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ट्रंप का मीडिया पर बड़ा एक्शन, CNN, MS NOW और Politico पर व्हाइट हाउस में रोक

Harish Qureshi 2026-09-19 12:13:27
ट्रंप का मीडिया पर बड़ा एक्शन, CNN, MS NOW और Politico पर व्हाइट हाउस में रोक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस और उनके प्रशासन की कवरेज को लेकर 3 प्रमुख समाचार संस्थानों CNN, MS NOW और Politico के खिलाफ बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है। ट्रंप ने कहा कि इन संस्थानों को तत्काल प्रभाव से व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित किया जा रहा है। उन्होंने इनके कवरेज को ‘फेक न्यूज़’ बताते हुए भविष्य में दूसरे मीडिया संस्थानों पर भी इसी तरह की कार्रवाई के संकेत दिए हैं।


वॉशिंगटन डीसी | 19 सितंबर 2026

By Mohd Haris


ट्रंप का आरोप क्या है


ट्रंप ने 18 सितंबर को अपने सोशल मीडिया मंच पर घोषणा की कि CNN, MS NOW और Politico को व्हाइट हाउस से बाहर रखा जाएगा। उनके मुताबिक ये संस्थान उनके प्रशासन और अमेरिका से जुड़ी खबरों में ‘फिक्शन’ और ‘झूठ’ प्रकाशित कर रहे हैं।


बाद में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि इन संस्थानों की रिपोर्टिंग लंबे समय से उनके प्रशासन के खिलाफ रही है। उन्होंने कार्रवाई के पीछे वर्षों की कवरेज को वजह बताया। ट्रंप ने न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉशिंगटन पोस्ट का भी नाम लेते हुए उन्हें आलोचनात्मक मीडिया संस्थानों के तौर पर निशाना बनाया।


अभी प्रतिबंध का वास्तविक दायरा कितना है


ट्रंप की घोषणा में ‘तत्काल प्रभाव’ की बात कही गई, लेकिन शुरुआती रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं था कि प्रतिबंध को व्यावहारिक तौर पर किस तरह लागू किया जाएगा। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक घोषणा के बाद भी संबंधित संस्थानों के पत्रकार शुक्रवार को व्हाइट हाउस परिसर में काम करते नजर आए।


इसी वजह से फिलहाल इसे एक घोषित प्रतिबंध के तौर पर देखना जरूरी है। इसके तहत प्रेस पास, व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश, ब्रीफिंग में भागीदारी और राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की कवरेज पर क्या असर पड़ेगा, इसका पूरा प्रशासनिक प्रारूप अभी सामने नहीं आया है।


CNN और Politico का जवाब


CNN ने ट्रंप के फैसले का विरोध करते हुए कहा कि उसके व्हाइट हाउस संवाददाता निष्पक्ष और सटीक रिपोर्टिंग के लिए प्रतिबद्ध हैं। नेटवर्क ने अमेरिकी संविधान के प्रथम संशोधन में प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों का हवाला दिया और सरकारी हस्तक्षेप के बिना पत्रकारिता करने के अधिकार की बात कही।


Politico ने भी कहा कि वह मौजूदा और भविष्य की अमेरिकी सरकारों की रिपोर्टिंग जारी रखेगा। संस्थान ने प्रथम संशोधन के तहत अपने अधिकारों की रक्षा करने की बात कही है।


MS NOW की ओर से शुरुआती घंटों में तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।


कानूनी सवाल क्यों उठ रहे हैं


ट्रंप के फैसले का सबसे अहम पहलू अमेरिकी संविधान का प्रथम संशोधन है। यह प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की संवैधानिक सुरक्षा देता है। हालांकि व्हाइट हाउस परिसर में सामान्य नागरिकों की तरह पत्रकारों का प्रवेश स्वतःसिद्ध अधिकार नहीं है, लेकिन प्रेस सुविधाएं स्थापित करने के बाद पत्रकारों को उनके समाचार कवरेज के आधार पर मनमाने ढंग से बाहर करने को लेकर संवैधानिक सवाल उठते हैं।


अमेरिकी अदालतों में व्हाइट हाउस प्रेस एक्सेस से जुड़े पुराने मामले इस बहस का आधार बनते हैं। वर्ष 1977 में डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया सर्किट की अदालत ने एक मामले में कहा था कि व्हाइट हाउस प्रेस सुविधाओं तक पहुंच को मनमाने तरीके से प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता और पत्रकारों के संवैधानिक हितों को ध्यान में रखते हुए उचित प्रक्रिया जरूरी है।


हालांकि मौजूदा मामले में अंतिम कानूनी स्थिति अदालतों के सामने आने वाले वास्तविक आदेश, प्रतिबंध की शर्तों और प्रशासन द्वारा उसके अमल पर निर्भर करेगी। इसलिए इसे अभी अंतिम रूप से असंवैधानिक घोषित कर देना कानूनी स्थिति को सरल बनाना होगा।


व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन की आपत्ति


व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन ने भी ट्रंप की घोषणा का विरोध किया। संगठन की ओर से कहा गया कि प्रेस की स्वतंत्रता सरकारी हस्तक्षेप से संवैधानिक रूप से सुरक्षित है और यह सुरक्षा इस बात पर निर्भर नहीं होनी चाहिए कि राष्ट्रपति किसी समाचार संस्थान की रिपोर्टिंग या पत्रकारों के सवालों से सहमत हैं या नहीं।

यह विवाद क्यों महत्वपूर्ण है


व्हाइट हाउस अमेरिकी कार्यपालिका का प्रमुख केंद्र है। राष्ट्रपति और उनके प्रशासन की गतिविधियों की नियमित पत्रकारिता कवरेज अमेरिकी लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


सरकार और मीडिया के बीच टकराव नया नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपतियों ने अलग-अलग दौर में आलोचनात्मक खबरों पर नाराजगी जाहिर की है। लेकिन जब किसी मीडिया संस्थान की सरकारी पहुंच उसके संपादकीय कवरेज से जोड़ी जाती है, तो प्रेस स्वतंत्रता और सरकारी शक्ति के बीच संतुलन का सवाल सामने आता है।


ट्रंप का मीडिया के साथ पुराना टकराव


ट्रंप और अमेरिकी मीडिया संस्थानों के बीच विवाद उनके पहले कार्यकाल से चला आ रहा है। उनके प्रशासन ने पहले भी कुछ पत्रकारों की व्हाइट हाउस पहुंच को लेकर विवाद का सामना किया था।


वर्ष 2018 में CNN के पत्रकार जिम एकोस्टा की व्हाइट हाउस प्रेस क्रेडेंशियल को लेकर विवाद हुआ था। मामला अदालत तक पहुंचा और बाद में उनकी पहुंच बहाल हुई। इसी तरह दूसरे कार्यकाल में भी प्रशासन और मीडिया संस्थानों के बीच प्रेस एक्सेस को लेकर कानूनी टकराव देखने को मिला है।


एसोसिएटेड प्रेस के साथ भी वर्ष 2025 में व्हाइट हाउस कार्यक्रमों और एयर फोर्स वन से जुड़ी प्रेस पहुंच को लेकर विवाद हुआ था। मामला अदालत तक पहुंचा।


क्या दूसरे मीडिया संस्थानों पर भी कार्रवाई होगी


ट्रंप ने अपनी घोषणा में संकेत दिया कि दूसरे मीडिया संस्थानों के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई हो सकती है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉशिंगटन पोस्ट का नाम लिया और उनकी रिपोर्टिंग पर भी नाराजगी जताई।


हालांकि 19 सितंबर 2026 तक यह स्पष्ट नहीं है कि इन संस्थानों के खिलाफ कोई औपचारिक प्रतिबंध लागू किया गया है या नहीं। इसलिए भविष्य की कार्रवाई को लेकर अभी केवल ट्रंप के सार्वजनिक बयानों को आधार बनाया जा सकता है।


मामला अदालत तक पहुंचा तो क्या होगा


अगर प्रतिबंध को औपचारिक प्रशासनिक आदेश या प्रेस क्रेडेंशियल कार्रवाई के रूप में लागू किया जाता है, तो संबंधित मीडिया संस्थानों की ओर से अदालत का रुख किए जाने की संभावना है। इससे प्रथम संशोधन, प्रेस एक्सेस और प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़े सवाल सामने आएंगे।


पिछले न्यायिक मामलों में अदालतों ने यह जांच की है कि सरकार ने पत्रकार की पहुंच सुरक्षा जैसे वैध कारण से सीमित की या रिपोर्टिंग की सामग्री और दृष्टिकोण के आधार पर। 1977 के मामले में अदालत ने प्रेस एक्सेस पर मनमाने प्रतिबंधों के खिलाफ प्रक्रिया संबंधी सुरक्षा पर जोर दिया था।


जनता के लिए इसका क्या मतलब है


इस विवाद का असर केवल मीडिया संस्थानों तक सीमित नहीं है। व्हाइट हाउस की गतिविधियों से जुड़ी स्वतंत्र रिपोर्टिंग जनता को सरकार के फैसलों, नीतियों और सार्वजनिक बयानों की जानकारी देती है।


अगर किसी प्रशासन और मीडिया संस्थान के बीच विवाद बढ़ता है, तो पाठकों और दर्शकों के लिए अलग-अलग स्रोतों की रिपोर्टिंग को देखना और मूल दस्तावेजों, आधिकारिक बयानों तथा स्वतंत्र रिपोर्टों के बीच अंतर समझना अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।


मीडिया संस्थानों के लिए चुनौती


CNN, MS NOW और Politico के सामने अब दो स्तर की चुनौती है। पहला, व्हाइट हाउस से प्रत्यक्ष रिपोर्टिंग की पहुंच बनाए रखना। दूसरा, अगर प्रशासन प्रतिबंध लागू करता है तो उसके खिलाफ कानूनी और संस्थागत रास्ते अपनाना।


दूसरी ओर प्रशासन का तर्क यह है कि राष्ट्रपति को उन संस्थानों के साथ संबंध तय करने का अधिकार होना चाहिए जिन्हें वह अपनी कवरेज के कारण अविश्वसनीय मानता है। लेकिन जब सरकारी प्रेस सुविधाओं तक पहुंच को संपादकीय कवरेज से जोड़ा जाता है, तो संवैधानिक सवाल उठते हैं।


आगे क्या होगा


अब सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह होगा कि व्हाइट हाउस प्रतिबंध को किस प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत लागू करता है। इसके बाद प्रभावित संस्थानों की प्रतिक्रिया और संभावित न्यायिक चुनौती पर नजर रहेगी।


यह भी महत्वपूर्ण होगा कि क्या अन्य मीडिया संस्थानों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई की जाती है और क्या व्हाइट हाउस प्रेस एक्सेस के लिए नए नियम जारी करता है।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रतिबंध किस सीमा तक स्थायी रूप लेगा। ट्रंप की घोषणा स्पष्ट है, लेकिन उसके कानूनी और प्रशासनिक प्रभाव का अंतिम स्वरूप अभी सामने आना बाकी है।


निष्कर्ष


डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी मीडिया के बीच ताजा टकराव ने एक बार फिर प्रेस स्वतंत्रता, सरकारी पहुंच और राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्ति के बीच संतुलन पर बहस तेज कर दी है। CNN, MS NOW और Politico पर घोषित प्रतिबंध अब केवल मीडिया और राष्ट्रपति के बीच विवाद नहीं रहा, बल्कि अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था में प्रेस एक्सेस की सीमाओं से जुड़ा मुद्दा बन गया है।


अगले चरण में प्रशासनिक आदेश, प्रेस क्रेडेंशियल से जुड़े फैसले और संभावित अदालती कार्रवाई यह तय करेगी कि ट्रंप की घोषणा व्यवहार में किस रूप में लागू होती है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही रहेगा कि सरकारी सत्ता और स्वतंत्र पत्रकारिता के बीच संवैधानिक संतुलन किस तरह कायम रहता है।

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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