लौकी और तुरई को डाइट में शामिल करना क्यों हो सकता है फायदेमंद?
भारतीय खानपान में लौकी और तुरई को हल्की और आसानी से पकने वाली सब्जियों के रूप में काफी पसंद किया जाता है। दोनों सब्जियों में पानी की मात्रा अधिक होती है और इन्हें कम तेल-मसाले के साथ तैयार किया जाए तो ये संतुलित भोजन का हिस्सा बन सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, स्वस्थ आहार में विभिन्न प्रकार की सब्जियों को शामिल करना जरूरी है। दस वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए रोजाना कम से कम ४०० ग्राम फल और सब्जियों का सेवन करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, किसी एक सब्जी को किसी बीमारी का इलाज या “सुपरफूड” मानना उचित नहीं है। स्वास्थ्य पर असर पूरी डाइट और जीवनशैली से जुड़ा होता है।
लौकी में क्या खास है?
लौकी को आम तौर पर कम ऊर्जा वाली, पानी से भरपूर सब्जी माना जाता है। इसमें कुछ विटामिन और खनिजों के साथ आहार फाइबर भी मिलता है। सब्जियों में मौजूद पानी और फाइबर भोजन को अधिक संतोषजनक बनाने में योगदान दे सकते हैं। यही वजह है कि संतुलित डाइट और वजन प्रबंधन की योजना में लौकी जैसी सब्जियां शामिल की जा सकती हैं। विशेषज्ञ संस्थाएं भी वजन को नियंत्रित रखने वाली डाइट में अधिक सब्जियां शामिल करने पर जोर देती हैं, क्योंकि अधिकांश सब्जियां कम कैलोरी और फाइबर से भरपूर होती हैं।
पाचन के लिए कैसी है लौकी?
लौकी में मौजूद पानी और आहार फाइबर सामान्य पाचन के लिए उपयोगी हो सकते हैं। पर्याप्त फाइबर और तरल पदार्थ वाली डाइट कब्ज की समस्या से बचाव में मदद कर सकती है। लेकिन केवल लौकी खाने से कब्ज या किसी पाचन संबंधी बीमारी का इलाज हो जाएगा, ऐसा दावा करना सही नहीं होगा। कब्ज लगातार बनी रहे तो उसके कारण की जांच जरूरी है।
वजन प्रबंधन में मदद कर सकती है?
वजन कम करने के लिए किसी एक सब्जी को जिम्मेदार ठहराना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। हालांकि, कम कैलोरी वाली सब्जियों को भोजन में शामिल करने से कुल आहार की ऊर्जा घनत्व कम रखने में मदद मिल सकती है। लौकी को कम तेल में पकाकर दाल, रोटी या अन्य संतुलित खाद्य पदार्थों के साथ लिया जाए तो यह वजन प्रबंधन वाली डाइट का हिस्सा बन सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी स्वस्थ आहार में सब्जियों और अन्य न्यूनतम प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की विविधता पर जोर देता है।
शरीर में पानी की पूर्ति में योगदान
लौकी और तुरई जैसी सब्जियों में पानी की मात्रा अधिक होती है। इसलिए इन्हें भोजन में शामिल करने से कुल तरल सेवन में योगदान मिल सकता है। हालांकि, इन्हें पानी का विकल्प नहीं समझना चाहिए। शरीर में पानी की जरूरत उम्र, मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार बदलती है।
तुरई भी है पोषण से भरपूर सब्जी
तुरई को अंग्रेजी में रिज गॉर्ड कहा जाता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के दस्तावेजों में इसकी पहचान लूफा एक्यूटैंगुला के रूप में की गई है। आईसीएआर की जानकारी के अनुसार तुरई भारत में व्यापक रूप से उगाई जाने वाली सब्जियों में शामिल है और इसकी कई उन्नत किस्में विकसित की गई हैं। तुरई को भी हल्की सब्जी के तौर पर भोजन में शामिल किया जा सकता है। इसमें पानी और कुछ आवश्यक पोषक तत्व होते हैं, जबकि इसकी कुल ऊर्जा मात्रा सामान्यतः कम होती है।
तुरई खाने से पाचन को क्या फायदा?
तुरई जैसी सब्जियों में मौजूद फाइबर संतुलित आहार में पाचन स्वास्थ्य को समर्थन दे सकता है। फाइबर के साथ पर्याप्त पानी लेना भी महत्वपूर्ण है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति को लगातार पेट दर्द, गंभीर कब्ज, दस्त या अन्य पाचन संबंधी परेशानी रहती है, तो केवल तुरई या लौकी पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
क्या दोनों सब्जियां वजन घटाने में कारगर हैं?
लौकी और तुरई को “वजन घटाने वाली दवा” कहना गलत होगा। हां, कम ऊर्जा वाली सब्जियों को संतुलित भोजन का हिस्सा बनाने से वजन प्रबंधन में मदद मिल सकती है। वजन कम करने के लिए कुल कैलोरी सेवन, भोजन की गुणवत्ता, शारीरिक गतिविधि, नींद और जीवनशैली सभी महत्वपूर्ण हैं। इसलिए केवल रोज लौकी या तुरई खाने से वजन कम होने की गारंटी नहीं है।
इन्हें कैसे खाना बेहतर है?
लौकी और तुरई को सामान्य घरेलू तरीके से सब्जी, दाल या अन्य व्यंजनों में शामिल किया जा सकता है।
स्वास्थ्य के लिहाज से कुछ बातों का ध्यान रखना उपयोगी है:
* सब्जियों को अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करें।
* बहुत ज्यादा तेल में तलने के बजाय हल्के तरीके से पकाएं।
* अत्यधिक नमक और मसाले से बचें।
* भोजन में अलग-अलग रंग और प्रकार की सब्जियां शामिल करें।
* केवल लौकी या तुरई पर निर्भर रहने के बजाय दाल, साबुत अनाज, फल और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ भी लें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन विविध और संतुलित आहार को स्वस्थ खानपान का आधार मानता है।
सबसे जरूरी सावधानी: कड़वी लौकी न खाएं
लौकी को लेकर एक महत्वपूर्ण सावधानी कड़वे स्वाद से जुड़ी है।
अगर कच्ची लौकी का स्वाद असामान्य रूप से कड़वा हो, तो उसे खाने या उसका रस बनाने से बचना चाहिए। लौकी जैसी कुकुरबिट परिवार की सब्जियों में अत्यधिक कड़वाहट विषैले यौगिकों की मौजूदगी का संकेत हो सकती है। इसलिए लौकी का रस बनाने से पहले उसका एक छोटा टुकड़ा चखकर यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसमें असामान्य कड़वाहट न हो। कड़वी लौकी का रस बिल्कुल नहीं पीना चाहिए। यह सावधानी विशेष रूप से जरूरी है क्योंकि लौकी के रस को स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है, जबकि हर तरह की लौकी का रस पीना सुरक्षित मानना उचित नहीं है।
क्या लौकी का जूस रोज पीना चाहिए?
लौकी को सब्जी के रूप में खाना और उसका जूस पीना एक जैसी बात नहीं है। जूस बनाने के दौरान भोजन का स्वरूप बदल जाता है और फाइबर की मात्रा भी तैयारी के तरीके के अनुसार प्रभावित हो सकती है। इसलिए केवल स्वास्थ्य लाभ पाने के लिए रोजाना बड़ी मात्रा में लौकी का जूस पीना जरूरी नहीं है। सामान्य रूप से पकी हुई सब्जी को संतुलित भोजन में शामिल करना आसान और व्यावहारिक विकल्प है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कड़वी लौकी का जूस न पिएं।
क्या तुरई में भी सावधानी जरूरी है?
तुरई खरीदते समय ताजी, सामान्य स्वाद वाली और बिना सड़न वाली सब्जी चुननी चाहिए। सब्जियों को अच्छी तरह धोकर और उचित तरीके से पकाकर खाना बेहतर है। आईसीएआर के अनुसार, तुरई भारत में व्यापक रूप से उगाई जाने वाली फसल है और इसकी विभिन्न किस्में विकसित की गई हैं।
किन लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए?
जिन लोगों को किसी खास सब्जी से एलर्जी या असहिष्णुता की समस्या है, उन्हें उसका सेवन करने से बचना चाहिए। इसके अलावा, यदि लौकी या तुरई खाने के बाद बार-बार पेट दर्द, उल्टी, दस्त, चक्कर या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। किसी बीमारी के इलाज के लिए इन सब्जियों या इनके जूस को दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
निष्कर्ष
लौकी और तुरई दोनों भारतीय भोजन में शामिल की जा सकने वाली पानी और पोषक तत्वों वाली सब्जियां हैं। इन्हें कम तेल और संतुलित तरीके से पकाकर खाने से ये स्वस्थ आहार का हिस्सा बन सकती हैं। सब्जियों की विविधता बढ़ाना भी संतुलित पोषण के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, इनसे किसी बीमारी का इलाज होने या तेजी से वजन घटने जैसे दावों से बचना चाहिए। खास तौर पर असामान्य रूप से कड़वी लौकी और उसका जूस सेवन नहीं करना चाहिए। स्वस्थ रहने का बेहतर तरीका किसी एक सब्जी पर निर्भर रहने के बजाय विविध, संतुलित और पोषक आहार लेना है।