सऊदी अरब अब खुलकर चाहता है कि अमेरिका ईरान के साथ जंग को और आगे न बढ़ाए।
कारण साफ हैं।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि सऊदी नेतृत्व ने वॉशिंगटन से कहा है कि हालात काबू में रखें और बड़े सैन्य कदम से बचें
ईरान के जवाबी हमले सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रहे।
सऊदी अरब भी निशाने पर आया।
डेटा के मुताबिक, ईरान ने खाड़ी देशों पर दर्जनों मिसाइल और सैकड़ों ड्रोन दागे
इससे सऊदी को साफ संकेत मिला कि जंग बढ़ी तो पहला नुकसान उसे ही होगा।
शुरुआत में सऊदी नेतृत्व ने अमेरिका का साथ दिया।
लेकिन अब रणनीति बदलती दिख रही है।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि सऊदी पहले आक्रामक रुख चाहता था, लेकिन हालात बिगड़ने पर अब नरमी चाहता है
इस जंग का सबसे बड़ा असर ऊर्जा बाजार पर है।
अमेरिकी ब्लॉकेड और जवाबी कार्रवाई से ईरान को अरबों डॉलर का नुकसान हुआ, लेकिन इससे पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई
सऊदी चाहता है कि यह स्थिति और न बिगड़े।
सऊदी अरब अब बैक-चैनल डिप्लोमेसी पर जोर दे रहा है।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि सऊदी अमेरिका से कुछ सैन्य योजनाएं वापस लेने की अपील कर चुका है
यह सिर्फ एक अपील नहीं है।
यह संकेत है कि:
स्थिति अभी फ्लूइड है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।