'एक पेड़ मां के नाम' से शुरू हुआ यूपी का सबसे बड़ा वृक्षारोपण अभियान
एक दिन में 35 करोड़ पौधे, यूपी ने बनाया नया हरित लक्ष्य
Location:-
Gorakhpur, Uttar Pradesh
Date:-
12 July 2026
Byline:-
Shahana
अभियान की शुरुआत:-
महावृक्षारोपण 2026, CM योगी ने शुरू किया 35 करोड़ पौधों का अभियान
उत्तर प्रदेश सरकार ने महावृक्षारोपण 2026 अभियान के तहत एक ही दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर से अभियान की शुरुआत करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का महत्त्वपूर्ण प्रयास बताया। इसकी सफलता आने वाले वर्षों में पौधों के संरक्षण पर निर्भर करेगी।
महावृक्षारोपण 2026: क्या 35 करोड़ पौधों का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को हरित भविष्य की ओर ले जाएगा?
उत्तर प्रदेश ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए महावृक्षारोपण 2026 अभियान की शुरुआत कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पौधारोपण किया और प्रदेशवासियों से इस महाअभियान का हिस्सा बनने की अपील की। सरकार ने एक ही दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसे देश के सबसे बड़े वृक्षारोपण अभियानों में गिना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह केवल पौधे लगाने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक महायज्ञ है। उनके अनुसार धरती ही मानव जीवन, जल, अन्न, फल और स्वच्छ वातावरण का आधार है। इसलिए वृक्षारोपण भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी एक साझा जिम्मेदारी है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान
उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। बढ़ते शहरीकरण, औद्योगीकरण और जलवायु परिवर्तन के बीच हरित क्षेत्र को बढ़ाना राज्य के सामने बड़ी चुनौती बन चुका है। विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि यदि हरित आवरण में लगातार कमी आती रही तो तापमान, जल संकट और वायु प्रदूषण जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं। इसी पृष्ठभूमि में सरकार ने बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण को अपनी पर्यावरण नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। प्रशासन का दावा है कि अभियान में सरकारी विभागों, पंचायतों, विद्यालयों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
242 करोड़ पौधों का दावा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश 242 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण कर चुका है। सरकार का कहना है कि लगातार चल रहे वृक्षारोपण अभियानों से राज्य का हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम मिले हैं। हालांकि पर्यावरण विशेषज्ञ यह भी याद दिलाते हैं कि केवल पौधे लगाने की संख्या सफलता का अंतिम पैमाना नहीं होती। असली चुनौती पौधों का जीवित रहना, उनकी नियमित देखभाल और कई वर्षों तक संरक्षण सुनिश्चित करना है।
सिर्फ पौधारोपण नहीं, संरक्षण भी जरूरी
देशभर में वर्षों से बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलते रहे हैं। कई स्वतंत्र अध्ययनों में यह सवाल उठाया गया है कि लगाए गए पौधों में कितने वास्तव में वृक्ष बन पाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पौधों की निगरानी, सिंचाई, सुरक्षा और स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित नहीं की गई तो बड़े लक्ष्य केवल आंकड़ों तक सीमित रह सकते हैं। इसलिए किसी भी वृक्षारोपण अभियान की वास्तविक सफलता उसके सर्वाइवल रेट से तय होती है।
जलवायु परिवर्तन के दौर में बढ़ी जिम्मेदारी
भारत उन देशों में शामिल है जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का तेजी से सामना कर रहे हैं। बढ़ती गर्मी, अनियमित मानसून, सूखा और बाढ़ जैसी घटनाएं लगातार चुनौती पेश कर रही हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कार्बन अवशोषण बढ़ाने, मिट्टी संरक्षण, जैव विविधता और स्थानीय जल स्रोतों को मजबूत करने में मदद कर सकता है। हालांकि इसके लिए स्थानीय जलवायु के अनुरूप प्रजातियों का चयन भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञ विदेशी या अनुपयुक्त प्रजातियों की बजाय स्थानीय पेड़ों को प्राथमिकता देने की सलाह देते हैं।
जनभागीदारी क्यों बनी अभियान की सबसे बड़ी ताकत
सरकार ने इस अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा है। स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को इसमें शामिल करने की कोशिश की गई है। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान भावनात्मक जुड़ाव के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का प्रयास करता है। यदि लगाए गए पौधों की जिम्मेदारी परिवार और स्थानीय समुदाय अपने स्तर पर निभाते हैं, तो उनके जीवित रहने की संभावना भी बढ़ जाती है।
आलोचनाओं का भी है जवाब जरूरी
हर बड़े सरकारी अभियान की तरह इस कार्यक्रम पर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि केवल रिकॉर्ड बनाने की होड़ से अधिक महत्वपूर्ण दीर्घकालिक वन प्रबंधन है। उनका तर्क है कि पुराने जंगलों की सुरक्षा नए पौधों के रोपण जितनी ही आवश्यक है।
दूसरी ओर सरकार का कहना है कि वृक्षारोपण, वन संरक्षण और जनभागीदारी तीनों को साथ लेकर आगे बढ़ने की रणनीति अपनाई जा रही है। यदि पौधों की निगरानी प्रभावी ढंग से की जाती है तो यह अभियान राज्य के पर्यावरणीय भविष्य को मजबूत कर सकता है।
आगे की राह
महावृक्षारोपण 2026 का लक्ष्य केवल एक दिन की उपलब्धि नहीं है। इसकी वास्तविक परीक्षा आने वाले महीनों और वर्षों में होगी, जब यह देखा जाएगा कि लगाए गए पौधों में कितने सुरक्षित रहते हैं और कितने विकसित होकर वृक्ष बनते हैं।
यदि प्रशासन, स्थानीय निकाय और नागरिक मिलकर संरक्षण की जिम्मेदारी निभाते हैं, तो यह अभियान उत्तर प्रदेश के हरित आवरण, जलवायु संतुलन और पर्यावरणीय सुरक्षा में उल्लेखनीय योगदान दे सकता है। लेकिन यदि निगरानी कमजोर रही, तो करोड़ों पौधों का लक्ष्य केवल रिकॉर्ड का हिस्सा बनकर रह जाएगा। इसलिए इस अभियान की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना पौधारोपण नहीं, बल्कि पौधों का सुरक्षित भविष्य होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।