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स्मृति ईरानी का राहुल गांधी को जवाब, वंदे मातरम् पर रखी मांग

Shah Times 2026-08-24 12:44:42
स्मृति ईरानी का राहुल गांधी को जवाब, वंदे मातरम् पर रखी मांग

स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी से की दो बड़ी मांग

महिला आरक्षण से वंदे मातरम् तक, राहुल पर स्मृति का पलटवार

राहुल गांधी के बयान पर स्मृति ईरानी का जवाब, जानिए पूरा मामला


बीजेपी महासचिव स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी के पुणे कार्यक्रम में महिला अधिकारों और मनुस्मृति पर दिए बयान के बाद पलटवार किया। उन्होंने राहुल से 33% महिला आरक्षण के अमल का समर्थन करने और कांग्रेस मुख्यालय में देवी दुर्गा के आह्वान वाले अंश समेत पूरे वंदे मातरम् के गायन की अपील की।


नई दिल्ली | 24 अगस्त 2026 | शाह टाइम

By Mohd Haris


स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी से क्या कहा?

भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हालिया महिला अधिकारों से जुड़े बयान पर राजनीतिक पलटवार किया है। ईरानी ने राहुल गांधी से महिलाओं के समर्थन में उनके बयानों को राजनीतिक पहल में बदलने और संसद तथा राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के अमल का समर्थन करने की अपील की। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाए जाने की मांग भी रखी। उन्होंने खास तौर पर उस संस्करण का जिक्र किया जिसमें देवी दुर्गा का आह्वान करने वाली पंक्तियां शामिल हैं। फैक्ट-चेक के लिहाज से यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में स्मृति ईरानी का बयान केवल “हिंदू धर्म पर सुझाव” तक सीमित नहीं था। उनका बयान महिला आरक्षण, महिलाओं के सम्मान, धार्मिक परंपरा और वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया।

राहुल गांधी ने पुणे में क्या कहा था?

स्मृति ईरानी की प्रतिक्रिया से एक दिन पहले राहुल गांधी ने पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में छात्राओं और युवतियों से बातचीत की थी। इस कार्यक्रम का फोकस महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, बराबरी, आर्थिक स्वतंत्रता और सामाजिक दबाव जैसे मुद्दों पर था। राहुल गांधी ने महिलाओं को पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देने और अपने अधिकारों के लिए खड़े होने की अपील की। उन्होंने मनुस्मृति की उस सोच की आलोचना की, जिसके बारे में उनका दावा था कि वह महिलाओं को जीवन के अलग-अलग चरणों में पुरुष रिश्तेदारों के अधिकार के अधीन रखती है। राहुल ने यह भी कहा कि महिलाओं की प्रगति में हिंसा और सामाजिक बाधाएं रुकावट बनती हैं। पीटीआई के मुताबिक उन्होंने शारीरिक हिंसा, अवसरों से वंचित करना और आर्थिक हिंसा को महिलाओं के खिलाफ हिंसा के अलग-अलग रूपों के तौर पर गिनाया।

80 प्रतिशत महिलाओं वाले दावे पर क्या स्थिति है?

राहुल गांधी ने पुणे में दावा किया कि 80 प्रतिशत महिलाएं किसी न किसी तरह के उत्पीड़न का सामना करती हैं। उन्होंने महिला भ्रूण हत्या और यौन हिंसा से जुड़े कई अन्य आंकड़े भी बताए। इन आंकड़ों को समाचार रिपोर्टों ने उनके भाषण के दावे के रूप में दर्ज किया है। यहां संपादकीय सावधानी जरूरी है। इन आंकड़ों को राहुल गांधी का दावा बताते हुए रिपोर्ट करना उचित है, लेकिन बिना स्वतंत्र प्राथमिक डेटा के इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित राष्ट्रीय आंकड़े के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा। इसी वजह से इस रिपोर्ट में उन आंकड़ों को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं लिखा जा रहा है। यह अंतर राजनीतिक बयानों की रिपोर्टिंग में फैक्ट-चेक की बुनियादी जरूरत है।

स्मृति ईरानी का महिला आरक्षण वाला तर्क

स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी के महिला सशक्तिकरण वाले संदेश को महिला आरक्षण के मुद्दे से जोड़ दिया। उनका कहना था कि यदि कांग्रेस नेता महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के समर्थन में हैं, तो उन्हें 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के अमल का समर्थन करना चाहिए।

यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने रखना जरूरी है। संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान 2023 के 106वें संविधान संशोधन, यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम, के जरिए बनाया गया था। राज्यसभा सचिवालय से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज भी इसे 33 प्रतिशत आरक्षण वाला संवैधानिक सुधार बताते हैं। इसलिए स्मृति ईरानी के बयान को “महिला आरक्षण विधेयक पास कराने की मांग” कहना तकनीकी तौर पर सटीक नहीं होगा। कानून पहले ही पारित हो चुका है। मौजूदा राजनीतिक विवाद इसके अमल और उसकी समयसीमा को लेकर है।

महिला आरक्षण पर असली राजनीतिक विवाद क्या है?

महिला आरक्षण कानून का अमल जनगणना और परिसीमन से जुड़े प्रावधानों से जुड़ा हुआ है। इसी वजह से 2026 में भी सरकार और विपक्ष के बीच इसके जल्द अमल को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। कांग्रेस की ओर से पहले यह तर्क सामने आया है कि कानून पहले ही पारित हो चुका है और इसके अमल को परिसीमन से जोड़ने पर सवाल उठाए गए हैं। इसलिए स्मृति ईरानी का राहुल गांधी से “तुरंत समर्थन” मांगना एक राजनीतिक दबाव बनाने वाली रणनीति के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि यह कहना कि राहुल गांधी या कांग्रेस महिला आरक्षण के विरोध में हैं, उपलब्ध सामग्री के आधार पर सही नहीं होगा। राजनीतिक विवाद मुख्य रूप से कानून के अमल की प्रक्रिया और समयसीमा को लेकर है।

वंदे मातरम् को लेकर स्मृति की मांग

स्मृति ईरानी ने अपने बयान में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाए जाने की भी अपील की। उन्होंने कांग्रेस मुख्यालय में ऐसे संस्करण के गायन की मांग की जिसमें देवी दुर्गा के आह्वान वाली पंक्तियां शामिल हैं। यही हिस्सा उस खबर का धार्मिक और सांस्कृतिक पहलू बन गया है, जिसे कुछ मीडिया रिपोर्टों ने “हिंदू धर्म पर बड़ा सुझाव” के रूप में हेडलाइन किया। लेकिन पूरे बयान का संदर्भ देखें तो ईरानी ने महिला सम्मान, हिंदू धार्मिक परंपरा, महिला आरक्षण और वंदे मातरम् को एक साथ जोड़कर राहुल गांधी पर राजनीतिक दबाव बनाया। इसलिए खबर को केवल धार्मिक बयान के रूप में पेश करना इसके सियासी संदर्भ को अधूरा छोड़ देगा।

बीजेपी में नई जिम्मेदारी के बाद पहला बड़ा राजनीतिक हमला

स्मृति ईरानी को 17 अगस्त को बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया गया था। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन की घोषित टीम में वह आठ राष्ट्रीय महासचिवों में शामिल हैं। यह नियुक्ति उनके लिए संगठन में महत्वपूर्ण वापसी मानी जा रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद वह बीजेपी के केंद्रीय संगठनात्मक ढांचे में पहले जैसी औपचारिक भूमिका में नहीं थीं। नई जिम्मेदारी के बाद उनके राजनीतिक बयानों की राष्ट्रीय अहमियत फिर बढ़ी है। राहुल गांधी पर उनका ताजा हमला इसी नई संगठनात्मक भूमिका के बाद सामने आया है। इसलिए इसे बीजेपी और कांग्रेस के बीच महिला अधिकार, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक मुद्दों पर चल रही व्यापक सियासी बहस के संदर्भ में देखना अधिक उचित होगा।

क्या यह सिर्फ हिंदू धर्म का मुद्दा है?

इस सवाल का जवाब पूरी तरह हां नहीं है। स्मृति ईरानी ने हिंदू धार्मिक परंपराओं और देवी दुर्गा का जिक्र जरूर किया, लेकिन उनका मुख्य राजनीतिक तर्क राहुल गांधी के महिला अधिकारों संबंधी बयान को महिला आरक्षण और वंदे मातरम् से जोड़ना था। दूसरी तरफ राहुल गांधी का मूल कार्यक्रम महिलाओं की स्वतंत्रता, पितृसत्ता, शिक्षा, सुरक्षा और सामाजिक बराबरी पर केंद्रित था। उनके बयान में मनुस्मृति की आलोचना भी इसी सामाजिक और लैंगिक बराबरी की बहस का हिस्सा थी। इसलिए दोनों नेताओं के बयानों को अलग-अलग संदर्भों में समझना जरूरी है। एक तरफ सामाजिक बराबरी और महिला अधिकार का नैरेटिव है, दूसरी तरफ महिला आरक्षण और धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीकों के जरिए राजनीतिक जवाब है।

आगे क्या हो सकता है?

इस बयान के बाद कांग्रेस और बीजेपी के बीच महिला आरक्षण तथा वंदे मातरम् को लेकर सियासी बहस और तेज होने की संभावना है। बीजेपी राहुल गांधी से उनके महिला सशक्तिकरण वाले बयानों को महिला आरक्षण के अमल से जोड़कर जवाब मांग सकती है। कांग्रेस की ओर से दूसरी तरफ यह तर्क सामने रखा जा सकता है कि 33 प्रतिशत आरक्षण का संवैधानिक प्रावधान पहले ही कानून बन चुका है और असली सवाल उसके अमल की प्रक्रिया और समयसीमा का है। इसलिए आने वाले राजनीतिक बयानों में “कानून बनाना” और “कानून लागू करना” इन दो अलग पहलुओं के बीच अंतर महत्वपूर्ण रहेगा। वंदे मातरम् का मुद्दा भी राजनीतिक विमर्श में आगे बढ़ सकता है। हालांकि किसी पार्टी के कार्यालय में पूरा गीत गाया जाएगा या नहीं, यह राजनीतिक संगठन के अपने फैसले पर निर्भर करेगा।

निष्कर्ष

फैक्ट-चेक के बाद इस खबर की सबसे सटीक तस्वीर यह है कि बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी के पुणे में महिलाओं से जुड़े बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण के अमल का समर्थन करने और कांग्रेस मुख्यालय में देवी दुर्गा के आह्वान वाले अंश समेत पूरा वंदे मातरम् गाने की अपील की। स्मृति ईरानी का बयान महिला अधिकार और धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीकों को एक ही सियासी नैरेटिव में जोड़ता है। वहीं राहुल गांधी का पुणे भाषण पितृसत्ता, महिलाओं की स्वतंत्रता और सामाजिक बराबरी पर केंद्रित था। एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि महिला आरक्षण का 33 प्रतिशत संवैधानिक प्रावधान पहले ही 106वें संविधान संशोधन के जरिए बनाया जा चुका है। इसलिए मौजूदा विवाद कानून बनाने से ज्यादा उसके अमल और समयसीमा पर केंद्रित है।

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शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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