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यूपी आम महोत्सव 2026, 800 से ज्यादा किस्मों के साथ लखनऊ बना आमों की राजधानी

Shahana 2026-07-03 07:48:01
यूपी आम महोत्सव 2026, 800 से ज्यादा किस्मों के साथ लखनऊ बना आमों की राजधानी

उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में तीन दिवसीय आम महोत्सव 2026 की शुरुआत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की। आयोजन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से 800 से अधिक आम की किस्में प्रदर्शित की जा रही हैं। यह आयोजन केवल स्वाद का उत्सव नहीं, बल्कि किसानों, बागवानी, निर्यात और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की कोशिश भी माना जा रहा है।


Location:-
 Lucknow
Date:- 3 July 2026
Byline:- Shahana

 

यूपी आम महोत्सव 2026, स्वाद से आगे कृषि अर्थव्यवस्था का बड़ा संदेश लखनऊ में आम का सबसे बड़ा मंच

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में तीन दिवसीय आम महोत्सव 2026 की शुरुआत हो चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका उद्घाटन करते हुए इसे प्रदेश की बागवानी क्षमता और किसानों की मेहनत का उत्सव बताया। इस वर्ष आयोजन में 800 से अधिक आम की किस्मों को प्रदर्शित किया गया है, जिनमें पारंपरिक और दुर्लभ दोनों प्रकार की प्रजातियां शामिल हैं। यह आयोजन केवल आम प्रेमियों के लिए नहीं है। इसका मकसद प्रदेश के बागवानों, कृषि वैज्ञानिकों, खरीदारों और निर्यात क्षेत्र को एक साझा मंच उपलब्ध कराना भी है, ताकि उत्तर प्रदेश के आम को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में नई पहचान मिल सके।

उत्तर प्रदेश क्यों है आम उत्पादन का केंद्र

उत्तर प्रदेश लंबे समय से भारत के प्रमुख आम उत्पादक राज्यों में शामिल रहा है। दशहरी, लंगड़ा, चौसा, सफेदा और अन्य प्रसिद्ध किस्मों ने प्रदेश की अलग पहचान बनाई है। प्रदेश के कई जिलों में हजारों परिवारों की आमदनी सीधे आम की खेती पर निर्भर है। ऐसे में आम महोत्सव केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि कृषि इकोनॉमी से जुड़ा महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म बन चुका है। यहां उत्पादकों को खरीदारों, प्रोसेसिंग कंपनियों और संभावित निर्यातकों से मिलने का अवसर मिलता है।

800 किस्में क्या बताती हैं

इस वर्ष प्रदर्शित 800 से अधिक किस्में यह दिखाती हैं कि उत्तर प्रदेश में जैव विविधता कितनी समृद्ध है। इनमें कई ऐसी स्थानीय प्रजातियां भी शामिल हैं जो व्यावसायिक स्तर पर कम दिखाई देती हैं लेकिन स्वाद, सुगंध और गुणवत्ता के कारण विशेष महत्व रखती हैं। बस्ती के दुर्लभ आमों सहित कई स्थानीय उत्पादकों ने अपनी विशिष्ट किस्में प्रदर्शित की हैं। इससे छोटे बागवानों को भी पहचान मिलने की संभावना बढ़ती है। विभिन्न जिलों के उत्पादकों की भागीदारी इस आयोजन को राज्यव्यापी स्वरूप देती है।

केवल प्रदर्शनी नहीं, बाजार की तैयारी

विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि मेलों का वास्तविक उद्देश्य केवल प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। यदि ऐसे आयोजनों के माध्यम से किसानों को आधुनिक पैकेजिंग, ब्रांडिंग, वैल्यू एडिशन और निर्यात मानकों की जानकारी मिले तो इसका आर्थिक असर कहीं अधिक व्यापक हो सकता है। भारत पहले से दुनिया के सबसे बड़े आम उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन वैश्विक निर्यात में उसकी हिस्सेदारी उत्पादन के अनुपात में अभी भी सीमित मानी जाती है। ऐसे आयोजनों से गुणवत्ता आधारित मार्केटिंग को बढ़ावा मिल सकता है।

क्या केवल उत्सव से बदल जाएगी तस्वीर यहीं सबसे बड़ा सवाल भी खड़ा होता है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान को उचित मूल्य, बेहतर कोल्ड चेन, आधुनिक लॉजिस्टिक्स और निर्यात सहायता नहीं मिले तो केवल महोत्सव आयोजित करने से दीर्घकालिक परिवर्तन संभव नहीं होगा। दूसरी ओर सरकार का तर्क है कि ऐसे आयोजन किसानों को बाजार से जोड़ने, नई तकनीक से परिचित कराने और प्रदेश की कृषि ब्रांडिंग मजबूत करने का माध्यम बनते हैं। दोनों पक्षों की अपनी दलीलें हैं और वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि आयोजन के बाद किसानों को कितना व्यावहारिक लाभ मिलता है।

दिल्ली में भी आम प्रेमियों का उत्सव

दिल्ली में भी इसी समय वार्षिक मैंगो फेस्टिवल आयोजित किया जा रहा है, जहां 400 से अधिक आम की किस्में लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। इससे स्पष्ट है कि आम अब केवल मौसमी फल नहीं, बल्कि पर्यटन, कृषि विपणन और सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा बन चुका है।

किसानों के लिए संभावित असर

यदि राज्य स्तर पर ऐसे आयोजनों को निरंतर संस्थागत रूप दिया जाए तो किसानों को नए खरीदार, बेहतर मूल्य और निर्यात के अवसर मिल सकते हैं। साथ ही दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि फल प्रसंस्करण उद्योग, जैम, जूस, पल्प और अन्य वैल्यू एडेड उत्पादों का विस्तार ग्रामीण रोजगार बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

आगे की राह

उत्तर प्रदेश के लिए चुनौती केवल सबसे अधिक आम उत्पादन करना नहीं है, बल्कि गुणवत्ता, ब्रांडिंग और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करना भी है। यदि कृषि नीति, आधुनिक सप्लाई चेन और किसान प्रशिक्षण को आम महोत्सव जैसे आयोजनों से जोड़ा जाए तो इसका लाभ पूरे बागवानी क्षेत्र तक पहुंच सकता है।

यूपी आम महोत्सव 2026 इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल दिखाई देता है। इसकी वास्तविक सफलता इस बात से आंकी जाएगी कि आयोजन समाप्त होने के बाद किसानों की आय, निर्यात और बाजार पहुंच में कितना ठोस बदलाव आता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि इस बार लखनऊ केवल आमों की खुशबू से नहीं, बल्कि कृषि अर्थव्यवस्था पर नई चर्चा से भी महक रहा है।

 

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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