फजल शकूर खान के कथित अपहरण से पाकिस्तान में सियासी तनाव बढ़ा
Harish Qureshi
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2026-09-22 12:03:46
पाकिस्तान के KP मंत्री फजल शकूर खान के कथित अपहरण को लेकर विधानसभा में तीखी बहस हुई। सरकार ने एफआईआर और जांच की बात कही, जबकि घटना के पूरे तथ्य जांच के अधीन हैं।
पेशावर, पाकिस्तान | 22 सितंबर 2026
By Mohd Haris
पाकिस्तान में मंत्री के कथित अपहरण से हड़कंप
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में प्रांतीय मंत्री फजल शकूर खान के कथित अपहरण को लेकर सियासी तनाव बढ़ गया है। प्रांतीय विधानसभा में सोमवार को इस मामले पर चर्चा हुई और स्पीकर बाबर सलीम स्वाती ने कानून-व्यवस्था और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।
खैबर पख्तूनख्वा सरकार के मुताबिक फजल शकूर खान को कथित तौर पर सादे कपड़ों में आए लोगों ने उठाया। मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और विधानसभा के सदस्यों ने घटना की जांच की मांग की है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि “अपहरण” का आरोप अभी जांच के दायरे में है। उपलब्ध रिपोर्टों में घटना के पीछे मौजूद लोगों की पहचान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मंत्री फजल शकूर खान के साथ क्या हुआ?
रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने आरोप लगाया कि सादे कपड़ों में मौजूद लोगों ने प्रांतीय मंत्री फजल शकूर खान पर हमला किया और उन्हें अपने साथ ले गए। मुख्यमंत्री ने इसे 27 सितंबर को प्रस्तावित PTI मार्च से जोड़ते हुए राजनीतिक आरोप भी लगाए हैं।
KP विधानसभा में कानून मंत्री आफताब आलम ने भी कहा कि फजल शकूर खान को कथित तौर पर अगवा किया गया। उन्होंने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार फजल शकूर खान को MPA Hostel के बाहर से कथित तौर पर उठाए जाने की जानकारी सामने आई। रिपोर्ट में कहा गया कि वह मुख्यमंत्री हाउस में एक बैठक में जाने के लिए बाहर निकले थे।
विधानसभा में पुलिस की भूमिका पर सवाल
मामला खैबर पख्तूनख्वा विधानसभा तक पहुंचने के बाद पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर तीखी बहस हुई।
स्पीकर बाबर सलीम स्वाती ने कहा कि पिछले दो दिनों में सादे कपड़ों में मौजूद लोगों द्वारा गोलीबारी और लोगों को उठाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने इसे संस्थागत जवाबदेही का सवाल बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि निर्वाचित प्रतिनिधि और विधानसभा सदस्य सुरक्षित नहीं हैं, तो प्रांतीय सरकार के अधिकार और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठते हैं।
एक दूसरे मंत्री को भी कथित तौर पर निशाना बनाने का दावा
फजल शकूर खान के मामले से अलग, संचार एवं निर्माण मंत्री शकील खान से जुड़े एक कथित अपहरण प्रयास का मामला भी सामने आया है।
रिपोर्ट के मुताबिक 20 सितंबर को मलाकंद के बटखेला बाईपास पर शकील खान के सुरक्षा गार्डों ने एक संदिग्ध वाहन पर गोलीबारी की। घटना में एक व्यक्ति घायल हुआ। PTI नेताओं ने इसे मंत्री के अपहरण की कोशिश बताया, जबकि घटना के सभी पहलुओं की जांच जारी है।
पुलिस और मंत्री के पक्ष से घटना की अलग-अलग व्याख्याएं सामने आई हैं। इसलिए इसे फिलहाल “कथित अपहरण प्रयास” के तौर पर रिपोर्ट करना अधिक सटीक है।
FIR में क्या आरोप हैं?
शकील खान से जुड़े मामले में Counter Terrorism Department ने उनके खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। Daily Times के अनुसार CTD की एफआईआर में आरोप लगाया गया कि मंत्री और कुछ अन्य लोगों ने अधिकारियों पर गोलीबारी की।
दूसरी तरफ शकील खान ने अज्ञात हथियारबंद लोगों के खिलाफ अलग शिकायत देकर घटना की अपनी अलग तस्वीर पेश की है।
इससे स्पष्ट है कि दोनों पक्षों के दावे अलग हैं और जांच पूरी होने से पहले किसी एक पक्ष के आरोप को अंतिम तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
PTI ने क्या आरोप लगाया?
PTI नेतृत्व ने दोनों घटनाओं को पार्टी और उसके नेताओं पर बढ़ते दबाव से जोड़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने आरोप लगाया कि मंत्री फजल शकूर खान का कथित अपहरण और शकील खान को कथित तौर पर निशाना बनाया जाना 27 सितंबर के प्रस्तावित PTI विरोध प्रदर्शन को कमजोर करने की कोशिश है।
PTI का दावा है कि उसके कई सांसदों और कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया है।
ये राजनीतिक आरोप हैं। इनके पीछे किसी एक संगठन या समूह की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है।
27 सितंबर का मार्च क्यों महत्वपूर्ण है?
PTI ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। पार्टी का प्रमुख राजनीतिक मुद्दा जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई है।
Dawn के अनुसार PTI नेतृत्व ने गिरफ्तारी और कथित दबाव के बावजूद 27 सितंबर का मार्च जारी रखने की बात कही है।
इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में KP में मंत्रियों और पार्टी कार्यकर्ताओं से जुड़ी घटनाओं को देखा जा रहा है।
पाकिस्तान में कानून-व्यवस्था पर बढ़ता दबाव
मंत्री के कथित अपहरण का मामला ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान के कई हिस्सों में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बनी हुई है।
यह आंकड़ा मंत्री के मामले से सीधे जुड़ा नहीं है, लेकिन राजधानी और खैबर पख्तूनख्वा दोनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जारी व्यापक चिंताओं का संदर्भ देता है।
आगे क्या होगा?
अब तीन बातें महत्वपूर्ण रहेंगी।
पहली, पुलिस और प्रशासन की जांच में फजल शकूर खान को कथित तौर पर उठाने वाले लोगों की पहचान होती है या नहीं।
दूसरी, दर्ज एफआईआर में किन लोगों को आरोपी बनाया जाता है और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
तीसरी, 27 सितंबर के PTI मार्च से पहले KP में राजनीतिक गिरफ्तारियों और सुरक्षा घटनाओं का सिलसिला कितना बढ़ता है।
निष्कर्ष
फजल शकूर खान के कथित अपहरण ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में राजनीतिक और संस्थागत तनाव को बढ़ा दिया है। विधानसभा में निर्वाचित प्रतिनिधियों की सुरक्षा और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अपहरण के आरोप को जांच के अंतिम निष्कर्ष से अलग रखा जाए। उपलब्ध रिपोर्टों में राजनीतिक आरोप, पुलिस कार्रवाई और अलग-अलग पक्षों के बयान मौजूद हैं, लेकिन घटना के पीछे जिम्मेदार लोगों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।
27 सितंबर के PTI मार्च से पहले यह मामला पाकिस्तान की सियासत और KP की कानून-व्यवस्था, दोनों के लिए अहम बन गया है।
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Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।