ईशान आनंद बने बसपा के राष्ट्रीय संयोजक, मायावती ने संगठन में दी बड़ी जिम्मेदारी
Mohammad Naved
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2026-09-23 15:10:49
बसपा प्रमुख मायावती ने लखनऊ की बैठक में ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाया। आकाश आनंद के बाद मिली यह जिम्मेदारी यूपी चुनाव 2027 से पहले संगठनात्मक बदलाव का अहम हिस्सा है।
📍 लखनऊ 🗓️ 23 सितंबर 2026 ✍️ Mohd Naved
बसपा में ईशान आनंद को बड़ी जिम्मेदारी
बहुजन समाज पार्टी ने संगठन के स्तर पर एक अहम बदलाव किया है। पार्टी प्रमुख मायावती ने अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया है। यह ऐलान 23 सितंबर को लखनऊ में हुई पार्टी पदाधिकारियों की बैठक के दौरान किया गया।
ईशान आनंद को यह जिम्मेदारी ऐसे वक्त मिली है, जब बसपा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अपने संगठन को सक्रिय करने और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की गतिविधियों को मजबूत करने की तैयारी में है। पार्टी में उनकी भूमिका अब पहले की तुलना में अधिक औपचारिक और महत्वपूर्ण हो गई है।
आकाश आनंद के बाद बदला संगठनात्मक समीकरण
ईशान आनंद से पहले उनके बड़े भाई आकाश आनंद के पास बसपा में महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी थी। मायावती ने 3 सितंबर को आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाया था। इसके बाद 10 सितंबर को उन्हें पार्टी से भी अलग कर दिया गया।
मायावती ने आकाश आनंद को हटाने के पीछे राजनीतिक परिपक्वता और पार्टी अनुशासन से जुड़े सवालों का हवाला दिया था। उन्होंने आकाश के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को लेकर भी सार्वजनिक तौर पर असहमति जताई थी। ये फैसले बसपा के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर चल रहे बदलावों की पृष्ठभूमि में हुए।
ईशान आनंद की राजनीतिक भूमिका
ईशान आनंद मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के छोटे बेटे और आकाश आनंद के छोटे भाई हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने लंदन की यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिंस्टर से कानून की पढ़ाई की है। वर्ष 2025 में वह पहली बार बसपा के प्रमुख कार्यक्रमों में सार्वजनिक तौर पर दिखाई दिए थे।
सितंबर 2026 की शुरुआत में ही बसपा में उनकी सक्रियता बढ़ने लगी थी। उन्हें पार्टी के मुख्य सेक्टर प्रभारी के तौर पर भी जिम्मेदारी दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसके बाद 23 सितंबर को राष्ट्रीय संयोजक का पद मिलने से संगठन में उनकी भूमिका और विस्तृत हो गई है।
मायावती के बाद संगठन में अहम भूमिका
राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने के बाद ईशान आनंद की जिम्मेदारी केवल एक औपचारिक पद तक सीमित नहीं दिखती। आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें मायावती के बाद संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की बात कही गई है। हालांकि पार्टी की ओर से उन्हें औपचारिक तौर पर “नंबर-2” घोषित किए जाने की अलग पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं है। इसलिए उनकी स्थिति को राष्ट्रीय संगठन में प्रमुख भूमिका के रूप में देखना अधिक सटीक है।
बसपा अलग-अलग राज्यों में संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने पर जोर दे रही है। ऐसे में राष्ट्रीय संयोजक के तौर पर ईशान आनंद की जिम्मेदारी में संगठनात्मक गतिविधियों, पार्टी बैठकों और राज्यों से जुड़े कामों में भागीदारी बढ़ना शामिल हो सकता है।
यूपी चुनाव 2027 से पहले अहम फेरबदल
ईशान आनंद की नियुक्ति का समय भी सियासी लिहाज से महत्वपूर्ण है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं और बसपा के लिए संगठनात्मक तैयारी एक प्रमुख चुनौती बनी हुई है। पार्टी की हालिया बैठकों में राष्ट्रीय स्तर के नेताओं के साथ संगठन की स्थिति और आगामी चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई है।
ईशान आनंद को राष्ट्रीय जिम्मेदारी देना इस संगठनात्मक पुनर्संरचना का हिस्सा है। लेकिन उनके सामने चुनौती भी स्पष्ट है। उन्हें अपेक्षाकृत कम राजनीतिक अनुभव के बीच पार्टी के पुराने संगठनात्मक ढांचे, कार्यकर्ताओं और विभिन्न राज्यों में बसपा की गतिविधियों के साथ तालमेल बनाना होगा।
बसपा के लिए आगे की चुनौती
ईशान आनंद की राजनीतिक सक्रियता हाल के समय में बढ़ी है, लेकिन उनका सार्वजनिक राजनीतिक अनुभव आकाश आनंद की तुलना में सीमित रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2025 से उनकी सार्वजनिक राजनीतिक मौजूदगी दिखाई देने लगी थी। इसके बाद 2026 में उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारियां मिलने लगीं।
इसलिए राष्ट्रीय संयोजक के तौर पर उनकी पहली बड़ी परीक्षा संगठन के भीतर उनकी स्वीकार्यता और जमीनी स्तर पर उनकी सक्रियता होगी। पार्टी के राज्यों में संगठनात्मक ढांचे के साथ उनका तालमेल भी महत्वपूर्ण रहेगा।
परिवार और पार्टी संगठन का सवाल
ईशान आनंद की नियुक्ति ऐसे दौर में हुई है, जब मायावती ने पार्टी में पारिवारिक भूमिका को लेकर कई बड़े फैसले किए हैं। आकाश आनंद को पार्टी से अलग करने के बाद ईशान को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी देना बसपा के नेतृत्व ढांचे में एक नया समीकरण बनाता है।
हालांकि ईशान की नियुक्ति को भविष्य के नेतृत्व या उत्तराधिकार के अंतिम फैसले के तौर पर पेश करना अभी जल्दबाजी होगी। फिलहाल तथ्य इतना है कि मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक बनाया है और पार्टी संगठन में उनकी जिम्मेदारी बढ़ाई है।
आगे क्या होगा
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि ईशान आनंद नई जिम्मेदारी के बाद पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में किस तरह सक्रिय होते हैं। राज्यों में बसपा के कार्यक्रमों, कार्यकर्ता बैठकों और चुनावी तैयारियों में उनकी भूमिका का विस्तार किस स्तर तक होता है, यह आने वाले महीनों में अधिक स्पष्ट होगा।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बसपा के लिए संगठन को मजबूत करना एक अहम एजेंडा है। ईशान आनंद को मिली नई जिम्मेदारी इसी व्यापक संगठनात्मक प्रक्रिया के बीच सामने आई है। फिलहाल उनका राष्ट्रीय संयोजक बनना बसपा के हालिया नेतृत्व बदलावों की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक है।
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Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।