दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की अप्रूवल रेटिंग 49 प्रतिशत हो गई है, जो उनके कार्यकाल का सबसे निचला स्तर है। नेशनल बैरोमीटर सर्वे में हाउसिंग पॉलिसी पर 56 प्रतिशत लोगों ने नकारात्मक राय दी। सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन 40 प्रतिशत पर स्थिर रहा, जबकि पीपुल पावर पार्टी 23 प्रतिशत पर पहुंची।
सियोल, दक्षिण कोरिया | 13 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की अप्रूवल रेटिंग उनके पदभार संभालने के बाद पहली बार 50 प्रतिशत से नीचे चली गई है। 10 से 12 अगस्त के बीच किए गए नेशनल बैरोमीटर सर्वे के मुताबिक, 49 प्रतिशत लोगों ने उनके स्टेट अफेयर्स मैनेजमेंट को सकारात्मक माना। यह दो सप्ताह पहले के सर्वे से 4 प्रतिशत अंक कम है।
इसके उलट 43 प्रतिशत लोगों ने राष्ट्रपति के कामकाज को नकारात्मक बताया। यह आंकड़ा पिछले सर्वे के मुकाबले 6 प्रतिशत अंक बढ़ा है। सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि ली सरकार के लिए मौजूदा दौर में सबसे बड़ी चुनौती जनता के बीच भरोसे और नीतिगत संतुष्टि को बनाए रखना है।
नेशनल बैरोमीटर सर्वे में 18 वर्ष और उससे अधिक उम्र के 1,001 लोगों को शामिल किया गया। सर्वे 10 से 12 अगस्त के बीच किया गया और इसमें मोबाइल फोन वर्चुअल नंबर के जरिए टेलीफोन इंटरव्यू लिए गए। सर्वे का मार्जिन ऑफ एरर 95 प्रतिशत कॉन्फिडेंस लेवल पर प्लस या माइनस 3.1 प्रतिशत अंक रहा।
इस लिहाज़ से 49 प्रतिशत की अप्रूवल रेटिंग को राजनीतिक माहौल में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। हालांकि किसी एक सर्वे के आधार पर व्यापक जनमत का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। अलग-अलग पोलिंग मेथडोलॉजी और अलग समयावधि में रुझान अलग दिख सकते हैं।
सर्वे का सबसे अहम हिस्सा ली सरकार की रियल एस्टेट और हाउसिंग पॉलिसी से जुड़ा है। 56 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने मौजूदा सरकार की हाउसिंग पॉलिसी को खराब बताया, जबकि केवल 34 प्रतिशत ने इसे सकारात्मक आकलन दिया।
यह आंकड़ा बताता है कि आवास और प्रॉपर्टी से जुड़ी नीतियां सरकार के लिए बड़ा सियासी मुआमला बनती जा रही हैं। दक्षिण कोरिया में घरों की कीमत और किराये से जुड़े सवाल लंबे समय से घरेलू राजनीति के अहम मुद्दों में शामिल रहे हैं।
सरकार की प्रस्तावित प्रॉपर्टी टैक्स रिविजन प्लान पर भी राय पूरी तरह एकतरफा नहीं रही। 46 प्रतिशत लोगों ने इस योजना का समर्थन किया, जबकि 41 प्रतिशत ने इसका विरोध किया।
सर्वे में लोगों से पूछा गया कि प्रस्तावित टैक्स बदलाव का रेंटल मार्केट पर क्या असर पड़ सकता है। 55 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने आशंका जताई कि इससे जियोन्से और मंथली रेंट की कीमतें बढ़ सकती हैं।
दक्षिण कोरिया की जियोन्से व्यवस्था में किरायेदार मकान मालिक को बड़ी एकमुश्त जमा राशि देता है, जो लीज खत्म होने पर वापस की जाती है। इसलिए इस बाजार में किसी भी पॉलिसी बदलाव का असर घरेलू बजट और हाउसिंग सिक्योरिटी से सीधे जुड़ता है।
अप्रूवल रेटिंग में गिरावट के साथ ली जे-म्युंग की गवर्नेंस पर भरोसे में भी कमी दर्ज हुई। Seoul Economic Daily के मुताबिक, 52 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि वे राष्ट्रपति के स्टेट अफेयर्स मैनेजमेंट पर भरोसा करते हैं। यह पिछली बार से 4 प्रतिशत अंक कम है।
इसके विपरीत 43 प्रतिशत लोगों ने कहा कि उन्हें राष्ट्रपति के शासन संचालन पर भरोसा नहीं है। यह आंकड़ा पिछले सर्वे से 7 प्रतिशत अंक बढ़ा।
यह बदलाव केवल अप्रूवल रेटिंग की गिरावट नहीं है। यह सरकार की क्रेडिबिलिटी और नीतियों पर जनता की धारणा के बीच बढ़ते अंतर की तरफ भी इशारा करता है।
राष्ट्रपति की रेटिंग में गिरावट के बावजूद सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन 40 प्रतिशत पर स्थिर रहा। मुख्य विपक्षी पीपुल पावर पार्टी का समर्थन 2 प्रतिशत अंक बढ़कर 23 प्रतिशत हो गया।
इसका मतलब यह है कि राष्ट्रपति की व्यक्तिगत अप्रूवल रेटिंग और पार्टी सपोर्ट के बीच फिलहाल एक अंतर मौजूद है। सरकार के लिए यह राहत का संकेत है, लेकिन विपक्ष के लिए भी यह अभी निर्णायक बढ़त नहीं है।
Yonhap के मुताबिक डेमोक्रेटिक पार्टी को 20 वर्ष और उससे कम उम्र के लोगों तथा कुछ दक्षिण-पूर्वी क्षेत्रों को छोड़कर ज्यादातर आयु समूहों और क्षेत्रों में पीपुल पावर पार्टी से अधिक समर्थन मिला।
नेशनल बैरोमीटर सर्वे ने विदेश नीति को लेकर दक्षिण कोरियाई समाज में मौजूद मतभेद की तस्वीर भी सामने रखी। 48 प्रतिशत लोगों ने चीन और अमेरिका के बीच बैलेंस्ड डिप्लोमेसी का समर्थन किया, जबकि 45 प्रतिशत ने दक्षिण कोरिया-अमेरिका गठबंधन को और मजबूत करने की राय दी।
यह आंकड़ा दक्षिण कोरिया की जियोपॉलिटिकल स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। सियोल को एक तरफ अमेरिका के साथ अपने सिक्योरिटी अलायंस को बनाए रखना है, वहीं चीन उसके लिए बड़ा आर्थिक और क्षेत्रीय पक्ष है।
इसलिए विदेश नीति में बैलेंस और सिक्योरिटी कमिटमेंट के बीच संतुलन आने वाले समय में भी ली सरकार के लिए अहम पॉलिसी टेस्ट रहेगा।
ली सरकार की न्यायिक और प्रॉसिक्यूशन रिफॉर्म एजेंडा को लेकर भी जनता की राय विभाजित है। प्रस्तावित क्रिमिनल प्रोसीजर एक्ट बदलाव, जिसके तहत अभियोजन पक्ष की सप्लीमेंट्री इन्वेस्टिगेशन अथॉरिटी खत्म करने की दिशा में कदम उठाया गया है, पर 56 प्रतिशत लोगों ने संभावित नकारात्मक असर की चिंता जताई।
इसके मुकाबले 34 प्रतिशत लोगों ने माना कि इससे सत्ता के दुरुपयोग को रोकने जैसे सकारात्मक प्रभाव ज्यादा होंगे।
यहां राजनीतिक विभाजन और ज्यादा स्पष्ट दिखा। डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों में 63 प्रतिशत ने सकारात्मक असर की बात कही, जबकि पीपुल पावर पार्टी के समर्थकों में 86 प्रतिशत ने संभावित नकारात्मक प्रभाव को ज्यादा महत्वपूर्ण माना।
ली जे-म्युंग की मौजूदा अप्रूवल रेटिंग को उनके पूरे कार्यकाल के संदर्भ में देखना जरूरी है। जून के अंत में Gallup Korea के एक सर्वे में भी उनकी रेटिंग 51 प्रतिशत तक गिर गई थी, जिसे उस समय पदभार संभालने के बाद सबसे निचला स्तर बताया गया था। इसके बाद जुलाई की शुरुआत में रेटिंग 54 प्रतिशत तक सुधरी थी।
इसलिए अगस्त का 49 प्रतिशत आंकड़ा केवल एक अचानक बदलाव नहीं, बल्कि अलग-अलग पोल में दिखाई दे रहे उतार-चढ़ाव के बीच नई गिरावट है।
हालांकि अलग-अलग पोलिंग संस्थाओं के आंकड़ों को सीधे एक साथ रखना सही नहीं होगा। Gallup Korea और NBS की सैंपलिंग, सवालों और सर्वे टाइमिंग में अंतर है। इसलिए ट्रेंड का जायज़ा लेते समय समान पोलिंग सीरीज को अलग-अलग देखना अधिक विश्वसनीय तरीका है।
राष्ट्रपति की अप्रूवल रेटिंग 49 प्रतिशत तक गिरने के बावजूद सत्तारूढ़ पार्टी का समर्थन 40 प्रतिशत पर बना हुआ है। विपक्षी पार्टी 23 प्रतिशत पर है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार के खिलाफ असंतोष अपने आप विपक्ष के पक्ष में वोट या समर्थन में तब्दील नहीं हो रहा है।
यही ली सरकार के लिए एक अहम सियासी नज़रिया है। जनता की नाखुशी बढ़ रही हो, लेकिन विपक्ष उसे राजनीतिक विकल्प के रूप में पर्याप्त क्रेडिबिलिटी हासिल न कर पाए, तो सरकार पर तत्काल चुनावी दबाव सीमित रह सकता है।
इसके बावजूद हाउसिंग, रेंट और प्रॉपर्टी टैक्स जैसे मुद्दे सीधे घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं। इसलिए इनका असर केवल राजनीतिक बहस तक सीमित रहने की संभावना नहीं है।
आने वाले समय में ली जे-म्युंग सरकार के लिए सबसे अहम सवाल यह होगा कि वह हाउसिंग मार्केट को लेकर जनता की चिंता को किस तरह संबोधित करती है। 56 प्रतिशत लोगों का हाउसिंग पॉलिसी को नकारात्मक बताना सरकार के लिए स्पष्ट चेतावनी है।
सरकार को प्रॉपर्टी टैक्स बदलाव के आर्थिक असर, किराये की कीमतों और घरों की उपलब्धता पर जनता की आशंकाओं का जवाब देना होगा। केवल पॉलिसी की घोषणा से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका ग्राउंड इम्पैक्ट होगा।
दूसरी तरफ प्रॉसिक्यूशन रिफॉर्म जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को अपनी पॉलिसी का उद्देश्य और संभावित प्रभाव स्पष्ट करना होगा। सर्वे में इस विषय पर 56 प्रतिशत लोगों की चिंता बताती है कि सुधार के एजेंडे को लेकर व्यापक सहमति अभी मौजूद नहीं है।
अभी उपलब्ध आंकड़ों से यह कहना जल्दबाजी होगी कि ली जे-म्युंग की अप्रूवल रेटिंग में गिरावट स्थायी राजनीतिक ट्रेंड बन गई है। इसके लिए आने वाले हफ्तों के सर्वे और खासकर समान पोलिंग सीरीज के आंकड़ों को देखना जरूरी होगा।
सबसे महत्वपूर्ण संकेत तीन क्षेत्रों से आएंगे। हाउसिंग पॉलिसी पर जनता की प्रतिक्रिया, राष्ट्रपति की गवर्नेंस पर भरोसा और विपक्षी दलों की अपनी राजनीतिक क्रेडिबिलिटी।
अगर हाउसिंग और आर्थिक मुद्दों पर सरकार की पॉलिसी जनता के बीच सकारात्मक असर दिखाती है, तो अप्रूवल रेटिंग में सुधार की गुंजाइश रहेगी। अगर रेंट, प्रॉपर्टी और टैक्स से जुड़ी चिंताएं बनी रहती हैं, तो मौजूदा गिरावट आगे भी राजनीतिक चुनौती बन सकती है।
ली जे-म्युंग की अप्रूवल रेटिंग का 49 प्रतिशत तक गिरना उनके कार्यकाल का अब तक का सबसे कमजोर NBS आंकड़ा है। पहली बार यह रेटिंग 50 प्रतिशत की सीमा से नीचे गई है, जबकि नकारात्मक आकलन 43 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
सबसे बड़ा दबाव हाउसिंग पॉलिसी से जुड़ा दिख रहा है। 56 प्रतिशत लोगों का इसे खराब बताना सरकार के लिए गंभीर सियासी संकेत है। हालांकि डेमोक्रेटिक पार्टी का 40 प्रतिशत समर्थन और विपक्षी पीपुल पावर पार्टी का 23 प्रतिशत समर्थन बताता है कि राष्ट्रपति की गिरती लोकप्रियता अभी विपक्ष के लिए स्पष्ट राजनीतिक बढ़त में नहीं बदली है।
फिलहाल तस्वीर एक ऐसे राष्ट्रपति की है जिसकी व्यक्तिगत अप्रूवल रेटिंग दबाव में है, लेकिन जिसकी पार्टी अभी भी मुख्य विपक्ष से आगे है। आने वाले सर्वे बताएंगे कि यह अस्थायी गिरावट है या ली सरकार के लिए एक नए राजनीतिक चरण की शुरुआत।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।