योगी का राहुल गांधी पर हमला, मनुस्मृति विवाद फिर गरमाया
‘भारत की विरासत क्यों नष्ट करना चाहते हैं?’ राहुल पर योगी का वार
मनुस्मृति टिप्पणी पर योगी का पलटवार, राहुल को दी ये सलाह
मनुस्मृति पर राहुल गांधी की हालिया टिप्पणी को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रायबरेली में उन पर तीखा हमला बोला। योगी ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को संविधान और लोकतंत्र के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए। उन्होंने मनु को समझने के लिए अथर्ववेद, शतपथ ब्राह्मण और मत्स्य पुराण पढ़ने की सलाह दी।
रायबरेली, उत्तर प्रदेश | 24 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
मनुस्मृति को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की हालिया टिप्पणी के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को रायबरेली में राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए भारत की परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी का मुद्दा उठाया। योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी के नेता प्रतिपक्ष के पद का हवाला देते हुए कहा कि व्यक्तिगत तौर पर देश को उनसे अपेक्षा नहीं है, लेकिन संसद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में उनकी जवाबदेही लोकतंत्र के प्रति है। यह बयान ऐसे वक्त आया है जब मनुस्मृति को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच वैचारिक बहस तेज हो रही है।
योगी आदित्यनाथ ने रायबरेली में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के नेता राणा बेनी माधव बख्श सिंह की 222वीं जयंती के कार्यक्रम को संबोधित किया। इसी दौरान उन्होंने राहुल गांधी की महाराष्ट्र में की गई टिप्पणी का जिक्र किया। योगी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी भारत की परंपराओं और विरासत को निशाना बनाते हैं। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि राहुल गांधी भारत की विरासत को क्यों नष्ट करना चाहते हैं। यह योगी का राजनीतिक आरोप है, जिसे उपलब्ध रिपोर्टों में उनके बयान के रूप में दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी की संविधान की शपथ का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी को लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
मनुस्मृति पर राहुल गांधी की टिप्पणी का जवाब देते हुए योगी आदित्यनाथ ने प्राचीन भारतीय ग्रंथों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी मनु को समझना चाहते हैं तो उन्हें अथर्ववेद, शतपथ ब्राह्मण और मत्स्य पुराण पढ़ना चाहिए। यह बयान विवाद के धार्मिक और सांस्कृतिक पक्ष को सामने लाता है। योगी का तर्क यह है कि भारतीय परंपरा और उसके ग्रंथों को समझने के लिए व्यापक प्राचीन साहित्य का अध्ययन जरूरी है।
हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि मनुस्मृति पर अकादमिक और राजनीतिक विमर्श काफी व्यापक है। इसलिए किसी एक राजनीतिक नेता की व्याख्या को इस विषय पर अंतिम ऐतिहासिक या विद्वतापूर्ण निष्कर्ष मानना उचित नहीं होगा।
राहुल गांधी ने 22 अगस्त को महाराष्ट्र के पुणे में छात्राओं के साथ बातचीत के दौरान महिलाओं की स्वतंत्रता और लैंगिक बराबरी पर बात की थी। उन्होंने “मनुस्मृति माइंडसेट” की आलोचना करते हुए पितृसत्तात्मक सोच को चुनौती देने की अपील की। राहुल गांधी ने महिलाओं की स्वायत्तता पर जोर देते हुए कहा था कि महिला किसी दूसरे व्यक्ति की संपत्ति नहीं है। उन्होंने महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए खड़े होने और सामाजिक बंधनों को चुनौती देने का संदेश दिया। इस बयान का संदर्भ महिला अधिकार और पितृसत्ता की आलोचना था। बीजेपी ने इसे भारतीय परंपरा और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत पर टिप्पणी के रूप में लिया और राजनीतिक जवाब दिया।
इस विवाद में दो अलग नैरेटिव आमने-सामने हैं। राहुल गांधी का नैरेटिव महिलाओं की स्वायत्तता, लैंगिक बराबरी और पितृसत्तात्मक सोच के विरोध पर आधारित है। योगी आदित्यनाथ का जवाब भारतीय परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और संवैधानिक जिम्मेदारी के मुद्दे पर केंद्रित है।
यही वजह है कि विवाद केवल मनुस्मृति तक सीमित नहीं रहा। इसमें संविधान, हिंदू धार्मिक परंपरा, महिला अधिकार और बीजेपी-कांग्रेस की वैचारिक राजनीति भी जुड़ गई है। फैक्ट-चेक के लिहाज से यह अंतर महत्वपूर्ण है। राहुल गांधी ने महिलाओं को लेकर मनुस्मृति की आलोचना की थी, जबकि योगी ने इसे भारत की परंपरा और विरासत के संदर्भ में चुनौती दी। दोनों बयानों को एक ही अर्थ में पेश करना सटीक नहीं होगा।
योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी के संवैधानिक पद को अपने जवाब का प्रमुख हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकतंत्र के प्रति जवाबदेही भी इससे जुड़ी है।
यह तर्क बीजेपी के राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा है। पार्टी लंबे समय से राहुल गांधी के बयानों को उनकी संवैधानिक भूमिका और राष्ट्रीय मुद्दों के संदर्भ में चुनौती देती रही है। हालांकि यह कहना कि नेता प्रतिपक्ष को सरकार या बहुमत की विचारधारा से सहमत होना चाहिए, लोकतांत्रिक व्यवस्था की सामान्य व्याख्या नहीं होगी। नेता प्रतिपक्ष का संवैधानिक और संसदीय दायित्व सरकार की नीतियों की आलोचना और वैकल्पिक दृष्टिकोण रखना भी है।
योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में कहा कि राहुल गांधी भारत की परंपरा और विरासत को निशाना बनाते हैं। उन्होंने राम, मनु और भारतीय विरासत से जुड़े राहुल गांधी के बयानों का एक साथ उल्लेख किया। यहां राजनीतिक आरोप और स्थापित तथ्य के बीच अंतर करना जरूरी है। राहुल गांधी द्वारा मनुस्मृति की आलोचना एक रिकॉर्डेड राजनीतिक बयान है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष अपने आप नहीं निकलता कि वह भारत की पूरी सांस्कृतिक विरासत को नष्ट करना चाहते हैं। योगी का “विरासत नष्ट करने” वाला आरोप उनकी राजनीतिक व्याख्या है। इसे खबर में आरोप के रूप में ही प्रस्तुत करना संपादकीय रूप से अधिक सटीक है।
रायबरेली के कार्यक्रम में योगी आदित्यनाथ ने राहुल गांधी पर कई दूसरे राजनीतिक आरोप भी लगाए। उन्होंने 1975 की इमरजेंसी का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की लोकतांत्रिक विरासत पर सवाल उठाया। उन्होंने अयोध्या और भगवान राम से जुड़े कांग्रेस के रुख की भी आलोचना की।
उन्होंने आतंकवाद और सेना से जुड़े पुराने राजनीतिक विवादों का भी जिक्र किया। इन आरोपों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के अपने-अपने दृष्टिकोण हैं और इन्हें इस खबर में स्थापित तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। मुख्य विवाद फिर भी मनुस्मृति और राहुल गांधी की महिला अधिकारों संबंधी टिप्पणी पर ही केंद्रित रहा।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पुणे में राहुल गांधी ने महिलाओं को संबोधित करते हुए मनुस्मृति की मानसिकता और पितृसत्ता की आलोचना की। उन्होंने महिलाओं से सामाजिक बंधनों को तोड़ने और अपनी स्वतंत्र पहचान कायम करने की अपील की। यह टिप्पणी व्यापक महिला अधिकार विमर्श का हिस्सा थी। राहुल गांधी ने पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग सामाजिक मानकों को भी चुनौती दी। बीजेपी ने इस बयान को भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा के खिलाफ टिप्पणी के रूप में देखा। इसी राजनीतिक प्रतिक्रिया के तहत योगी आदित्यनाथ का रायबरेली बयान सामने आया।
मनुस्मृति विवाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच पहले से मौजूद वैचारिक विभाजन को और स्पष्ट कर सकता है। बीजेपी इसे भारतीय परंपरा और सांस्कृतिक पहचान के सवाल के रूप में पेश कर रही है, जबकि कांग्रेस का जोर महिला अधिकार और सामाजिक बराबरी पर है।
रायबरेली का संदर्भ भी राजनीतिक रूप से अहम है। यह राहुल गांधी का लोकसभा क्षेत्र है और वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह बयान दिया। इसलिए बयान का राजनीतिक संदेश केवल राष्ट्रीय स्तर पर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सियासत से भी जुड़ता है।
आने वाले दिनों में दोनों दल इस मुद्दे को अपने-अपने नैरेटिव के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि इसका चुनावी असर कितना होगा, इस पर अभी निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
मनुस्मृति एक प्राचीन संस्कृत ग्रंथ है और इसके सामाजिक नियमों तथा विचारों को लेकर सदियों से विभिन्न व्याख्याएं मौजूद रही हैं। आधुनिक भारत में इस ग्रंथ को लेकर सामाजिक सुधार, जाति व्यवस्था और लैंगिक अधिकारों के संदर्भ में भी तीखी बहस हुई है।
इसलिए मौजूदा राजनीतिक विवाद को केवल धार्मिक आस्था का प्रश्न मानना अधूरा होगा। इसमें सामाजिक इतिहास, महिला अधिकार, जाति व्यवस्था, संविधान और आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों की बहस भी शामिल है। यही कारण है कि राजनीतिक नेताओं के बयानों को संदर्भ सहित रिपोर्ट करना जरूरी है। किसी एक पक्ष के आरोप को अंतिम ऐतिहासिक सत्य के रूप में प्रस्तुत करने से खबर का संतुलन प्रभावित होगा।
अब निगाह कांग्रेस की प्रतिक्रिया पर रहेगी। बीजेपी की तरफ से योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद राहुल गांधी और कांग्रेस के दूसरे नेता मनुस्मृति, महिला अधिकार और भारतीय परंपरा के सवाल पर अपना पक्ष रख सकते हैं। यह विवाद संसद के बाहर राजनीतिक भाषणों में भी जारी रह सकता है। खासकर महिला आरक्षण, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दों के साथ इसे जोड़ा जा सकता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि राहुल गांधी की पुणे टिप्पणी ने बीजेपी को तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया का अवसर दिया है और योगी आदित्यनाथ ने इसे भारत की विरासत तथा नेता प्रतिपक्ष की जवाबदेही से जोड़ दिया है।
मनुस्मृति को लेकर राहुल गांधी और योगी आदित्यनाथ के बीच नया सियासी विवाद सामने आया है। राहुल गांधी ने पुणे में मनुस्मृति की कथित पितृसत्तात्मक सोच की आलोचना करते हुए महिलाओं की स्वायत्तता पर जोर दिया था। इसके जवाब में योगी आदित्यनाथ ने रायबरेली में राहुल गांधी पर भारत की परंपरा और विरासत को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष की संवैधानिक जिम्मेदारी का उल्लेख करते हुए मनु को समझने के लिए अथर्ववेद, शतपथ ब्राह्मण और मत्स्य पुराण पढ़ने की सलाह दी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।