ईरानी दूतावास ने डॉक्टर स्ट्रेंज और ‘शोले’ के ठाकुर वाले मीम से UN की भूमिका पर तंज कसा। पोस्ट में संगठन की सैद्धांतिक ताकत और वास्तविक कार्रवाई के बीच अंतर दिखाया गया।
ईरान | 30 September 2026
By Mohd Haris
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर निशाना साधने के लिए इस बार कूटनीतिक बयान के बजाय भारतीय सिनेमा के मशहूर किरदार ठाकुर बलदेव सिंह का सहारा लिया है। भारत में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक मीम शेयर किया, जिसमें मार्वल के डॉक्टर स्ट्रेंज और 1975 की फिल्म ‘शोले’ के ठाकुर को आमने-सामने रखा गया है।
मीम के पहले हिस्से में कई भुजाओं वाले डॉक्टर स्ट्रेंज को दिखाया गया है। इसके साथ लिखा है, “UN according to school books”. दूसरे हिस्से में संजीव कुमार द्वारा निभाए गए ठाकुर बलदेव सिंह का किरदार है। इसके नीचे लिखा है, “UN in reality”.
ईरानी दूतावास ने इस पोस्ट में संयुक्त राष्ट्र को सीधे तौर पर निष्क्रिय बताया नहीं है, लेकिन तस्वीरों के चयन से अपना संदेश स्पष्ट किया है। डॉक्टर स्ट्रेंज की कई भुजाएं क्षमता और व्यापक कार्रवाई का प्रतीक बनाई गई हैं, जबकि ‘शोले’ के ठाकुर की कटी बाहों का इस्तेमाल कार्रवाई की सीमित क्षमता दिखाने के लिए किया गया है।
इस तरह मीम का केंद्रीय संदेश ईरान के उस नज़रिये को सामने रखता है, जिसके मुताबिक UN के पास अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए व्यापक जिम्मेदारी तो है, लेकिन बड़े वैश्विक संकटों में उसकी वास्तविक कार्रवाई सीमित दिखाई देती है।
‘शोले’ का ठाकुर भारतीय लोकप्रिय संस्कृति का जाना-पहचाना किरदार है। फिल्म में ठाकुर बलदेव सिंह के दोनों हाथ काट दिए जाते हैं। ईरानी दूतावास ने इसी दृश्य को UN की कथित सीमित कार्रवाई के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल किया।
इस चयन से पोस्ट का संदेश भारतीय सोशल मीडिया दर्शकों के लिए भी तुरंत समझने योग्य बन गया। एक तरफ सुपरहीरो की कई भुजाएं और दूसरी तरफ बिना हाथों वाला ठाकुर, मीम ने दोनों तस्वीरों के जरिए एक सीधा विजुअल कॉन्ट्रास्ट बनाया।
यह मीम ऐसे समय सामने आया है जब ईरान और संयुक्त राष्ट्र के बीच पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर कूटनीतिक बयानबाजी तेज है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने UN महासचिव एंतोनियो गुटेरेस के साथ बैठक के दौरान ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई और धमकियों को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। ईरानी पक्ष ने संयुक्त राष्ट्र से कथित तौर पर UN Charter के उल्लंघनों पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।
यह बैठक न्यूयॉर्क में 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई। ईरान की ओर से जारी विवरण में अमेरिका और इजरायल की कार्रवाइयों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए। इन आरोपों को ईरानी पक्ष के दावे के तौर पर देखना जरूरी है।
इस पोस्ट को ईरान की डिजिटल डिप्लोमेसी के व्यापक पैटर्न के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हाल के महीनों में ईरानी आधिकारिक और राजनयिक सोशल मीडिया अकाउंट्स ने पारंपरिक बयान और प्रेस रिलीज के साथ मीम, लोकप्रिय संस्कृति और इंटरनेट ह्यूमर का इस्तेमाल बढ़ाया है।
एक विश्लेषण के अनुसार, ईरानी राजनयिक और सरकार से जुड़े करीब 150 X अकाउंट्स की गतिविधियों में संघर्ष शुरू होने के बाद उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। पहले 50 दिनों में इन अकाउंट्स की पोस्ट को लगभग 896 million views मिले, जबकि इससे पहले के 50 दिनों में करीब 55 million views दर्ज किए गए थे।
इन आंकड़ों का संदर्भ डिजिटल कम्युनिकेशन के स्तर पर है। इन्हें ईरान के दावों या किसी सैन्य कार्रवाई की पुष्टि के तौर पर नहीं पढ़ा जाना चाहिए।
राजनयिक संदेश अब केवल आधिकारिक बयान और प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित नहीं रहे। सोशल मीडिया ने सरकारों और दूतावासों को छोटे, विजुअल और आसानी से साझा होने वाले संदेशों के जरिए अपना नैरेटिव पेश करने का माध्यम दिया है।
ईरान का यह मीम भी इसी डिजिटल रणनीति का उदाहरण है। जटिल अंतरराष्ट्रीय विवाद को दो लोकप्रिय किरदारों के जरिए पेश किया गया है। इससे संदेश को समझने में कम समय लगता है और पोस्ट के वायरल होने की संभावना बढ़ती है।
संयुक्त राष्ट्र की प्रभावशीलता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से बहस होती रही है। संगठन के पास शांति और सुरक्षा से जुड़े व्यापक अधिकार और संस्थागत तंत्र हैं, लेकिन सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यों के बीच मतभेद कई मामलों में सामूहिक कार्रवाई को प्रभावित करते हैं।
इसी राजनीतिक और संस्थागत ढांचे को लेकर अलग-अलग देश समय-समय पर UN की आलोचना करते रहे हैं। ईरान का नया मीम इसी व्यापक बहस में उसकी अपनी राजनीतिक स्थिति को सोशल मीडिया भाषा में प्रस्तुत करता है।
हालांकि, किसी मीम को UN की वास्तविक संस्थागत क्षमता का स्वतंत्र आकलन नहीं माना जा सकता। यह ईरानी दूतावास की राजनीतिक और कूटनीतिक मैसेजिंग है।
डॉक्टर स्ट्रेंज और ठाकुर को एक ही फ्रेम में रखकर ईरान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गंभीर मुद्दे को लोकप्रिय संस्कृति के जरिए पेश किया है। यह तरीका पारंपरिक कूटनीतिक भाषा से अलग है, लेकिन संदेश का राजनीतिक मकसद स्पष्ट है।
ईरान UN से जुड़े अपने असंतोष को एक ऐसे visual format में सामने रख रहा है, जिसे सोशल मीडिया पर आसानी से समझा और साझा किया जा सके। ‘शोले’ का संदर्भ इस संदेश को भारत के डिजिटल दर्शकों से जोड़ने का अतिरिक्त माध्यम बनता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।