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हर समय बैठे रहने की आदत शरीर पर डाल सकती है गंभीर असर, कितना जरूरी है रोज चलना?

Neelam Saini 2026-09-02 19:16:54
हर समय बैठे रहने की आदत शरीर पर डाल सकती है गंभीर असर, कितना जरूरी है रोज चलना?

लंबे समय तक बैठे रहना हृदय रोग, टाइप-२ मधुमेह और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार वयस्कों को हर सप्ताह कम से कम १५० मिनट मध्यम तीव्रता की गतिविधि करनी चाहिए।

लगातार बैठे रहना क्यों बन रहा है चिंता का विषय?

डिजिटल दौर में काम, पढ़ाई, मनोरंजन और खरीदारी तक का बड़ा हिस्सा स्क्रीन के सामने बैठकर होने लगा है। दफ्तर में कई घंटे कुर्सी पर बैठना, घर पहुंचने के बाद मोबाइल या टीवी के सामने समय बिताना और आने-जाने के लिए हर छोटी दूरी पर वाहन का इस्तेमाल करना रोजमर्रा की सक्रियता को कम कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक बैठे या लेटे रहने जैसी कम ऊर्जा वाली अवस्था में ज्यादा समय बिताना वयस्कों में मृत्यु के जोखिम, हृदय रोग से होने वाली मृत्यु, हृदय संबंधी बीमारी, कैंसर और टाइप-२ मधुमेह जैसे खराब स्वास्थ्य परिणामों से जुड़ा पाया गया है। 

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। बैठे रहना और व्यायाम न करना एक ही बात नहीं है। कोई व्यक्ति रोज व्यायाम कर सकता है, लेकिन अगर बाकी समय लगातार बैठा रहता है तो उसे दिनभर की निष्क्रियता कम करने पर भी ध्यान देना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन लंबे समय तक बैठे रहने को सीमित करने और बैठे समय की जगह किसी भी तीव्रता की शारीरिक गतिविधि लाने की सलाह देता है। 

शरीर पर क्या असर पड़ सकता है?

शारीरिक गतिविधि केवल वजन नियंत्रित करने के लिए जरूरी नहीं है। नियमित सक्रियता हृदय और रक्तसंचार के लिए लाभकारी है तथा टाइप-२ मधुमेह और कई गैर-संचारी बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। इसके अलावा नियमित शारीरिक गतिविधि मानसिक स्वास्थ्य, मस्तिष्क की कार्यक्षमता और सामान्य स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी मानी जाती है। 

इसके विपरीत, ज्यादा समय तक बैठे रहने की आदत स्वास्थ्य के कई खराब परिणामों से जुड़ी है। इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति जो लंबे समय तक बैठता है, उसे निश्चित रूप से कोई बीमारी होगी। बल्कि वैज्ञानिक प्रमाण यह बताते हैं कि अधिक गतिहीन व्यवहार स्वास्थ्य जोखिमों के साथ जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे कम करना बेहतर स्वास्थ्य रणनीति का हिस्सा है। 

वजन और चयापचय पर असर

दिनभर कम सक्रिय रहने से कुल शारीरिक गतिविधि घट जाती है। नियमित चलना और अन्य शारीरिक गतिविधियां शरीर को सक्रिय रखने में मदद करती हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि टाइप-२ मधुमेह सहित कई गैर-संचारी रोगों की रोकथाम और प्रबंधन में मदद कर सकती है। इसलिए केवल वजन मशीन पर नजर रखना पर्याप्त नहीं है। व्यक्ति का पूरा दिन कितना सक्रिय है, यह भी स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

दिल की सेहत के लिए भी जरूरी है चलना

नियमित शारीरिक गतिविधि हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पर्याप्त शारीरिक गतिविधि न करने से हृदय संबंधी बीमारी, टाइप-२ मधुमेह, कुछ कैंसर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसी वजह से रोजमर्रा की जिंदगी में पैदल चलना, सीढ़ियों का इस्तेमाल करना, साइकिल चलाना या अन्य ऐसी गतिविधियां शामिल करना उपयोगी हो सकता है जिनसे शरीर सक्रिय रहे।

रोज कितना चलना जरूरी है?

यहां एक आम सवाल होता है कि स्वस्थ रहने के लिए रोज कितने कदम चलने चाहिए। दरअसल, विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रमुख सिफारिश किसी एक निश्चित दैनिक कदम संख्या पर आधारित नहीं है।

१८ से ६४ वर्ष के वयस्कों के लिए हर सप्ताह कम से कम १५० से ३०० मिनट की मध्यम तीव्रता वाली एरोबिक शारीरिक गतिविधि या ७५ से १५० मिनट की तेज तीव्रता वाली गतिविधि की सलाह दी जाती है। इसके साथ सप्ताह में कम से कम दो दिन मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधियां करने की सिफारिश भी है। इसे रोजमर्रा के हिसाब से समझें तो ३० मिनट की मध्यम तीव्रता वाली गतिविधि सप्ताह में पांच दिन एक व्यावहारिक उदाहरण है। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र भी वयस्कों के लिए सप्ताह में कम से कम १५० मिनट की मध्यम तीव्रता वाली गतिविधि की सलाह देता है और इसे सप्ताह के अलग-अलग दिनों में बांटने की बात कहता है। 

क्या तेज चलना पर्याप्त है?

कई लोगों के लिए तेज चाल से चलना मध्यम तीव्रता वाली गतिविधि का अच्छा उदाहरण हो सकता है। ऐसी गतिविधि में सांस सामान्य से कुछ तेज चलती है और हृदय गति बढ़ती है।लेकिन हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता एक जैसी नहीं होती। उम्र, स्वास्थ्य स्थिति, फिटनेस स्तर और पहले से मौजूद बीमारी के आधार पर गतिविधि का स्तर अलग होना चाहिए। जो व्यक्ति लंबे समय से निष्क्रिय रहा है, उसके लिए शुरुआत धीरे-धीरे करना बेहतर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कम सक्रिय लोगों को छोटी मात्रा से शुरुआत कर धीरे-धीरे अवधि और तीव्रता बढ़ाने की सलाह देता है। 

क्या ३० मिनट की वॉक एक साथ करना जरूरी है?

नहीं। सप्ताह भर की शारीरिक गतिविधि को अलग-अलग हिस्सों में बांटा जा सकता है। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के अनुसार १५० मिनट की साप्ताहिक गतिविधि को छोटे हिस्सों में बांटना भी संभव है। इसका मतलब है कि व्यस्त दिनचर्या में व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार सुबह, दोपहर या शाम में गतिविधि के अलग-अलग हिस्से शामिल कर सकता है।

उदाहरण के लिए—

* काम पर जाने के दौरान कुछ दूरी पैदल चलना।
* भोजन के बाद थोड़ी देर टहलना।
* लिफ्ट की जगह संभव होने पर सीढ़ियों का इस्तेमाल करना।
* पास की दुकान या बाजार तक पैदल जाना।
* स्क्रीन के लंबे इस्तेमाल के बीच उठकर कुछ देर चलना।
* सप्ताह के दिनों में नियमित तेज चाल से चलने का समय तय करना।
छोटी गतिविधियों को रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल करने से कुल सक्रियता बढ़ाई जा सकती है। 

सिर्फ चलना ही पर्याप्त है?

चलना बेहद उपयोगी गतिविधि है, लेकिन संपूर्ण शारीरिक फिटनेस के लिए केवल एरोबिक गतिविधि पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है।विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों को सप्ताह में कम से कम दो दिन प्रमुख मांसपेशी समूहों को मजबूत करने वाली गतिविधियां करने की सलाह देता है। इसमें व्यक्ति की क्षमता के अनुसार शरीर के वजन से किए जाने वाले व्यायाम या अन्य सुरक्षित शक्ति-वर्धक गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।६५ वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ संतुलन और गिरने से बचाव में मदद करने वाली गतिविधियों पर भी ध्यान देने की सलाह दी जाती है। 

ऑफिस में घंटों बैठने वालों के लिए क्या करें?

डेस्क पर काम करने वालों के लिए चुनौती ज्यादा हो सकती है। ऐसे लोगों को केवल सुबह की कसरत पर निर्भर रहने के बजाय पूरे दिन की सक्रियता बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए।काम के दौरान जब भी संभव हो, उठकर थोड़ी देर चलना, फोन पर बात करते समय पैदल चलना, पानी लेने के लिए खुद उठना और छोटी दूरी के कामों में पैदल चलने को प्राथमिकता देना उपयोगी आदतें हो सकती हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन का संदेश स्पष्ट है कि बैठे रहने का समय सीमित करना और उसकी जगह किसी भी स्तर की शारीरिक गतिविधि लाना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है। 

अचानक बहुत ज्यादा चलना भी सही नहीं

अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से बिल्कुल सक्रिय नहीं रहा है तो पहले ही दिन बहुत लंबी दूरी चलने या अत्यधिक कठिन व्यायाम करने की जरूरत नहीं है।शुरुआत अपनी क्षमता के अनुसार करनी चाहिए और धीरे-धीरे समय तथा तीव्रता बढ़ानी चाहिए। इससे शरीर को नई गतिविधि के अनुरूप ढलने का अवसर मिलता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कम मात्रा से शुरुआत करके धीरे-धीरे गतिविधि बढ़ाने की सलाह देता है। जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, गंभीर सांस की बीमारी, जोड़ों की गंभीर समस्या या अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है, उन्हें अपनी शारीरिक गतिविधि की योजना चिकित्सकीय सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।

क्या सिर्फ वजन कम करने के लिए चलना जरूरी है?

नहीं। पैदल चलने और अन्य शारीरिक गतिविधियों के फायदे केवल वजन तक सीमित नहीं हैं? नियमित शारीरिक गतिविधि हृदय स्वास्थ्य, रक्तचाप, टाइप-२ मधुमेह के जोखिम, मानसिक स्वास्थ्य, मस्तिष्क की सेहत और सामान्य स्वास्थ्य से जुड़ी है। इसलिए किसी व्यक्ति का वजन सामान्य होने के बावजूद उसका दिनभर बैठे रहना स्वस्थ जीवनशैली का आदर्श उदाहरण नहीं माना जा सकता।

भारत में भी बढ़ती शारीरिक निष्क्रियता चिंता का विषय

विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार भारत समेत क्षेत्र के देशों में गैर-संचारी बीमारियों का बोझ बढ़ रहा है और नियमित शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देना इनसे निपटने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत में वयस्कों के लिए भी सप्ताह में १५० से ३०० मिनट की मध्यम तीव्रता वाली एरोबिक गतिविधि की सिफारिश बताई गई है। विश्व स्तर पर भी शारीरिक निष्क्रियता बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने २०२४ में बताया था कि वर्ष २०२२ में दुनिया भर में लगभग ३१ प्रतिशत वयस्क अनुशंसित स्तर की शारीरिक गतिविधि पूरी नहीं कर रहे थे। 

निष्कर्ष

हर समय बैठे रहना आधुनिक जीवनशैली का आम हिस्सा जरूर बन गया है, लेकिन इसे पूरी तरह सामान्य मान लेना स्वास्थ्य के लिहाज से उचित नहीं है। वैज्ञानिक प्रमाण अधिक गतिहीन व्यवहार को हृदय रोग, टाइप-२ मधुमेह और अन्य खराब स्वास्थ्य परिणामों से जोड़ते हैं। स्वस्थ रहने के लिए किसी महंगे उपकरण या जटिल दिनचर्या की शुरुआत जरूरी नहीं। रोजमर्रा में चलना बढ़ाना, लंबे समय तक लगातार बैठे रहने को कम करना और सप्ताह में कम से कम १५० मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि का लक्ष्य रखना एक व्यावहारिक शुरुआत हो सकती है। सबसे अहम बात यह है कि शरीर को सक्रिय रखने की आदत धीरे-धीरे विकसित की जाए। कुछ गतिविधि बिल्कुल गतिविधि न करने से बेहतर है। 



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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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