ट्रम्प बोले, 8 युद्ध सुलझाए, फिर भी नोबेल मिलने का भरोसा नहीं
नोबेल शांति पुरस्कार पर ट्रम्प का सवाल, क्या समिति देगी सम्मान?
ट्रम्प की नोबेल दावेदारी के बीच यूक्रेन और ईरान के संघर्ष चर्चा में
वॉशिंगटन | 8 अक्टूबर 2026
By Mohd Haris
ट्रम्प का दावा है कि जनवरी 2025 में दोबारा राष्ट्रपति पद संभालने के बाद उन्होंने 8 अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने में भूमिका निभाई है। लेकिन इनमें से कई संघर्षों में उनकी भूमिका, शांति समझौतों की स्थिरता और वास्तविक नतीजों को लेकर सवाल बने हुए हैं।
नोबेल समिति को लेकर ट्रम्प ने क्या कहा?
ट्रम्प ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें नहीं मालूम नोबेल समिति क्या फैसला करेगी। उन्होंने आशंका जताई कि समिति की ऐसी प्रतिष्ठा है कि वह उनके जैसे लोगों को पुरस्कार देने से परहेज़ कर सकती है। उन्होंने अपनी उपलब्धियों का ज़िक्र करते हुए दावा किया कि किसी दूसरे अमेरिकी राष्ट्रपति ने इतने संघर्षों को नहीं सुलझाया। उनके मुताबिक, वह 8 युद्धों को समाप्त कराने में भूमिका निभा चुके हैं। ट्रम्प ने यह भी कहा कि उन्हें सम्मान नहीं देना नोबेल समिति की साख के लिए नुकसानदेह होगा। हालांकि, ये सभी टिप्पणियां राष्ट्रपति के व्यक्तिगत दावे और मूल्यांकन हैं, समिति का आधिकारिक रुख नहीं।
8 युद्ध समाप्त कराने का दावा कितना सही?
ट्रम्प प्रशासन अपनी विदेश नीति और मध्यस्थता की कोशिशों को शांति स्थापित करने की उपलब्धि के तौर पर पेश करता रहा है। अमेरिकी प्रशासन जिन संघर्षों का उल्लेख करता है, उनमें भारत-पाकिस्तान, कंबोडिया-थाईलैंड, कांगो-रवांडा, आर्मेनिया-अज़रबैजान और मध्य पूर्व से जुड़े विवाद शामिल हैं। लेकिन किसी संघर्ष में मध्यस्थता, अस्थायी युद्धविराम और स्थायी शांति समझौते के बीच अहम फर्क है। कुछ संबंधित पक्ष ट्रम्प की भूमिका के अमेरिकी आकलन से सहमत नहीं हैं। कंबोडिया और थाईलैंड की सीमा पर दोबारा हिंसा तथा कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में संघर्ष जारी रहने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
रूस-यूक्रेन युद्ध अब भी बड़ी चुनौती
ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से पहले रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्त कराने का वादा किया था। लेकिन अक्टूबर 2026 तक इस युद्ध का स्थायी समाधान सामने नहीं आया है। यह स्थिति ट्रम्प की उस व्यापक दावेदारी के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें वह खुद को अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापित करने वाले नेता के रूप में पेश करते हैं। किसी युद्ध को समाप्त कराने का दावा तभी पूरी तरह परखा जा सकता है, जब संघर्षविराम, संबंधित पक्षों की सहमति और समझौते के पालन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो।
ईरान के साथ सैन्य संघर्ष पर भी सवाल
अमेरिका और इज़राइल की ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्रीय तनाव ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है।
इस संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में अस्थिरता और तेल तथा गैस की कीमतों पर दबाव की स्थिति पैदा हुई। ऐसे में ट्रम्प की शांति संबंधी दावेदारी का मूल्यांकन करते समय उनकी मध्यस्थता की कोशिशों के साथ अमेरिकी प्रशासन की सैन्य नीतियों को भी संदर्भ में देखना ज़रूरी है।
2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए 287 उम्मीदवार
नोबेल संस्थान के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक इस वर्ष शांति पुरस्कार के लिए 287 नामांकन प्राप्त हुए हैं। कंबोडिया, इज़राइल और पाकिस्तान के नेताओं ने ट्रम्प को नामित करने की बात कही है। हालांकि, नोबेल समिति व्यक्तिगत नामांकन की पुष्टि या खंडन नहीं करती। समिति के नियमों के अनुसार नामांकन, जांच और चयन संबंधी रिकॉर्ड 50 वर्षों तक गोपनीय रहते हैं। इसलिए किसी नेता या संस्था की सार्वजनिक दावेदारी को आधिकारिक नामांकन अथवा पुरस्कार मिलने की पुष्टि के तौर पर प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
नोबेल शांति पुरस्कार के चयन की प्रक्रिया क्या है?
नोबेल शांति पुरस्कार का चयन नॉर्वे की 5 सदस्यीय नोबेल समिति करती है। अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत में अंतरराष्ट्रीय भाईचारे को बढ़ावा देने, स्थायी सेनाओं को कम करने और शांति प्रयासों को प्रोत्साहित करने जैसे उद्देश्यों का उल्लेख है। समिति के सचिव क्रिस्टियान बर्ग हार्पविकेन ने हाल में कहा कि बदलती अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के बीच सहयोग के नए रास्ते विकसित करने वाले लोगों और संस्थाओं का काम पुरस्कार के मूल उद्देश्यों के अनुरूप है। उन्होंने किसी विशेष उम्मीदवार के पक्ष या विपक्ष में फैसला सार्वजनिक नहीं किया।
9 अक्टूबर को होगा विजेता का एलान
स्थान: नॉर्वेजियन नोबेल संस्थान, ओस्लो
घोषणा: समिति के अध्यक्ष यॉर्गेन वाटने फ्रिडनेस
नोबेल संस्थान के आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार विजेता की घोषणा 9 अक्टूबर 2026 को होगी। पुरस्कार वितरण समारोह 10 दिसंबर को आयोजित किया जाएगा।
2025 का नोबेल पदक और ट्रम्प
वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। जनवरी 2026 में उन्होंने अपना नोबेल पदक ट्रम्प को भेंट किया था। ट्रम्प ने अपने हालिया बयान में इस घटना का उल्लेख किया। हालांकि, पदक भेंट किए जाने का अर्थ पुरस्कार का आधिकारिक हस्तांतरण नहीं है। नोबेल विजेता का दर्जा मूल सम्मान प्राप्तकर्ता के पास ही रहता है।
ट्रम्प की नोबेल दावेदारी को 3 अलग पहलुओं से समझना ज़रूरी है। पहला, किसी देश के राष्ट्रपति की कूटनीतिक पहल और उसका वास्तविक परिणाम अलग विषय हैं। मध्यस्थता की कोशिश अपने आप में किसी युद्ध के स्थायी समाधान का प्रमाण नहीं होती। दूसरा, शांति पुरस्कार का चयन राजनीतिक लोकप्रियता या सार्वजनिक दावेदारी पर आधारित नहीं है। समिति अपने नियमों, उपलब्ध साक्ष्यों और स्वतंत्र मूल्यांकन के आधार पर फैसला करती है। तीसरा, ट्रम्प के दावों के साथ रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान संघर्ष और अन्य क्षेत्रों में जारी अस्थिरता का संदर्भ भी महत्वपूर्ण है। इस पूरे मामले का केंद्रीय सवाल ट्रम्प की व्यक्तिगत इच्छा नहीं, बल्कि यह है कि अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए उनके प्रयासों के परिणाम कितने ठोस, स्वीकार्य और टिकाऊ रहे हैं। 9 अक्टूबर की घोषणा इस वर्ष के विजेता का नाम स्पष्ट करेगी। उससे पहले किसी भी संभावित नतीजे को निश्चित मानना उचित नहीं होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।