मुजफ्फरनगर में वाहन चोर गिरोह पकड़ा, 8 बाइक बरामद
सिविल लाइन पुलिस का बड़ा खुलासा, आठ चोरी की बाइक मिलीं
मुजफ्फरनगर में बाइक चोरी का नेटवर्क बेनकाब, दो गिरफ्तार
मुजफ्फरनगर की सिविल लाइन पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर आठ चोरी की मोटरसाइकिल, फर्जी नंबर प्लेट और चार हजार रुपये बरामद करने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक गिरोह ने मुजफ्फरनगर समेत हरियाणा, उत्तराखंड, चंडीगढ़ और नोएडा से बाइक चोरी की थीं। जांच जारी है, कार्रवाई भी।
मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश | 12 अगस्त 2026 | Mohd Naved
मुजफ्फरनगर में वाहन चोर गिरोह के खिलाफ सिविल लाइन पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के कब्जे और निशानदेही से आठ चोरी की मोटरसाइकिल, एक फर्जी नंबर प्लेट और चार हजार रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जावेद उर्फ सबलू पुत्र इरशाद कुरैशी, निवासी ग्राम कवाल थाना जानसठ, मुजफ्फरनगर और आश मौहम्मद उर्फ आशू पुत्र मुंतियाज, निवासी ग्राम छछरौली थाना ननौता, सहारनपुर के तौर पर हुई है।
पुलिस के मुताबिक 3 अगस्त 2026 को थाना सिविल लाइन क्षेत्र के एसडी मार्किट से एक मोटरसाइकिल चोरी हुई थी। इसी दिन साईं हॉस्पिटल के पास से भी एक मोटरसाइकिल चोरी होने की शिकायत दर्ज हुई। दोनों मामलों में थाना सिविल लाइन पर अलग-अलग मुकदमे दर्ज किए गए।
एसडी मार्किट की घटना के संबंध में मु0अ0सं0 210/26 और साईं हॉस्पिटल से जुड़ी घटना में मु0अ0सं0 211/26 दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है। दोनों मामलों के खुलासे के लिए पुलिस टीमों का गठन किया गया था।
पुलिस के अनुसार 11 अगस्त को मुखबिर से सूचना मिली कि इन घटनाओं से जुड़े आरोपी संधावली अंडरपास के पास चोरी की मोटरसाइकिल के साथ मौजूद हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया।
पुलिस के मुताबिक मौके से गिरफ्तारी के बाद आरोपियों से पूछताछ की गई। उनकी निशानदेही पर छह अन्य मोटरसाइकिलें बरामद की गईं। इस तरह पुलिस ने कुल आठ चोरी की मोटरसाइकिल बरामद करने की बात कही है।
बरामद वाहनों में अलग-अलग मॉडल की मोटरसाइकिलें शामिल हैं। पुलिस ने एक फर्जी नंबर प्लेट और बाइक चोरी से हासिल चार हजार रुपये भी बरामद करने का दावा किया है।
पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले में थाना सिविल लाइन पर मु0अ0सं0 213/26 दर्ज किया गया है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2), 317(2), 317(4), 317(5) और 345(3) का उल्लेख पुलिस ने किया है। भारतीय न्याय संहिता में धारा 303 चोरी और धारा 317 चोरी की संपत्ति से संबंधित प्रावधानों से जुड़ी है, जबकि धारा 345 प्रॉपर्टी मार्क से संबंधित है।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपियों ने अपने तीसरे साथी के साथ मिलकर अलग-अलग स्थानों से मोटरसाइकिल चोरी करने की बात बताई है। पुलिस प्रेस नोट में आरोपियों के हवाले से कहा गया है कि 16 जुलाई को कोर्ट रोड स्थित अंबेडकर मूर्ति के पास से एक होंडा लिवो चोरी की गई थी।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने 2 अगस्त को शिव चौक के पास एसडी मार्किट के सामने से स्प्लेंडर प्रो मोटरसाइकिल चोरी करने की बात भी स्वीकार की। पुलिस के अनुसार इन दोनों मोटरसाइकिलों की नंबर प्लेट हटाकर उन्हें आठ-आठ हजार रुपये में बेचने का दावा किया गया है।
आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में यह भी बताया कि बिक्री से मिले पैसे तीनों साथियों के बीच बांटे गए थे। पुलिस ने बरामद चार हजार रुपये को कथित तौर पर पहले बेची गई चोरी की मोटरसाइकिलों से जुड़ी रकम बताया है।
पुलिस प्रेस नोट के मुताबिक आरोपियों ने मुजफ्फरनगर के अलावा यमुनानगर, रुड़की, चंडीगढ़ और नोएडा से भी मोटरसाइकिल चोरी करने की बात कही है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए उपलब्ध सामग्री से नहीं हुई है।
यही बिंदु इस मामले की जांच को स्थानीय वाहन चोरी से आगे ले जाता है। अगर पुलिस पूछताछ में बताए गए स्थानों से जुड़े वाहन चोरी के मामलों की पुष्टि होती है, तो जांच का दायरा कई जिलों और राज्यों तक फैल सकता है।
फिलहाल पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही से बरामद आठ मोटरसाइकिलों की पहचान और उनके संबंधित मुकदमों से मिलान की प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया है। आगे की जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि बरामद प्रत्येक वाहन किस स्थान और किस मुकदमे से संबंधित है।
गिरफ्तार आरोपी जावेद उर्फ सबलू के खिलाफ पुलिस ने कई पुराने मुकदमों का आपराधिक इतिहास दर्ज किया है। इसमें जानसठ, ककरौली, कांधला और सिविल लाइन थानों से जुड़े मामले शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ चोरी, हथियार कानून और अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज रहे हैं।
पुलिस ने जावेद के खिलाफ 2026 के दो पुराने सिविल लाइन मुकदमों, मु0अ0सं0 210/26 और 211/26, का भी उल्लेख किया है। इसके अलावा मु0अ0सं0 213/26 को मौजूदा कार्रवाई से जोड़ा गया है।
दूसरे आरोपी आश मौहम्मद उर्फ आशू के खिलाफ पुलिस ने फिलहाल तीन मुकदमों का उल्लेख किया है। इनमें मौजूदा मुकदमा और सिविल लाइन थाने में दर्ज दोनों पुराने वाहन चोरी के मामले शामिल हैं।
आपराधिक इतिहास का उल्लेख पुलिस रिकॉर्ड पर आधारित है। किसी आरोपी का पूर्व मुकदमों में नाम होना अपने आप में मौजूदा मामले में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। अंतिम कानूनी निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
इस कार्रवाई का नेतृत्व थाना सिविल लाइन प्रभारी इन्द्रजीत सिंह के नेतृत्व में किया गया। पुलिस टीम में उप निरीक्षक प्रशान्त कुमार गिरी, उधम सिंह, पंकज सागर और लोमेश कुमार सहित अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।
पुलिस के अनुसार कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुजफ्फरनगर संजय कुमार वर्मा के पर्यवेक्षण और पुलिस अधीक्षक नगर अमृत जैन तथा सहायक पुलिस अधीक्षक नगर एवं क्षेत्राधिकारी नगर सिद्धार्थ के. मिश्रा के निर्देशन में हुई।
प्रेस नोट के अनुसार गिरफ्तारी और बरामदगी के बाद आरोपियों के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने यह भी कहा है कि दोनों आरोपियों के विस्तृत आपराधिक इतिहास की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुलिस की उपलब्ध सूचना में एक तथ्य पर सावधानी जरूरी है। शुरुआती घटना विवरण में एसडी मार्किट और साईं हॉस्पिटल से मोटरसाइकिल चोरी की तारीख 3 अगस्त 2026 बताई गई है, जबकि पूछताछ के विवरण में इन्हीं घटनाओं के लिए 2 अगस्त 2026 का उल्लेख मिलता है।
यह तारीख संबंधी अंतर महत्वपूर्ण है, क्योंकि मुकदमे की टाइमलाइन, चोरी की घटनाओं और आरोपियों की कथित गतिविधियों का सही क्रम स्थापित करने के लिए तारीखों की पुष्टि जरूरी होती है। उपलब्ध प्रेस नोट से यह स्पष्ट नहीं होता कि 2 अगस्त या 3 अगस्त में से कौन सी तारीख अंतिम रूप से सही है।
शाह टाइम्स की रिपोर्टिंग में इस अंतर को स्पष्ट रखना जरूरी है। पुलिस या संबंधित केस रिकॉर्ड से आधिकारिक स्पष्टीकरण मिलने के बाद टाइमलाइन को अपडेट किया जा सकता है।
इस मामले में सबसे अहम सवाल बरामद आठ मोटरसाइकिलों की वास्तविक पृष्ठभूमि का है। पुलिस ने अलग-अलग शहरों और राज्यों से वाहन चोरी की बात आरोपियों की पूछताछ के आधार पर कही है, लेकिन यह दावा आगे केस रिकॉर्ड, वाहन पहचान और संबंधित थानों की जांच से पुष्ट होना बाकी है।
दूसरा सवाल कथित तीसरे साथी की भूमिका से जुड़ा है। पुलिस प्रेस नोट में दोनों आरोपियों ने तीसरे साथी के साथ मिलकर चोरी करने की बात बताई है, लेकिन इस तीसरे व्यक्ति की पहचान, गिरफ्तारी या भूमिका के संबंध में इस समय कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
तीसरा पहलू चोरी की मोटरसाइकिलों की बिक्री से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक दो मोटरसाइकिलें नंबर प्लेट हटाकर बेची गईं और खरीदारों के नाम-पते आरोपियों ने नहीं बताए। इन दावों की जांच के लिए पुलिस को बिक्री की रकम, वाहन के दस्तावेज, खरीदारों और संभावित मध्यस्थों की जानकारी जुटानी होगी।
मोटरसाइकिल चोरी के मामलों में वाहन मालिक के लिए नंबर प्लेट, इंजन नंबर और चेसिस नंबर अहम पहचान बिंदु होते हैं। चोरी के बाद नंबर प्लेट बदलने या हटाने की स्थिति में पुलिस जांच के लिए वाहन की मूल पहचान और रिकॉर्ड का मिलान महत्वपूर्ण हो जाता है।
इस मामले में आठ मोटरसाइकिलों की बरामदगी से उन वाहन मालिकों को राहत मिलने की संभावना है, जिनके वाहन चोरी हुए हैं। हालांकि प्रत्येक बरामद वाहन किस केस से संबंधित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि जरूरी होगी।
वाहन चोरी के मामलों में तेज एफआईआर, सीसीटीवी फुटेज, वाहन पंजीकरण रिकॉर्ड और अंतर-जिला पुलिस समन्वय जांच को मजबूत आधार देते हैं। इस केस में भी आगे की तहकीकात इन्हीं कड़ियों पर निर्भर करेगी।
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पुलिस की विधिक कार्रवाई जारी है। बरामद मोटरसाइकिलों का सत्यापन, संबंधित मुकदमों से उनका मिलान और आरोपियों के आपराधिक इतिहास की विस्तृत जांच आगे की कार्रवाई का अहम हिस्सा होगी।
अगर यमुनानगर, रुड़की, चंडीगढ़ और नोएडा से जुड़ी चोरी की घटनाओं में इन आरोपियों की भूमिका प्रमाणित होती है, तो संबंधित राज्यों और जिलों की पुलिस के बीच समन्वय बढ़ सकता है। इसके साथ ही कथित तीसरे साथी और चोरी के वाहनों के संभावित खरीदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
सिविल लाइन पुलिस के मुताबिक इस मामले में दो आरोपियों, जावेद उर्फ सबलू और आश मौहम्मद उर्फ आशू, को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने आठ चोरी की मोटरसाइकिल, एक फर्जी नंबर प्लेट और चार हजार रुपये नकद बरामद करने का दावा किया है।
पुलिस के अनुसार दोनों आरोपियों को संधावली अंडरपास के पास से चोरी की मोटरसाइकिल के साथ गिरफ्तार किया गया।
पुलिस प्रेस नोट में मु0अ0सं0 213/26 के तहत बीएनएस की धारा 303(2), 317(2), 317(4), 317(5) और 345(3) का उल्लेख है।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में यमुनानगर, रुड़की, चंडीगढ़ और नोएडा से भी मोटरसाइकिल चोरी करने की बात सामने आई है। उपलब्ध सामग्री में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मुजफ्फरनगर में वाहन चोर गिरोह के खिलाफ सिविल लाइन पुलिस की कार्रवाई में दो गिरफ्तारियां और आठ मोटरसाइकिलों की बरामदगी प्रमुख तथ्य हैं। पुलिस के मुताबिक जांच का संबंध कई स्थानों से जुड़ी वाहन चोरी की घटनाओं से हो सकता है, लेकिन इस दावे की आगे स्वतंत्र केस रिकॉर्ड और संबंधित पुलिस इकाइयों से पुष्टि जरूरी है।
सबसे अहम लंबित पहलू चोरी की बरामद मोटरसाइकिलों की पहचान, कथित तीसरे साथी की भूमिका और दूसरे राज्यों से जुड़े दावों की पुष्टि है। तारीखों में मौजूद अंतर भी पुलिस रिकॉर्ड से स्पष्ट किया जाना चाहिए। इन बिंदुओं पर आगे की जांच ही बताएगी कि यह कार्रवाई स्थानीय वाहन चोरी के दो मामलों तक सीमित है या इसके पीछे एक व्यापक नेटवर्क काम कर रहा था।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।