सर्दियों में हाथ-पैर ठंडे होना सामान्य बात है, लेकिन कुछ लोगों के पैर गर्म कपड़े पहनने या कंबल में रहने के बाद भी बर्फ जैसे ठंडे महसूस होते हैं। कई बार इसके साथ झनझनाहट, सुन्नपन, दर्द या पैरों में कमजोरी भी हो सकती है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या पैर ठंडे रहने की वजह किसी विटामिन की कमी है और क्या खानपान में बदलाव करके इस समस्या को दूर किया जा सकता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, केवल पैरों का ठंडा रहना किसी खास विटामिन की कमी का पक्का संकेत नहीं है। विटामिन बी12 की कमी नसों को प्रभावित कर सकती है, जबकि कुछ अन्य पोषक तत्वों की कमी से थकान, कमजोरी या दूसरे लक्षण हो सकते हैं। लगातार ठंडे पैर रक्त संचार में कमी, थायरॉइड की समस्या या अन्य कारणों से भी जुड़े हो सकते हैं।
1. विटामिन बी12 की कमी से क्या पैर ठंडे महसूस हो सकते हैं?
विटामिन बी12 शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और नसों के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। इसकी कमी होने पर हाथ-पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन, कमजोरी, थकान और संतुलन बनाने में परेशानी हो सकती है। यदि पैरों में ठंडक के साथ सुई चुभने जैसा एहसास या संवेदना में बदलाव भी हो, तो डॉक्टर विटामिन बी12 की कमी की जांच पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, केवल ठंडे पैर होने से बी12 की कमी की पुष्टि नहीं की जा सकती।
2. आयरन की कमी भी हो सकती है एक वजह
आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरूरी है। हीमोग्लोबिन रक्त के जरिए शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है। आयरन की कमी से एनीमिया हो सकता है, जिसके लक्षणों में थकान, कमजोरी, सांस फूलना, चक्कर आना और कभी-कभी हाथ-पैर ठंडे महसूस होना शामिल हो सकते हैं। यदि ठंडे पैरों के साथ लगातार थकान, त्वचा का पीला पड़ना या सामान्य काम करने पर सांस फूलना भी हो, तो चिकित्सकीय जांच कराना उचित है।
3. विटामिन बी9 और अन्य पोषक तत्वों की भूमिका
विटामिन बी9 यानी फोलेट भी लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। इसकी कमी से एक प्रकार का एनीमिया हो सकता है। हालांकि, पैर ठंडे होने को सीधे फोलेट की कमी से जोड़ना सही नहीं है।
इसी तरह, विटामिन डी और अन्य पोषक तत्व शरीर के अलग-अलग कार्यों के लिए जरूरी हैं, लेकिन ठंडे पैरों के लिए बिना जांच किसी एक विटामिन को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
4. पैर ठंडे रहने की समस्या दूर करने के लिए क्या खाएं?
खानपान में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करना फायदेमंद हो सकता है, जो शरीर को जरूरी विटामिन और खनिज प्रदान करें। हालांकि, समस्या का कारण पता करना भी जरूरी है।
विटामिन बी12 के लिए
दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली और मांस विटामिन बी12 के स्रोत हैं। शाकाहारी लोग बी12 से फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों के विकल्प भी देख सकते हैं।
आयरन के लिए
दालें, चना, राजमा, हरी पत्तेदार सब्जियां, तिल और अन्य आयरन युक्त खाद्य पदार्थ खाएं। भोजन के साथ विटामिन सी वाले फल, जैसे अमरूद, आंवला या नींबू, लेने से पौधों से मिलने वाले आयरन का अवशोषण बेहतर हो सकता है।
फोलेट और संतुलित पोषण के लिए
हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, मटर, बीन्स और फल भोजन में शामिल करें। विविध और संतुलित आहार शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है।
ध्यान दें: यदि शरीर में विटामिन या आयरन की वास्तविक कमी है, तो केवल भोजन से उसे ठीक होने में समय लग सकता है। कुछ मामलों में डॉक्टर सप्लीमेंट या अन्य उपचार की सलाह दे सकते हैं। बिना जांच आयरन की गोलियां या अधिक मात्रा में विटामिन लेना उचित नहीं है।
5. पैर बर्फ जैसे ठंडे रहने के दूसरे कारण
हर बार विटामिन की कमी ही इसकी वजह नहीं होती। लगातार ठंडे पैरों के पीछे कुछ अन्य स्थितियां भी हो सकती हैं।
रक्त संचार में कमी: पैरों तक रक्त का प्रवाह प्रभावित होने पर पैर ठंडे महसूस हो सकते हैं।
थायरॉइड की समस्या: थायरॉइड हार्मोन कम बनने पर सामान्य से अधिक ठंड लग सकती है।
नसों की समस्या: नसों को नुकसान पहुंचने पर पैरों में ठंडक, जलन, झनझनाहट या सुन्नपन महसूस हो सकता है।
मधुमेह: कुछ मरीजों में मधुमेह से जुड़ी नसों की परेशानी पैरों की संवेदना को प्रभावित कर सकती है।
6. कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
यदि पैर लगातार ठंडे रहते हैं, गर्म कपड़े पहनने के बाद भी राहत नहीं मिलती या साथ में दर्द, झनझनाहट, सुन्नपन अथवा चलने में परेशानी होती है, तो डॉक्टर से जांच कराएं। यदि एक पैर अचानक बहुत ठंडा पड़ जाए और उसका रंग पीला या नीला होने लगे, तेज दर्द हो, या सुन्नपन व कमजोरी अचानक बढ़ जाए, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। ये रक्त प्रवाह में गंभीर रुकावट के संकेत हो सकते हैं। डॉक्टर जरूरत के अनुसार हीमोग्लोबिन, आयरन की स्थिति, विटामिन बी12, थायरॉइड या रक्त संचार से संबंधित जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
निष्कर्ष
पैर बर्फ जैसे ठंडे रहने की समस्या का संबंध कभी-कभी आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया या विटामिन बी12 की कमी से जुड़ी नसों की समस्या से हो सकता है। लेकिन इसका कारण रक्त संचार में कमी, थायरॉइड या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए सही कारण की पहचान के बाद ही उपचार करना चाहिए। संतुलित आहार अपनाएं और लगातार बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।