पाक एंथम के लिए ब्रिटिश सिंगर ने 6 महीने सीखी उर्दू
जन गण मन के बाद पाक एंथम, लॉरा राइट की खास तैयारी
लॉरा राइट ने क्यों सीखी 6 महीने उर्दू?
ब्रिटिश सिंगर लॉरा राइट ने हेडिंग्ले में पाकिस्तान का राष्ट्रगान गाने से पहले छह महीने उर्दू सीखी। इससे पहले वह 2025 में भारत का जन गण मन बंगाली में गा चुकी थीं। राइट ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के एंथम उनके लिए खास चुनौती हैं और वह सही उच्चारण को लेकर गंभीर रहती हैं।
लीड्स, इंग्लैंड |21 अगस्त 2026 |शाह टाइम्स
By Mohd Haris
पाकिस्तानी एंथम के लिए छह महीने उर्दू सीखीं
इंग्लैंड की मशहूर मेज़ो-सोप्रानो लॉरा राइट ने पाकिस्तान का राष्ट्रगान गाने के लिए छह महीने तक उर्दू सीखने की तैयारी की। इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच हेडिंग्ले में पहले टेस्ट से पहले उन्होंने बिना म्यूजिक ट्रैक के पाकिस्तान का राष्ट्रगान पेश किया। उनके प्रदर्शन की सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आईं, लेकिन उनकी तैयारी ने खास ध्यान खींचा। राइट ने द एथलेटिक को दिए इंटरव्यू में बताया कि वह पिछले छह महीने से उर्दू पर काम कर रही थीं। उनका कहना था कि किसी देश का राष्ट्रगान गाना उनके लिए सम्मान की बात है और वह बिना पर्याप्त तैयारी के ऐसी जिम्मेदारी स्वीकार नहीं करतीं।
हेडिंग्ले में हुआ खास प्रदर्शन
19 अगस्त 2026 को इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच पहले टेस्ट से पहले हेडिंग्ले में पाकिस्तान का राष्ट्रगान गाया गया। इसे लॉरा राइट ने अकेले, यानी एकापेला अंदाज में पेश किया। इस प्रदर्शन का वीडियो टेस्ट मैच स्पेशल ने भी सोशल मीडिया पर साझा किया। राइट पहले भी बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में राष्ट्रगान गाने के लिए जानी जाती हैं। लेकिन पाकिस्तान और भारत के राष्ट्रगान उनके लिए भाषाई और उच्चारण के लिहाज से अलग चुनौती रहे हैं।
उर्दू सीखने के पीछे क्या थी वजह
राइट ने बताया कि वह केवल गीत की धुन और शब्द याद करके प्रदर्शन नहीं करना चाहती थीं। उनका फोकस उर्दू के सही उच्चारण और शब्दों की अदायगी पर था। उन्होंने इस तैयारी को सामान्य म्यूजिकल परफॉर्मेंस से अलग बताया। उनके मुताबिक, किसी दूसरे देश का राष्ट्रगान गाते वक्त गायक को भाषा, उच्चारण और शब्दों के अर्थ को समझने के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए। यही वजह थी कि पाकिस्तान का राष्ट्रगान गाने से पहले उन्होंने छह महीने उर्दू सीखने में लगाए। राइट के मुताबिक, वह इस जिम्मेदारी को एक बड़े सम्मान के तौर पर देखती हैं और उम्मीद करती हैं कि वह गीत के साथ पूरा इंसाफ कर पाएं।
जन गण मन से भी जुड़ा है लॉरा का अनुभव
लॉरा राइट का भारत से भी एक खास जुड़ाव रहा है। 2025 में भारत और इंग्लैंड की टेस्ट सीरीज के दौरान उन्होंने भारत का राष्ट्रगान जन गण मन बंगाली में गाया था। इसके लिए भी उन्होंने उच्चारण और भाषा की अलग से तैयारी की थी। राइट ने बताया कि जन गण मन पहली बार गाते समय वह बेहद नर्वस थीं। उन्होंने लंबे समय तक राष्ट्रगान की रिकॉर्डिंग सुनी और बंगाली बोलने वाले दो-तीन लोगों के साथ समय बिताकर उच्चारण, फ्रेजिंग और शब्दों के अर्थ को समझा। यह अनुभव दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में राष्ट्रगान की प्रस्तुति केवल गायन की तकनीकी क्षमता तक सीमित नहीं रहती। भाषा और सांस्कृतिक संदर्भ की समझ भी परफॉर्मेंस का हिस्सा बनती है।
जन गण मन को लेकर लॉरा ने क्या कहा
राइट ने बताया कि भारतीय राष्ट्रगान गाने से पहले उन्होंने उसकी भाषा को समझने पर खास ध्यान दिया था। उनके मुताबिक, उन्होंने गीत को लगातार सुना और स्थानीय भाषा बोलने वाले लोगों से सही उच्चारण सीखा। उन्होंने इसे अपने करियर का ऐसा हिस्सा बताया जिसे दर्शक आम तौर पर नहीं देखते। मंच पर कुछ मिनट का प्रदर्शन दिखाई देता है, लेकिन उसके पीछे भाषा सीखने, रिकॉर्डिंग सुनने और उच्चारण सुधारने की लंबी तैयारी होती है। भारत और पाकिस्तान के राष्ट्रगान को लेकर उनका अनुभव इस लिहाज से दिलचस्प है कि दोनों ही गीत उनके लिए अलग भाषाई चुनौती लेकर आए।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
पाकिस्तान का राष्ट्रगान गाने के बाद राइट की प्रस्तुति को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने उनकी तैयारी और सम्मानपूर्ण प्रस्तुति की तारीफ की, जबकि कुछ प्रतिक्रियाओं में गायन के अंदाज और उच्चारण को लेकर सवाल उठाए गए।
हालांकि, सोशल मीडिया प्रतिक्रिया को किसी आधिकारिक समीक्षा या विशेषज्ञ मूल्यांकन के बराबर नहीं माना जा सकता। उपलब्ध रिपोर्टों में मुख्य तथ्य यह है कि राइट ने प्रदर्शन से पहले छह महीने उर्दू सीखने की तैयारी की थी।
क्रिकेट में राष्ट्रगान का महत्व
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों में राष्ट्रगान मैच शुरू होने से पहले होने वाली औपचारिक रस्म का हिस्सा है। भारत, पाकिस्तान, इंग्लैंड और दूसरे देशों के मुकाबलों में यह आयोजन दोनों टीमों और उनके समर्थकों के लिए भावनात्मक महत्व रखता है। ऐसे मौकों पर कलाकार को उस देश के राष्ट्रीय गीत को सम्मान के साथ पेश करना होता है। खासकर जब कलाकार किसी दूसरे देश से आता हो, तब उच्चारण और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है। राइट ने अपने अनुभव में इसी पहलू पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वह किसी भी राष्ट्रगान को गाने के प्रस्ताव को हल्के में नहीं लेतीं।
भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए खास चुनौती
राइट के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के राष्ट्रगान उनके लिए खास तौर पर चुनौतीपूर्ण रहे। शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग में इटालियन और जर्मन जैसी भाषाओं की बुनियादी समझ मिलती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रगान गाते वक्त कई अलग भाषाओं का सामना होता है। इसलिए उन्होंने दोनों एंथम के लिए अलग तैयारी की। पाकिस्तान के लिए उर्दू और भारत के लिए बंगाली उच्चारण पर काम किया। यह उनकी पेशेवर तैयारी का हिस्सा है, लेकिन इसमें सांस्कृतिक सम्मान का पहलू भी जुड़ा हुआ है।
छह महीने की तैयारी क्यों चर्चा में है
राष्ट्रगान सामान्य गीत से अलग होता है। इसके शब्दों से किसी देश की राष्ट्रीय पहचान जुड़ी होती है। ऐसे में उच्चारण की छोटी गलती भी दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन सकती है। राइट ने इसी जोखिम को ध्यान में रखकर तैयारी की। उन्होंने साफ कहा कि वह तभी किसी राष्ट्रगान को गाने के लिए हामी भरती हैं, जब उन्हें लगता है कि उनके पास उसे सही तरीके से सीखने के लिए पर्याप्त समय है। यही बयान उनके छह महीने के उर्दू अध्ययन को संदर्भ देता है। यह केवल भाषा सीखने का दावा नहीं, बल्कि प्रदर्शन से पहले की उनकी प्रोफेशनल तैयारी का हिस्सा था।
लॉरा राइट कौन हैं
लॉरा राइट ब्रिटिश मेज़ो-सोप्रानो हैं और अंतरराष्ट्रीय खेल तथा बड़े सार्वजनिक आयोजनों में राष्ट्रगान और दूसरे म्यूजिकल कार्यक्रमों की प्रस्तुति के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने अलग-अलग देशों के राष्ट्रीय गीतों को पेश किया है। उनका काम ऐसे मौकों पर विशेष चुनौती लेकर आता है जहां उन्हें अपनी मातृभाषा से अलग भाषाओं में गाना होता है। भारत और पाकिस्तान के एंथम के लिए उन्होंने इसी वजह से अतिरिक्त तैयारी की।
हेडिंग्ले में उनका प्रदर्शन इसी अंतरराष्ट्रीय म्यूजिकल करियर की एक और कड़ी है।
असली कहानी वायरल वीडियो से आगे है
सोशल मीडिया पर आम तौर पर कुछ मिनट का प्रदर्शन ही नजर आता है। लेकिन लॉरा राइट की कहानी बताती है कि ऐसे प्रदर्शन के पीछे भाषा और उच्चारण की लंबी तैयारी भी होती है। पाकिस्तान का राष्ट्रगान गाने के लिए छह महीने उर्दू सीखना और भारत का जन गण मन बंगाली में गाने से पहले स्थानीय वक्ताओं के साथ उच्चारण का अभ्यास करना उनके प्रोफेशनल एप्रोच को दिखाता है। यहां सबसे अहम तथ्य यही है कि राइट ने दोनों देशों के राष्ट्रगान को एक सामान्य स्टेज परफॉर्मेंस की तरह नहीं लिया। उन्होंने भाषा को समझने और सही तरीके से पेश करने के लिए समय दिया।
निष्कर्ष
लॉरा राइट का पाकिस्तान का राष्ट्रगान गाने से पहले छह महीने उर्दू सीखना अब क्रिकेट और सोशल मीडिया की चर्चा का हिस्सा बन गया है। हेडिंग्ले में उनके एकापेला प्रदर्शन ने ध्यान खींचा, लेकिन इसके पीछे की तैयारी इस कहानी का ज्यादा महत्वपूर्ण पहलू है। राइट पहले भारत का जन गण मन भी बंगाली में गा चुकी हैं और उसके लिए उन्होंने अलग से उच्चारण की तैयारी की थी। उनके मुताबिक, राष्ट्रगान गाना उनके लिए सम्मान और जिम्मेदारी दोनों है। इस पूरे मामले में स्थापित तथ्य यही है कि एक ब्रिटिश सिंगर ने पाकिस्तान का राष्ट्रगान सही तरीके से पेश करने के लिए छह महीने उर्दू सीखी। भारत के राष्ट्रगान के लिए भी उन्होंने भाषा और उच्चारण पर लंबी तैयारी की थी।