बुधवार, 30 September 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
Book Your Ads With Shah Times
India

उमर खालिद-शरजील इमाम की जमानत फिर खारिज, दिल्ली हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

Mohammad Naved • 2026-09-30 12:40:41
उमर खालिद-शरजील इमाम की जमानत फिर खारिज, दिल्ली हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत

उमर खालिद और शरजील इमाम को हाईकोर्ट से झटका, जमानत याचिका खारिज


दिल्ली दंगा साजिश केस में उमर खालिद-शरजील इमाम की जमानत नामंजूर


UAPA केस में दोनों को राहत नहीं, दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत अपील खारिज की

📍

नई दिल्ली

🗓️

30 सितंबर 2026

✍️Mohd Naved


जमानत याचिका फिर खारिज

दिल्ली दंगा साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को एक बार फिर अदालत से जमानत नहीं मिली। दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की डिवीजन बेंच ने 30 सितंबर 2026 को दोनों की जमानत अपील खारिज कर दी। दिल्ली हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर 30 सितंबर के फैसलों की घोषणा दर्ज है।

यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़े कथित बड़े आपराधिक षड्यंत्र की जांच से संबंधित है। मामले में कठोर गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA की धाराएं भी लगाई गई हैं।

जमानत खारिज होने का अर्थ यह नहीं है कि दोनों आरोपियों को मुकदमे में दोषी ठहरा दिया गया है। जमानत की सुनवाई के दौरान अदालत अभियोजन सामग्री और लागू कानूनी कसौटी के आधार पर यह तय करती है कि आरोपी को मुकदमे के दौरान रिहा किया जाना चाहिए या नहीं।


मामला किस बारे में है

मामला FIR नंबर 59/2020 से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी 2026 के फैसले में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार, यह FIR फरवरी 2020 की दिल्ली हिंसा के सिलसिले में दर्ज की गई थी। जांच के दौरान आरोपपत्र और पूरक आरोपपत्र दाखिल किए गए, जिनमें भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ UAPA की धाराएं 13, 16, 17 और 18 भी शामिल थीं।

अभियोजन का आरोप है कि हिंसा अचानक हुई घटनाओं का परिणाम नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक बड़े षड्यंत्र की योजना थी। इस आरोप को आरोपी पक्ष ने स्वीकार नहीं किया है। आरोपों की अंतिम पुष्टि मुकदमे के दौरान साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने जनवरी 2026 के फैसले में भी स्पष्ट किया था कि उस स्तर पर की गई टिप्पणियां जमानत के सीमित परीक्षण तक थीं और उनसे किसी आरोपी की अंतिम दोषसिद्धि तय नहीं होती।


उमर खालिद और शरजील इमाम पर क्या आरोप हैं

अभियोजन के रिकॉर्ड के अनुसार, उमर खालिद और शरजील इमाम को कथित साजिश में केंद्रीय भूमिका से जोड़ा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में दोनों के मामलों की समीक्षा करते हुए कहा था कि अभियोजन सामग्री को इस स्तर पर उसके प्रथमदृष्टया स्वरूप में देखने पर दोनों के खिलाफ योजना, मोबिलाइजेशन और रणनीतिक दिशा से जुड़ी भूमिका का आरोप सामने आता है।

यह महत्वपूर्ण है कि ये अदालत के जमानत स्तर पर किए गए प्रथमदृष्टया आकलन थे। इन्हें अंतिम दोषसिद्धि के रूप में नहीं पढ़ा जा सकता।

मामले में अभियोजन ने भाषणों, बैठकों, डिजिटल कम्युनिकेशन और अन्य सामग्री का सहारा लिया है। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में दोनों के खिलाफ अभियोजन के आरोपों का विस्तृत उल्लेख है।


जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला था

5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इसी मामले में कई आरोपियों की जमानत पर फैसला दिया था। उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत उस समय मंजूर नहीं हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों की अपील खारिज करते हुए कहा था कि UAPA की धारा 43D(5) के तहत जमानत पर लागू वैधानिक कसौटी इस मामले में प्रभावी रहती है। अदालत ने अभियोजन सामग्री को प्रथमदृष्टया आधार पर देखते हुए दोनों के खिलाफ केंद्रीय भूमिका का आरोप माना था।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण भविष्य की कानूनी गुंजाइश छोड़ी थी। अदालत ने कहा था कि संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने या 1 साल की अवधि समाप्त होने, इनमें जो पहले हो, उसके बाद दोनों संबंधित अदालत के सामने जमानत की मांग फिर रख सकते हैं।


UAPA की धारा 43D(5) क्यों महत्वपूर्ण है

इस मामले में जमानत का कानूनी सवाल सामान्य आपराधिक मामलों से अलग है। UAPA की धारा 43D(5) जमानत के लिए एक सख्त वैधानिक व्यवस्था निर्धारित करती है।

सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी के फैसले में कहा था कि अगर अभियोजन की सामग्री को प्रथमदृष्टया देखने पर आरोपों के सही होने के उचित आधार दिखाई देते हैं, तो इस वैधानिक रोक का असर जमानत पर पड़ता है। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि लंबे समय तक चलने वाली हिरासत को संविधान के अनुच्छेद 21 में मिली व्यक्तिगत स्वतंत्रता के संदर्भ में लगातार परखा जाना चाहिए।

यानी अदालत के सामने दो कानूनी पहलू साथ रहते हैं। एक तरफ UAPA की सख्त जमानत व्यवस्था है और दूसरी तरफ आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा मुकदमे की समयबद्ध प्रगति का संवैधानिक सवाल है।


लंबे समय की हिरासत भी बनी अहम दलील

उमर खालिद और शरजील इमाम की ओर से लंबे समय से जारी हिरासत का मुद्दा भी उठाया गया। सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के फैसले में इस दलील का उल्लेख है कि लंबे समय तक मुकदमा आगे नहीं बढ़ने की स्थिति में लगातार हिरासत अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता के सवाल को जन्म देती है।

हालांकि जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने यह दलील दोनों को तत्काल जमानत देने के लिए पर्याप्त नहीं मानी। अदालत ने साथ ही ट्रायल कोर्ट को कार्यवाही तेजी से आगे बढ़ाने और विशेष रूप से संरक्षित गवाहों की गवाही को बिना अनावश्यक देरी के आगे बढ़ाने की हिदायत दी थी।


पहले भी जमानत पर राहत नहीं मिली

दोनों आरोपियों की जमानत का मामला इससे पहले भी अदालतों के सामने आ चुका है। जनवरी 2026 के सुप्रीम कोर्ट फैसले में पूर्व की न्यायिक कार्यवाही और जमानत पर हुए विचार का विस्तृत रिकॉर्ड दर्ज है। इसके बाद 4 जुलाई 2026 को ट्रायल कोर्ट ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज की थीं। बाद में दोनों ने हाईकोर्ट का रुख किया।

30 सितंबर की सुनवाई इसी कानूनी प्रक्रिया का अगला चरण थी।


2020 की हिंसा का व्यापक संदर्भ

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे। सुप्रीम कोर्ट के जनवरी 2026 के फैसले में दर्ज रिकॉर्ड के अनुसार, हिंसा के दौरान जान-माल का भारी नुकसान हुआ और बड़ी संख्या में सार्वजनिक तथा निजी संपत्तियां प्रभावित हुईं।

अदालत ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए भी यह स्पष्ट किया था कि जमानत के स्तर पर आरोपी की अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की जाती। अदालत का परीक्षण अभियोजन सामग्री, आरोपों की प्रथमदृष्टया स्थिति और लागू कानूनी मानक तक सीमित रहता है।


राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ से अलग कानूनी सवाल

इस मामले का राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ व्यापक है, लेकिन मौजूदा सुनवाई का मुख्य सवाल जमानत से जुड़ा कानूनी परीक्षण था।

अदालत को यह देखना था कि UAPA के तहत लागू वैधानिक शर्तों और उपलब्ध अभियोजन सामग्री को देखते हुए दोनों को मुकदमे की अवधि में रिहा किया जा सकता है या नहीं।

इसी वजह से अदालत की जमानत संबंधी टिप्पणी को अंतिम दोष या निर्दोषता के फैसले के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में इस सीमा को स्पष्ट रूप से दर्ज किया था।


अब आगे क्या होगा

30 सितंबर 2026 के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद दोनों आरोपियों के सामने आगे की न्यायिक प्रक्रिया के विकल्प खुले रहेंगे। मौजूदा मामले में ट्रायल की प्रगति, गवाहों की परीक्षा और आगे की न्यायिक कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।

जनवरी 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, संरक्षित गवाहों की परीक्षा पूरी होने या 1 साल की अवधि पूरी होने, इनमें जो पहले हो, उसके बाद दोनों संबंधित अदालत में जमानत की मांग दोबारा रख सकते हैं।

इसका मतलब यह है कि आज की जमानत अस्वीकृति को मुकदमे के अंतिम परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अंतिम दोष या बरी होने का फैसला ट्रायल के दौरान साक्ष्यों और कानूनी परीक्षण के बाद होगा।


उमर खालिद और शरजील इमाम को 30 सितंबर 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत नहीं मिली। मामला UAPA के तहत 2020 की उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा से जुड़े कथित बड़े षड्यंत्र का है।

मौजूदा कानूनी स्थिति में दोनों की हिरासत जारी है। जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी तत्काल जमानत खारिज की थी, लेकिन संरक्षित गवाहों की परीक्षा पूरी होने या 1 साल की अवधि पूरी होने के बाद जमानत की मांग दोबारा रखने की गुंजाइश दी थी।

इस मामले में आगे की दिशा ट्रायल की रफ्तार, गवाहों की परीक्षा और भविष्य में पेश होने वाली जमानत याचिकाओं से तय होगी। अभी तक अदालत के स्तर पर हुई कार्यवाही को अंतिम दोषसिद्धि के रूप में पेश करना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।

वीडियो देखें

ADVERTISEMENT
Mohammad Naved

Mohammad Naved

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

संबंधित खबरें

संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मुल्ला अफरोज़ की NSA हिरासत रद्द

2026-09-30 10:08:31

ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग तेज, देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

2026-09-29 10:54:01

अमित शाह ने PRAHAAR के तहत आतंकवाद-रोधी रणनीति पर दिया जोर

2026-09-28 16:19:48

UPI MDR पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, केंद्र और RBI से शुल्क व्यवस्था पर जानकारी मांगे जाने का मामला

2026-09-28 13:03:34

दिल्ली-NCR में रेप की घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, निर्भया कांड से तुलना का जिक्र

2026-09-28 12:53:20

सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के रेप प्रयास केस फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया

2026-09-24 10:24:08

सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर दवाओं की कीमतों पर उठाए गंभीर सवाल

2026-09-23 22:21:39

संभल हिंसा केस में NSA हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल, कथित पुलिस कस्टडी कबूलनामे पर उठी आपत्ति

2026-09-29 11:22:18

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर