गुरुवार, 10 September 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
Book Your Ads With Shah Times
India

स्मार्ट खेती क्या है और किसान इसका फायदा कैसे उठा सकते हैं? जानिए आधुनिक कृषि का नया तरीका

Neelam Saini 2026-09-10 17:58:33
स्मार्ट खेती क्या है और किसान इसका फायदा कैसे उठा सकते हैं? जानिए आधुनिक कृषि का नया तरीका

स्मार्ट खेती क्या है?

खेती का तरीका समय के साथ लगातार बदल रहा है। पहले किसान मुख्य रूप से अपने अनुभव, मौसम के अनुमान और पारंपरिक तरीकों के आधार पर खेती करते थे। अब मोबाइल, सेंसर, ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसी तकनीकों ने खेती को ज्यादा डेटा आधारित बनाने की दिशा में काम शुरू किया है। इसी आधुनिक और तकनीक आधारित कृषि व्यवस्था को आम तौर पर स्मार्ट खेती या प्रिसिजन फार्मिंग कहा जाता है। इसमें खेत की स्थिति को समझने के लिए अलग-अलग तकनीकी साधनों से जानकारी जुटाई जाती है और उसके आधार पर सिंचाई, खाद, कीटनाशक और फसल प्रबंधन जैसे फैसले लिए जाते हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के मुताबिक प्रिसिजन फार्मिंग में जीआईएस, रिमोट सेंसिंग, जीपीएस और सैटेलाइट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कृषि उत्पादकता और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल के लिए किया जा सकता है। 

खेत में सेंसर कैसे करते हैं काम?

स्मार्ट खेती में मिट्टी और मौसम की स्थिति जानने के लिए सेंसर लगाए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए मिट्टी की नमी से जुड़े सेंसर किसान को यह समझने में मदद कर सकते हैं कि खेत में पानी की जरूरत कितनी है। मई 2026 में आईसीएआर के पटना स्थित अनुसंधान परिसर ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित मिट्टी निगरानी प्रणाली का प्रदर्शन किया। इसका उद्देश्य वास्तविक समय में मिट्टी की नमी की जानकारी लेकर जरूरत के मुताबिक सिंचाई संबंधी फैसला लेने में मदद करना है। इस तरह की तकनीक खास तौर पर उन क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती है जहां पानी की उपलब्धता सीमित है या सिंचाई का खर्च ज्यादा है।

ड्रोन से खेत की निगरानी और छिड़काव

स्मार्ट खेती में कृषि ड्रोन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ड्रोन के जरिये खेत की निगरानी, फसल की स्थिति का आकलन और कुछ परिस्थितियों में निर्धारित कृषि इनपुट का छिड़काव किया जा सकता है। आईसीएआर के अनुसार ड्रोन का इस्तेमाल फसल की निगरानी और कीटों की पहचान के साथ-साथ सटीक छिड़काव के लिए किया जा सकता है। इससे समय, पानी और कृषि रसायनों के इस्तेमाल को अधिक नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि ड्रोन के इस्तेमाल के लिए लागू नियमों और प्रशिक्षित ऑपरेटर की जरूरत को ध्यान में रखना जरूरी है।

मोबाइल और मौसम की जानकारी भी मददगार

स्मार्ट खेती का मतलब केवल महंगे उपकरण खरीदना नहीं है। किसान मोबाइल फोन के जरिये भी मौसम, मंडी, फसल प्रबंधन और कृषि सलाह से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकते हैं। मौसम की जानकारी किसान को बुवाई, सिंचाई, छिड़काव और कटाई जैसे कामों की योजना बनाने में मदद कर सकती है। हालांकि किसी भी डिजिटल सलाह को स्थानीय कृषि परिस्थितियों और विशेषज्ञ की सलाह के साथ समझना ज्यादा बेहतर रहता है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बदल सकता है खेती का तरीका

कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में फसल की स्थिति का विश्लेषण, रोग या कीट के संभावित संकेतों की पहचान और डेटा आधारित निर्णय लेने जैसे क्षेत्रों में बढ़ रहा है। आईसीएआर की डिजिटल कृषि संबंधी सामग्री में ड्रोन, रोबोट, मिट्टी सेंसर, रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, एआई और इंटरनेट ऑफ थिंग्स को आधुनिक डेटा आधारित कृषि के महत्वपूर्ण हिस्सों के रूप में बताया गया है। इसका उद्देश्य किसान की जगह मशीन को फैसला करने देना नहीं, बल्कि किसान को बेहतर जानकारी उपलब्ध कराना है।

स्मार्ट खेती से किसानों को क्या फायदा हो सकता है?

स्मार्ट खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान खेत की वास्तविक स्थिति के आधार पर निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

इसके संभावित फायदे हैं—

* पानी का बेहतर इस्तेमाल: मिट्टी की नमी के आधार पर सिंचाई की योजना बनाई जा सकती है।
* खाद का बेहतर प्रबंधन: फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
* कीटनाशक की बचत: जरूरत वाले हिस्से की पहचान कर अधिक सटीक छिड़काव की संभावना बढ़ती है।
* समय की बचत: ड्रोन और डिजिटल उपकरण खेत की निगरानी को तेज कर सकते हैं।
* फसल की निगरानी: खेत की स्थिति में होने वाले बदलावों का जल्दी पता लगाने में मदद मिल सकती है।
* श्रम की जरूरत में कमी: कुछ कामों में मशीन और स्वचालन का इस्तेमाल किया जा सकता है।
* संसाधनों की दक्षता: पानी, खाद, दवा और ऊर्जा जैसे संसाधनों का इस्तेमाल अधिक सटीक तरीके से करने की कोशिश की जा सकती है।
आईसीएआर के अनुसार सेंसर, ड्रोन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और प्रिसिजन तकनीकें कृषि में इनपुट के बेहतर इस्तेमाल और संसाधन दक्षता को बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। 

छोटे किसान कैसे शुरू करें?

स्मार्ट खेती के लिए जरूरी नहीं कि किसान शुरुआत में महंगे ड्रोन या बड़े उपकरण खरीदें। छोटे स्तर से शुरुआत करना ज्यादा व्यावहारिक हो सकता है। सबसे पहले किसान मिट्टी की जांच, मौसम आधारित कृषि सलाह और उपलब्ध डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल शुरू कर सकते हैं। इसके बाद जरूरत के अनुसार मिट्टी की नमी सेंसर, स्वचालित सिंचाई या ड्रोन जैसी तकनीक को अपनाया जा सकता है। महंगे उपकरण व्यक्तिगत रूप से खरीदने के बजाय किसान समूह, एफपीओ या सेवा प्रदाताओं के माध्यम से किराये पर तकनीक का इस्तेमाल भी कर सकते हैं, जहां ऐसी सुविधा उपलब्ध हो। आईसीएआर के अनुसार आधुनिक कृषि तकनीकों को छोटे और सीमांत किसानों की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पर भी काम हो रहा है। 

क्या स्मार्ट खेती से उत्पादन हमेशा बढ़ जाएगा?

यह समझना जरूरी है कि तकनीक अपनाने मात्र से हर खेत में उत्पादन बढ़ने की गारंटी नहीं होती। फसल, मिट्टी, मौसम, पानी, बीज, प्रबंधन और स्थानीय परिस्थितियां भी उत्पादन को प्रभावित करती हैं। इसलिए स्मार्ट खेती को किसी एक मशीन या ऐप के रूप में नहीं, बल्कि डेटा और तकनीक के सहारे बेहतर कृषि प्रबंधन की व्यवस्था के रूप में देखना चाहिए। आईसीएआर के अनुसार प्रिसिजन फार्मिंग का लक्ष्य संसाधनों का अधिक कुशल इस्तेमाल और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देना है। 

किसानों के लिए क्या है सही रास्ता?

स्मार्ट खेती अपनाने से पहले किसान को अपनी फसल और खेत की वास्तविक जरूरत समझनी चाहिए। कौन-सी तकनीक कितनी उपयोगी होगी, इसका फैसला खेत के आकार, फसल, पानी की उपलब्धता और लागत को देखकर करना बेहतर है। कृषि विशेषज्ञ, कृषि विज्ञान केंद्र और संबंधित कृषि विभाग से जानकारी लेकर तकनीक अपनाना किसानों के लिए अधिक सुरक्षित और व्यावहारिक तरीका हो सकता है।

निष्कर्ष

स्मार्ट खेती खेती को पूरी तरह मशीनों के हवाले करने का नाम नहीं है। इसका मकसद किसान को सही समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराना और पानी, खाद, दवा, श्रम तथा ऊर्जा जैसे संसाधनों का अधिक समझदारी से इस्तेमाल करना है। आने वाले समय में डिजिटल तकनीक और प्रिसिजन फार्मिंग भारतीय कृषि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

ADVERTISEMENT
Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

संबंधित खबरें

स्मार्ट फार्मिंग क्या है? जानिए कैसे बदल रही है किसानों की खेती और कमाई

2026-08-04 18:48:18

रासायनिक खाद से बेहतर क्यों मानी जाती है जैविक खाद, जानिए वजह

2026-07-17 10:00:15

गोबर की खाद और वर्मी कम्पोस्ट में क्या अंतर? किस फसल के लिए कौन बेहतर, जानिए

2026-09-10 18:11:14

काले धान की खेती से किसानों की बढ़ी कमाई, ब्लैक राइस की मांग ने बदली तस्वीर

2026-07-04 09:17:23

गुलाब की फसल किस मौसम में तैयार होती है? जानिए सही समय

2026-08-08 17:43:12

धान की फसल में कीटों से बचाव के आसान और वैज्ञानिक उपाय, जानिए पूरी जानकारी

2026-08-05 16:58:39

बूंदी-झालावाड़ में पुराने ट्रैक्टरों की बढ़ी मांग, जानिए टॉप विकल्प

2026-07-19 20:55:06

मशरूम की खेती से कम लागत में कमाएं अच्छा मुनाफा, जानिए तरीका

2026-07-18 12:58:02

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर