गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे हरित पट्टी विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। प्रयागराज जिले में 12 हेक्टेयर भूमि पर करीब 12 हजार पौधे लगाए जाएंगे। अभियान में गुलमोहर, अमलतास सहित कई छायादार और फलदार प्रजातियों को शामिल किया गया है, जिससे एक्सप्रेसवे के आसपास का वातावरण अधिक हराभरा और आकर्षक बनाया जा सके।
📍 स्थान: प्रयागराज, उत्तर प्रदेश
📰 दिनांक: 29 जून 2026
✍️ Apurva Choudhary
प्रयागराज में शुरू हुई पौधारोपण की तैयारी
गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे हरियाली बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर प्रयागराज जिले में पौधारोपण की तैयारियां शुरू हो गई हैं। वन विभाग एक्सप्रेसवे के आसपास बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करेगा। अभियान में छायादार, फलदार और फूलों वाली विभिन्न प्रजातियों के पौधों को शामिल किया गया है।
12 हेक्टेयर क्षेत्र में लगाए जाएंगे 12 हजार पौधे
गंगा एक्सप्रेसवे का लगभग 16 किलोमीटर लंबा हिस्सा प्रयागराज जिले से होकर गुजरता है। इसी क्षेत्र में 12 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है, जहां करीब 12 हजार पौधे लगाए जाने की तैयारी है। विभाग के अनुसार पौधारोपण का कार्य मानसून के दौरान शुरू किया जाएगा।
गुलमोहर और अमलतास भी होंगे अभियान का हिस्सा
पौधारोपण अभियान में अर्जुन, जामुन, पीपल, बरगद, पाकड़ और नीम जैसी प्रजातियों के साथ गुलमोहर और अमलतास को भी शामिल किया गया है। विभाग का उद्देश्य सड़क किनारे हरित पट्टी विकसित करने के साथ वातावरण को अधिक आकर्षक बनाना है।
एक लेन के किनारे ही होगा पौधारोपण
शुरुआती योजना एक्सप्रेसवे की दोनों लेन के किनारे पौधे लगाने की थी। हालांकि निरीक्षण के दौरान मेरठ से प्रयागराज की ओर आने वाली लेन के किनारे पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं मिला। इसके बाद प्रयागराज से मेरठ दिशा वाली लेन के किनारे ही पौधारोपण कराने का निर्णय लिया गया।
वैज्ञानिक तरीके से होगी पौधों की रोपाई
वन विभाग के अनुसार पौधों को निर्धारित दूरी पर कतारबद्ध तरीके से लगाया जाएगा। बरगद और पीपल जैसे बड़े वृक्षों के बीच पर्याप्त अंतर रखा जाएगा, ताकि उनके विकास में किसी प्रकार की बाधा न आए। विभागीय नर्सरियों में पौधे तैयार किए जा रहे हैं और मानसून के दौरान रोपण अभियान शुरू होगा।
हरित पट्टी से बदलेगा एक्सप्रेसवे का स्वरूप
अधिकारियों के अनुसार पौधारोपण का उद्देश्य केवल हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि एक्सप्रेसवे के आसपास बेहतर प्राकृतिक वातावरण विकसित करना भी है। छायादार और फूलों वाले पौधों के विकसित होने के बाद मार्ग का स्वरूप अधिक आकर्षक होने की उम्मीद है।