हुई थीं। यह दावा अभी प्रमाणित नहीं है। रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने ऐसे किसी लैब हादसे से इनकार किया है। स्वतंत्र रूप से भी इस घटना की पुष्टि करने वाला पर्याप्त सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए इस दावे को पुष्ट तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
प्लेग को लेकर क्यों बढ़ी चिंता
प्लेग Yersinia pestis नामक बैक्टीरिया से होने वाला गंभीर संक्रमण है। इसका न्यूमोनिक रूप फेफड़ों को प्रभावित करता है और संक्रमित व्यक्ति के श्वसन कणों के जरिए करीबी संपर्क में दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकता है। हालांकि आधुनिक एंटीबायोटिक उपचार के कारण समय पर पहचान और इलाज मिलने पर बीमारी का उपचार संभव है। न्यूमोनिक प्लेग की आशंका होने पर संक्रमित व्यक्ति को अलग रखना और करीबी संपर्कों की निगरानी करना सार्वजनिक स्वास्थ्य की सामान्य सावधानी है। यही वजह है कि संक्रमण की पुष्टि नहीं होने के बावजूद इस मामले में संपर्कों की निगरानी की गई। यूरोपीय स्वास्थ्य निगरानी एजेंसी ने भी कहा है कि फिलहाल दूसरे मामलों या लगातार मानव-से-मानव संक्रमण का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
अस्पतालों और संस्थान में एहतियाती कदम
रिपोर्टों के मुताबिक इरकुत्स्क क्षेत्र में कुछ अस्पतालों और संस्थान से जुड़े लोगों पर भी एहतियाती पाबंदियां लगाई गईं। एंटी-प्लेग संस्थान के दर्जनों कर्मचारियों को निगरानी में रखा गया। इन कदमों ने मामले को लेकर सार्वजनिक चिंता बढ़ाई। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र की सैनिटरी और महामारी संबंधी स्थिति नियंत्रण में है।
आधिकारिक बयान और शुरुआती भ्रम
मामले की शुरुआत में प्लेग को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए। पड़ोसी बुर्यातिया क्षेत्र के प्रमुख ने शुरुआत में शिपिलोवा की मौत को प्लेग से जोड़ा था। बाद में उनके बयान में “संभवतः” शब्द जोड़ा गया। इसके विपरीत इरकुत्स्क और रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने मौत का कारण अज्ञात कारण वाला निमोनिया बताया। इसी वजह से मामले में आधिकारिक और अनौपचारिक दावों के बीच अंतर साफ रखना जरूरी है।
WHO और अंतरराष्ट्रीय निगरानी
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मामले को लेकर रूसी अधिकारियों से जानकारी ली है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर WHO ने इरकुत्स्क के लिए जोखिम को कम से मध्यम, रूस के लिए कम और WHO यूरोपीय क्षेत्र के लिए बहुत कम बताया है।
इसका अर्थ यह है कि फिलहाल व्यापक अंतरराष्ट्रीय संक्रमण का कोई पुष्ट संकेत सामने नहीं आया है। लेकिन मौत का कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने के कारण स्वास्थ्य एजेंसियां मामले पर निगरानी बनाए हुए हैं।
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Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।