US सीनेट ने टॉड ब्लांश को अटॉर्नी जनरल कन्फर्म किया। वोट बेहद करीबी रहा। उनकी नियुक्ति से DOJ की स्वतंत्रता और राजनीतिक प्रभाव को लेकर बहस तेज हो गई।
Location: United States
Date: 08 August 2026
By: Mohd Haris
अमेरिका की सियासत में एक अहम मोड़ आया है। टॉड ब्लांश को देर रात हुए वोट में US अटॉर्नी जनरल के रूप में कन्फर्म कर दिया गया। यह फैसला बेहद करीबी रहा और 50-49 के अंतर से पास हुआ।
ब्लांश पहले से ही एक्टिंग अटॉर्नी जनरल के तौर पर काम कर रहे थे। लेकिन उनकी स्थायी नियुक्ति ने अमेरिकी न्याय प्रणाली की स्वतंत्रता पर गंभीर बहस को जन्म दिया है।
टॉड ब्लांश की सबसे बड़ी पहचान यह है कि वह पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकील रह चुके हैं। यही वजह है कि उनकी नियुक्ति को लेकर विपक्ष और कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने भी चिंता जताई।
आलोचकों का कहना है कि न्याय विभाग का प्रमुख ऐसा व्यक्ति होना चाहिए जो पूरी तरह स्वतंत्र हो। लेकिन ब्लांश के मामले में यह सवाल बार-बार उठ रहा है कि क्या वह राजनीतिक दबाव से मुक्त रह पाएंगे।
सीनेट में यह वोट बेहद तनावपूर्ण रहा। रिपब्लिकन पार्टी के अंदर भी मतभेद देखने को मिले।
दो रिपब्लिकन सीनेटरों ने ब्लांश का विरोध किया। वहीं एक अहम सीनेटर के समर्थन ने पूरा समीकरण बदल दिया।
आखिरी समय में मिले समर्थन ने ब्लांश की नियुक्ति सुनिश्चित कर दी। यह दिखाता है कि अमेरिकी राजनीति में पार्टी लाइन के भीतर भी असहमति बढ़ रही है।
ब्लांश की कन्फर्मेशन में सबसे बड़ा मुद्दा एक प्रस्तावित 1.8 बिलियन डॉलर फंड रहा।
आरोप था कि इस फंड के जरिए ट्रंप के सहयोगियों को आर्थिक लाभ मिल सकता था।
बाद में ब्लांश ने इस योजना से पीछे हटने का आश्वासन दिया। इसी कदम के बाद कुछ रिपब्लिकन नेताओं का समर्थन उन्हें मिला।
अमेरिका में न्याय विभाग को परंपरागत रूप से स्वतंत्र संस्था माना जाता है।
लेकिन ब्लांश की नियुक्ति के बाद यह चिंता सामने आई है कि क्या यह स्वतंत्रता बरकरार रहेगी।
कुछ नेताओं का कहना है कि यह नियुक्ति DOJ को राजनीतिक एजेंडा के करीब ला सकती है।
ब्लांश के समर्थकों का कहना है कि वह अनुभवी वकील हैं और पहले भी महत्वपूर्ण पद संभाल चुके हैं।
उनके पक्ष में यह भी तर्क दिया गया कि उन्होंने विवादित प्रस्ताव से पीछे हटकर लचीलापन दिखाया।
कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने कहा कि मौजूदा हालात में वह बेहतर विकल्प हैं।
विरोध करने वालों का कहना है कि ब्लांश की ट्रंप से नजदीकी उन्हें निष्पक्ष निर्णय लेने से रोक सकती है।
कुछ नेताओं ने स्पष्ट कहा कि न्याय विभाग का राजनीतिक उपयोग लोकतंत्र के लिए खतरा हो सकता है।
यह भी कहा गया कि यह नियुक्ति संस्थागत संतुलन को कमजोर कर सकती है।
इस फैसले का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा।
US न्याय विभाग वैश्विक कानून, कॉर्पोरेट मामलों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में अहम भूमिका निभाता है।
इसलिए इसकी दिशा बदलने से अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी असर पड़ सकता है।
यह नियुक्ति ट्रंप की राजनीतिक ताकत को मजबूत करती दिख रही है।
उनके करीबी व्यक्ति का DOJ के शीर्ष पद पर आना विपक्ष के लिए चिंता का विषय है।
आने वाले समय में यह मुद्दा अमेरिकी चुनावी राजनीति में भी उठ सकता है।
अगर DOJ की नीतियों में बदलाव आता है तो इसका असर कॉर्पोरेट जांच, टैक्स मामलों और रेगुलेटरी फैसलों पर पड़ सकता है।
बड़ी कंपनियों और निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण संकेत है।
दुनिया भर में अमेरिका के लोकतांत्रिक संस्थानों को लेकर नजर बनी रहती है।
ब्लांश की नियुक्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी चर्चा तेज हुई है।
कई विश्लेषकों ने इसे संस्थागत संतुलन के नजरिए से अहम बताया है।
ब्लांश ने वादा किया है कि वह स्वतंत्र रूप से काम करेंगे।
लेकिन असली परीक्षा अब उनके फैसलों में दिखेगी।
अगर उन्होंने निष्पक्षता बनाए रखी तो आलोचना कम हो सकती है।
वरना यह विवाद लंबे समय तक बना रह सकता है।
टॉड ब्लांश की कन्फर्मेशन केवल एक नियुक्ति नहीं है।
यह अमेरिकी सियासत, न्याय प्रणाली और संस्थागत संतुलन की दिशा तय करने वाला कदम है।
अब सबकी नजर इस पर है कि वह अपने पद की गरिमा और स्वतंत्रता को कैसे बनाए रखते हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।