इमरान खान की सेहत पर बड़ा विवाद, परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
इमरान खान की आंखों की रोशनी पर घमासान, सरकार ने दावे नकारे
जेल में इमरान की हालत पर सवाल, परिवार बोला 85% रोशनी गई
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर परिवार और पीटीआई ने गंभीर चिंता जताई है। परिवार का दावा है कि उनकी दाहिनी आंख की 85% रोशनी जा चुकी है। सरकार ने मेडिकल लापरवाही और बदसलूकी के आरोप खारिज किए हैं। सुप्रीम कोर्ट पहले ही उनके मेडिकल परीक्षण के आदेश दे चुका है।
इस्लामाबाद, पाकिस्तान | 26 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की जेल में सेहत को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। उनके परिवार और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी पीटीआई ने आरोप लगाया है कि जेल में रहते हुए उनकी स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ी है और उन्हें पर्याप्त तथा स्वतंत्र मेडिकल देखभाल नहीं मिल रही। परिवार की ओर से सबसे गंभीर दावा उनकी आंखों की रोशनी को लेकर है। रिपोर्टों के मुताबिक उनकी दाहिनी आंख में लगभग 85 फीसदी दृष्टि खोने की बात पहले भी अदालत के सामने रखी जा चुकी है। इसका मतलब है कि कथित तौर पर उस आंख में करीब 15 फीसदी दृष्टि शेष रहने का दावा किया गया था। हालांकि इस दावे को समझते समय यह अंतर जरूरी है कि आंखों की रोशनी में गंभीर कमी की रिपोर्ट और परिवार की ओर से लगाए गए मेडिकल लापरवाही के आरोप दो अलग-अलग बातें हैं। पहली बात मेडिकल रिकॉर्ड और जांच से जुड़ी है, जबकि दूसरी के लिए जिम्मेदारी तय करने वाली स्वतंत्र जांच जरूरी होगी।
इमरान खान की आंख की समस्या पहली बार फरवरी 2026 में बड़े सार्वजनिक विवाद का विषय बनी थी। उनके वकील ने पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उनकी दाहिनी आंख की दृष्टि लगभग 85 फीसदी कम हो चुकी है। उस समय रिपोर्टों में उनकी स्थिति को सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूज़न यानी आंख की रेटिना से जुड़ी रक्त वाहिका में रुकावट से जोड़ा गया था। इमरान खान के पक्ष ने इलाज में देरी को उनकी खराब होती दृष्टि से जोड़ा, जबकि सरकारी पक्ष ने मेडिकल लापरवाही के आरोपों को स्वीकार नहीं किया। इसलिए मौजूदा विवाद को केवल एक नई मेडिकल घटना के रूप में देखना सही नहीं होगा। यह कई महीनों से चल रहे उस विवाद का नया चरण है, जिसमें जेल में मेडिकल सुविधा, डॉक्टरों तक पहुंच और स्वतंत्र जांच मुख्य मुद्दे बने हुए हैं।
इमरान खान के परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें जेल में पर्याप्त मेडिकल सुविधा नहीं दी जा रही और उनकी हालत लगातार खराब हो रही है। परिवार ने जेल प्रशासन और सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र मेडिकल जांच की मांग की है। उनके बेटों सुलेमान और कासिम खान ने भी सार्वजनिक रूप से चिंता जताई है। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक दोनों ने आशंका जताई कि उचित इलाज नहीं मिलने की स्थिति में उनके पिता जेल में जीवित नहीं रह सकते। यह आरोप राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है, क्योंकि इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं और उनकी पार्टी लंबे समय से उनके साथ व्यवहार को लेकर सरकार तथा जेल प्रशासन पर सवाल उठाती रही है।
सरकार ने परिवार और पीटीआई के आरोपों को खारिज किया है। पाकिस्तानी सूचना मंत्रालय के मुताबिक इमरान खान को पर्याप्त मेडिकल देखभाल दी जा रही है और उनके खिलाफ मेडिकल लापरवाही या अमानवीय व्यवहार के आरोप रिकॉर्ड से समर्थित नहीं हैं। सरकारी पक्ष का कहना है कि इमरान खान के लगभग 30 मेडिकल परीक्षण किए जा चुके हैं और उन्हें चिकित्सकीय रूप से फिट पाया गया। सरकार ने यह भी कहा कि जेल में उन्हें परिवार, वकीलों और डॉक्टरों से संपर्क की सुविधा दी गई है। सरकार ने अकेलेपन यानी सॉलिटरी कन्फाइनमेंट के आरोप से भी इनकार किया है। उसका कहना है कि सुरक्षा और जेल नियमों के तहत इमरान खान को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इमरान खान की सेहत को लेकर बढ़ती चिंता के बीच पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को उन्हें इस्लामाबाद के एक निजी अस्पताल में मेडिकल जांच के लिए ले जाने का आदेश दिया था। अदालत ने परिवार से मुलाकात की अनुमति से जुड़े निर्देश भी दिए थे। इसके बाद विवाद इस बात पर खड़ा हुआ कि उन्हें अदालत के निर्देश के मुताबिक निजी अस्पताल ले जाने के बजाय पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज यानी पीआईएमएस क्यों ले जाया गया। पीटीआई ने इसी मुद्दे को लेकर सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की। सरकार ने इस फैसले के पीछे सुरक्षा कारणों का हवाला दिया। उसका कहना है कि पूर्व प्रधानमंत्री की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अस्पताल से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव किया गया।
इमरान खान को अस्पताल ले जाने के बाद सरकारी मेडिकल टीम ने उनकी स्थिति का आकलन किया। सरकारी पक्ष ने बाद में उन्हें मेडिकल तौर पर फिट बताया। लेकिन इमरान खान की पार्टी और उनके समर्थकों ने इस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। इस विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि क्या मेडिकल जांच में इमरान खान के निजी डॉक्टरों और अदालत के निर्देश के मुताबिक स्वतंत्र मेडिकल विशेषज्ञों को पर्याप्त भूमिका मिली या नहीं। पीटीआई का कहना है कि स्वतंत्र जांच के बिना सरकारी मेडिकल रिपोर्ट पर पूरा भरोसा नहीं किया जा सकता। यही बिंदु इस पूरे मामले को मेडिकल विवाद से आगे ले जाता है। जब किसी हाई-प्रोफाइल कैदी की गंभीर स्वास्थ्य स्थिति पर परिवार और सरकार के दावे अलग हों, तो स्वतंत्र मेडिकल मूल्यांकन की विश्वसनीयता सबसे अहम हो जाती है।
उपलब्ध रिपोर्टों से इतना स्पष्ट है कि इमरान खान की आंख की समस्या वास्तविक मेडिकल चिंता का विषय रही है और उनकी दृष्टि में गंभीर कमी की बात अदालत के सामने रखी गई थी। लेकिन मौजूदा समय में उनकी पूरी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में परिवार और सरकार के दावों में स्पष्ट अंतर है।
परिवार उनकी हालत को गंभीर और लगातार बिगड़ती हुई बता रहा है। दूसरी तरफ सरकार कहती है कि नियमित मेडिकल परीक्षणों में उनकी स्थिति संतोषजनक रही है। इसलिए किसी एक पक्ष के दावे को अंतिम तथ्य मानना संपादकीय रूप से उचित नहीं होगा। स्वतंत्र मेडिकल बोर्ड या सार्वजनिक रूप से सत्यापित मेडिकल रिकॉर्ड इस विवाद को स्पष्ट करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इमरान खान की सेहत का मामला पाकिस्तान की पहले से तनावपूर्ण सियासी स्थिति में एक और संवेदनशील मुद्दा बन गया है। पीटीआई इसे मानवाधिकार और न्यायिक आदेशों के पालन का मामला बता रही है, जबकि सरकार इसे जेल में बंद एक दोषी व्यक्ति की सुरक्षा और मेडिकल देखभाल का मामला बताती है। पीटीआई के आरोपों में जेल की परिस्थितियों और इमरान खान के साथ कथित व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी ने सरकार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी अपनाया है। इस विवाद का असर आने वाले राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों पर भी पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक पीटीआई ने 27 सितंबर को प्रस्तावित विरोध मार्च की तैयारी के बीच सरकार पर दबाव बढ़ाने का रुख अपनाया है।
इमरान खान की मेडिकल स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। 22 पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कप्तानों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से इमरान खान को उचित मेडिकल उपचार उपलब्ध कराने की अपील की। इन क्रिकेट हस्तियों ने अपनी अपील को राजनीतिक समर्थन के बजाय मानवीय और खेल जगत से जुड़ी चिंता के तौर पर पेश किया। इससे मामला पाकिस्तान की घरेलू सियासत से बाहर भी चर्चा में आया है। यह दबाव पाकिस्तान सरकार के लिए कूटनीतिक और सार्वजनिक छवि के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब इमरान खान की जेल परिस्थितियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से सवाल उठते रहे हैं।
इमरान खान 2018 से 2022 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे। अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के बाद उनकी सरकार सत्ता से बाहर हुई और अगस्त 2023 से वह जेल में हैं। उनके खिलाफ कई मुकदमे और सजाएं चलती रही हैं। इमरान खान और उनकी पार्टी कई मामलों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताती रही है, जबकि पाकिस्तानी अधिकारी और संबंधित संस्थाएं इन आरोपों को खारिज करते हैं। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में उनकी सेहत से जुड़ा हर आरोप ज्यादा संवेदनशील हो जाता है। इसलिए मेडिकल तथ्य, परिवार के आरोप और सरकारी जवाब को अलग-अलग दर्ज करना जरूरी है।
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि परिवार का दावा सही है या सरकार का। असल सवाल यह है कि क्या एक ऐसी स्वतंत्र मेडिकल प्रक्रिया उपलब्ध है, जिसके नतीजे पर दोनों पक्ष भरोसा कर सकें। अगर स्वतंत्र विशेषज्ञों की टीम इमरान खान की आंख, सामान्य स्वास्थ्य और जेल में मिली मेडिकल सुविधाओं का आकलन करती है, तो मौजूदा विवाद के कई पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है। दूसरी तरफ अगर स्वतंत्र मेडिकल जांच नहीं होती, तो आरोप और खंडन का यह सिलसिला आगे भी पाकिस्तान की सियासत को प्रभावित करता रहेगा।
अभी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, पीटीआई की कानूनी कार्रवाई और इमरान खान की मेडिकल स्थिति पर निगाह बनी हुई है। पीटीआई अदालत से यह सुनिश्चित कराने की कोशिश कर रही है कि उसके नेता को निर्धारित मेडिकल सुविधाएं और स्वतंत्र चिकित्सकीय जांच मिले। सरकार की ओर से सुरक्षा कारणों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। आने वाले दिनों में अदालत को यह तय करना होगा कि मेडिकल देखभाल और सुरक्षा के बीच संतुलन किस तरह कायम किया जाए। मामले का राजनीतिक असर भी इस बात पर निर्भर करेगा कि इमरान खान की मेडिकल स्थिति को लेकर नए मेडिकल रिकॉर्ड या स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष सामने आते हैं या नहीं।
इमरान खान की सेहत को लेकर मौजूदा विवाद में एक तथ्य स्पष्ट है। उनकी दाहिनी आंख की दृष्टि में गंभीर कमी की बात पहले अदालत के सामने रखी जा चुकी है। लेकिन उनकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति और कथित मेडिकल लापरवाही को लेकर परिवार तथा पाक सरकार के दावे एक-दूसरे से अलग हैं। परिवार 85 फीसदी दृष्टि जाने और इलाज में लापरवाही का आरोप लगा रहा है। सरकार इन आरोपों को खारिज करते हुए नियमित मेडिकल जांच और पर्याप्त इलाज का दावा कर रही है। इसलिए इस वक्त सबसे विश्वसनीय रास्ता स्वतंत्र मेडिकल जांच और पारदर्शी मेडिकल रिपोर्ट है। इमरान खान की सेहत का सवाल अब केवल एक कैदी की मेडिकल स्थिति नहीं रहा, बल्कि पाकिस्तान में न्यायपालिका, जेल प्रशासन, मानवाधिकार और सियासी जवाबदेही की बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।