रांका-दास की रिहाई अटकी, मजिस्ट्रेट को धमकी की शिकायत पर एनसीआर
Mohammad Naved
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2026-10-19 12:07:50
सीजेपी नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई पर पेच बरकरार है। मजिस्ट्रेट को कथित धमकी की शिकायत पर पुलिस ने एनसीआर दर्ज की है। सीजेपी ने कार्यवाही में देरी पर सवाल उठाए हैं।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 19 अक्टूबर 2026
✍️Mohd Naved
रिहाई से जुड़ी कार्यवाही में नया विवाद
कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई का मामला 19 अक्टूबर को उपलब्ध जानकारी तक अनसुलझा था। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट, यानी एसईएम, को कथित धमकी की शिकायत सामने आने के बाद कार्यवाही पर सवाल उठे हैं। सीजेपी का आरोप है कि रिहाई से जुड़ी औपचारिकताओं के बावजूद देरी हुई।
पुलिस के मुताबिक अज्ञात लोगों पर रिपोर्ट
उपलब्ध रिपोर्टों में दिल्ली पुलिस के हवाले से बताया गया है कि एसईएम की शिकायत पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ नॉन-कॉग्निजेबल रिपोर्ट, यानी एनसीआर, दर्ज हुई है। धमकी भेजने वाले की पहचान की पुष्टि उपलब्ध नहीं है। शिकायत को किसी आरोपी की दोषसिद्धि नहीं माना जाना चाहिए।
सीजेपी की लीगल टीम ने जताया एतराज़
सीजेपी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने दावा किया कि जमानतियों के सत्यापन और एफडी संबंधी औपचारिकताएं पूरी थीं। उनके मुताबिक सुनवाई में रिहाई के मुद्दे के बजाय कथित धमकी पर चर्चा हुई। ये पक्षकार के दावे हैं, आदेश की प्रमाणित प्रति से इनकी स्वतंत्र पुष्टि बाकी है।
ज़रूरी तथ्य
• मामले में आशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई संबंधी कार्यवाही शामिल है। • धमकी की शिकायत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ बताई गई है। • सीजेपी ने जमानतियों की स्वीकृति और कार्यवाही में देरी पर सवाल उठाए हैं। • इन आरोपों पर कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष उपलब्ध सामग्री में नहीं मिला।
पृष्ठभूमि और तारीखें
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक दोनों नेताओं को जंतर मंतर में प्रवेश से जुड़े मामले के बाद 14 अक्टूबर को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। सीजेपी ने 18 अक्टूबर की कार्यवाही पर आपत्ति जताई। इस पैकेज की रिपोर्टिंग डेट 19 अक्टूबर 2026 है।
आगे किस जानकारी का इंतज़ार
सीजेपी की लीगल टीम ने वकीलों से मशविरा कर अगला कदम तय करने की बात कही है। अगली सुनवाई, अंतिम रिहाई आदेश और उसकी शर्तों की प्रमाणित जानकारी उपलब्ध नहीं है।
संपादकीय विश्लेषण
इस प्रकरण का आकलन संबंधित आदेशों और शिकायत के आधार पर होना चाहिए। धमकी का आरोप गंभीर है। रिहाई में जानबूझकर देरी का दावा भी दस्तावेज़ी जांच मांगता है। किसी पक्ष की मंशा या दोनों नेताओं से कथित धमकी का संबंध अभी स्थापित मानना अनुचित होगा।
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Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।